अमेरिका में अडानी के खिलाफ दर्ज केस खत्म, $10 अरब निवेश के वादे के बाद फैसला

अमेरिका में गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को बड़ी कानूनी राहत मिली है. अमेरिकी न्याय विभाग ने दोनों के खिलाफ सभी आपराधिक आरोप हमेशा के लिए वापस ले लिए हैं. न्यूयॉर्क में चल रहा हाई-प्रोफाइल सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड केस अब पूरी तरह बंद हो गया है.

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गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ US में केस बंद, कोर्ट ने आरोप किए खारिज. (File Photo: ITG) गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ US में केस बंद, कोर्ट ने आरोप किए खारिज. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:41 PM IST

अमेरिकी सरकारी वकीलों ने कोर्ट को बताया कि मामले की समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं. इसके बाद कोर्ट ने गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज करने का आदेश दिया. इस मामले को अब दोबारा नहीं खोला जा सकता.

कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों में अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा, "इस मामले की समीक्षा की गई है. कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए न्याय विभाग ने ये फैसला किया है कि अब इन व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक आरोपों पर और संसाधन खर्च नहीं किए जाएंगे." पिछले कुछ दिनों में अडानी ग्रुप से जुड़ी रेगुलेटरी जांचें भी बंद हुई हैं. 

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इससे पहले US सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़े निवेशकों को दी गई जानकारियों के मामले में गौतम और सागर अडानी के खिलाफ लगाए गए सिविल आरोपों का निपटारा किया था. कोर्ट दस्तावेजों के मुताबिक, गौतम ने 6 मिलियन और सागर ने 12 मिलियन डॉलर देने पर सहमति दी थी. 

हालांकि, दोनों ने किसी भी गलत काम को न तो स्वीकार किया और न ही उससे इनकार किया. इसके बाद अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने LPG आयात में ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों का भी निपटारा कर दिया. इसमें अडानी समूह ने 275 मिलियन डॉलर देने पर सहमति जताई थी. इसके साथ ही अडानी के वकील, जो डोनाल्ड ट्रंप के पर्सनल वकील भी हैं, ने पिछले महीने कहा कि उनके क्लाइंट US में $10 बिलियन निवेश करना चाहते है, लेकिन केस चलने तक ऐसा नहीं कर सके. 

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इसके साथ ही जांच में व्यापक सहयोग और सक्रिय रूप से जानकारी साझा करने की बात भी सामने आई. दरअसल, 2024 के आखिर में SEC और DOJ ने अडानी परिवार के खिलाफ मामला दर्ज किया था. आरोप लगाया गया था कि भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर 265 मिलियन डॉलर की रिश्वतखोरी की साजिश रची गई थी.

ऐसा इसलिए किया गया, ताकि सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के ठेके हासिल किए जा सकें. इसके साथ ही अमेरिकी निवेशकों और कर्जदाताओं से इस साजिश को छिपाने का आरोप भी लगाया गया था. हालांकि अब यह पूरा मामला बंद हो चुका है. अमेरिकी आपराधिक मामलों में किसी केस का पूर्वाग्रह के साथ खारिज होना आम बात नहीं मानी जाती. 

आमतौर पर ऐसा तब होता है जब लंबी कानूनी समीक्षा के बाद यह तय हो जाए कि केस को आगे बढ़ाना उचित नहीं है. इस मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, जांच के दौरान अभियोजकों को आरोप साबित करने के लिए कोई स्पष्ट अमेरिकी जुड़ाव और पर्याप्त सबूत नहीं मिले. इसके बाद केस अडानी परिवार के पक्ष में मुड़ता चला गया.

यह फैसला अमेरिकी अभियोजकों और अडानी की कानूनी टीम के बीच महीनों चली बातचीत और समीक्षा प्रक्रिया के बाद आया. सुलिवन एंड क्रॉमवेल के पांच अमेरिकी कानूनी सलाहकारों ने निक्सन पीबॉडी, हेकर फिंक, नॉर्टन रोज फुलब्राइट और ब्रेसवेल के साथ मिलकर अमेरिकी अधिकारियों के सामने कई कानूनी दलीलें पेश की थीं.

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