जर्मनी ने ईरान युद्ध से किया किनारा, ट्रंप के इस फैसले पर नाराजगी भी जताई

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने शुक्रवार को नॉर्वे के दौरे के दौरान कहा कि जर्मनी इस युद्ध में शामिल नहीं है और न ही वह इसका हिस्सा बनना चाहता है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहे हैं और पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है.

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जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले की आलोचना की है (File Photo- AP) जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले की आलोचना की है (File Photo- AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:41 PM IST

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच जर्मनी ने साफ कर दिया है कि वह ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष का हिस्सा नहीं बनेगा. जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने शुक्रवार को नॉर्वे के दौरे के दौरान कहा कि जर्मनी इस युद्ध में शामिल नहीं है और न ही वह इसका हिस्सा बनना चाहता है.

नॉर्वे के एंडेनेस शहर में अपने समकक्ष जोनास गहर स्टोर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मर्ज ने कहा, 'जर्मनी इस युद्ध का हिस्सा नहीं है और हम इसका हिस्सा बनना भी नहीं चाहते.'

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उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहे हैं और पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है. ईरान द्वारा NATO देशों (फ्रांस, इटली और तुर्की) के सैन्य बेस पर भी अटैक किए गए हैं. इसके बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या NATO देश भी इस युद्ध में कूदेंगे?

रूसी तेल पर अमेरिका के फैसले की आलोचना

जर्मन चांसलर ने इस दौरान अमेरिका के उस फैसले की भी आलोचना की, जिसमें समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद पर कुछ प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से ढील दी गई है. मर्ज ने कहा कि G7 समूह के छह सदस्य देशों ने इस फैसले पर स्पष्ट रूप से असहमति जताई थी. उनके अनुसार, यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत संदेश देता है.

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उन्होंने कहा, 'G7 के छह देशों ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा था कि यह सही संकेत नहीं है. लेकिन हमें आज सुबह पता चला कि अमेरिकी सरकार ने अलग फैसला किया है. एक बार फिर हम मानते हैं कि यह गलत निर्णय है.'

ऊर्जा संकट पर अलग राय

मर्ज ने कहा कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट में मुख्य समस्या आपूर्ति की कमी नहीं बल्कि कीमतों की है. उनके मुताबिक, समस्या आपूर्ति की नहीं बल्कि कीमतों की है. हम यह भी जानना चाहते हैं कि अमेरिकी सरकार ने यह फैसला किन अतिरिक्त कारणों से लिया.

अमेरिका ने हाल ही में देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने के लिए सीमित अवधि की अनुमति दी है. यह फैसला उस समय लिया गया जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं.

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