ग्रीनलैंड की मदद के लिए आगे आए यूरोपीय देशों के सैनिक धीरे-धीरे वहां पहुंचने लगे हैं. लेकिन ये संख्या वहां पहले से मौजूद अमेरिकी सैनिकों से भी कम है. किसी ने एक, किसी ने दो तो किसी ने 13 सैनिक भेजे हैं.
बता दें कि ये सैनिक ग्रीनलैंड में हो रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास (Operation Arctic Endurance) के लिए पहुंच रहे हैं. इनका मकसद डेनमार्क को सैन्य अभ्यास की तैयारी में मदद करना है. यूरोपीय सेनाओं की सीमित तैनाती से अमेरिका को संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है.
बता दें कि कल डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों की अमेरिकी मंत्रियों से मीटिंग हुई थी. इसमें गतिरोध पर कोई सफलता नहीं मिली थी. उल्टा उस बैठक के बाद, ट्रंप ने अपने इस दावे को दोहराया कि अगर रूस या चीन कभी भी ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहें तो डेनमार्क अपने स्वायत्त क्षेत्र की रक्षा करने में सक्षम नहीं होगा.
निकल रहे दो संदेश, ट्रंप किसे मानेंगे?
रॉयल डेनिश डिफेंस कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर मार्क जैकबसेन ने कहा कि ग्रीनलैंड में यूरोपीय सैन्य तैनाती ने अमेरिकी प्रशासन को दो संदेश दिए. रॉयटर्स से बातचीत में उन्होंने कहा, 'एक तो रोकना है, यह दिखाना है कि अगर आप सैन्य रूप से कुछ करने का सोचते हैं, तो हम ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए तैयार हैं.'
और दूसरा मेसेज यह है कि, 'ठीक है, हम आपकी चेतावनी (चीन-रूस से खतरे वाली) को गंभीरता से लेते हैं, हम यहां अपनी उपस्थिति बढ़ाते हैं, अपनी संप्रभुता का ध्यान रखते हैं और ग्रीनलैंड पर निगरानी में सुधार करते हैं.'
ग्रीनलैंड में सैनिक क्यों भेजे जा रहे हैं इसके जवाब में डेनमार्क के रक्षा मंत्री ट्रोल्स लुंड पॉल्सन ने कहा था, 'यह दिखाना जरूरी है कि आर्कटिक की सुरक्षा केवल डेनमार्क साम्राज्य का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह नाटो के सभी देशों के लिए है.'
यूरोपीय संघ के प्रमुख देशों ने डेनमार्क का समर्थन करते हुए चेतावनी दी है कि नाटो के किसी क्षेत्र पर अमेरिकी सेना का कब्जा वॉशिंगटन के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन NATO के अंत का कारण बन सकता है.
पहले कितने सैनिक तैनात थे
बता दें कि डेनमार्क के संयुक्त आर्कटिक कमांड में द्वीप पर लगभग 150 सैन्य और नागरिक कर्मी मौजूद थे. अब जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड और नीदरलैंड ने कहा है कि वे इस साल के अंत में होने वाले बड़े सैन्य अभ्यासों की तैयारी शुरू करने के लिए सैन्य कर्मियों को भेज रहे हैं.
सैनिकों की तैनाती पर अमेरिका क्या बोला
व्हाइट हाउस ने गुरुवार को कहा कि अमेरिकी अधिकारियों और डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक अच्छी रही थी. साथ ही. उनकी प्रवक्ता कैरोलिन लीविट ने एक ब्रीफिंग में ये भी कहा, 'मुझे नहीं लगता कि यूरोपीय सैनिकों की तैनाती राष्ट्रपति की निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित कर पाएगी, ग्रीनलैंड के अधिग्रहण के उनके टारगेट पर कोई असर नहीं होगा.'
अमेरिकी चेतावनी पर रूस का बयान भी आया
रूस ने गुरुवार को कहा कि नाटो द्वारा मॉस्को और बीजिंग को ग्रीनलैंड के लिए खतरा बताने की बात एक मनगढ़ंत कहानी है जिसका मकसद दहशत फैलाना है. उसने क्षेत्र में टकराव बढ़ने के खतरों के बारे में चेतावनी दी. यह भी कहा गया कि फिलहाल इस बात के बहुत कम सबूत हैं कि बड़ी संख्या में चीनी और रूसी जहाज ग्रीनलैंड के तटों के पास से गुजरते हैं.
ग्रीनलैंड में 200 अमेरिकी सैनिक
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने बुधवार को बताया था कि लगभग 200 अमेरिकी सैनिक वर्तमान में ग्रीनलैंड में तैनात हैं, जिसकी आबादी लगभग 57,000 है.
फिलहाल फ्रांस (15 माउंटेन एक्सपर्ट) और नॉर्वे (2 सैनिक) से सैनिक ग्रीनलैंड पहुंच चुके हैं. इसके अलावा जर्मनी ने 13 सदस्यीय टोही दल को पहले कोपेनहेगन भेजा, उसके बाद वे डेनमार्क के अधिकारियों के साथ ग्रीनलैंड के लिए रवाना हुए. इसके अलावा स्वीडन तीन सैन्य अधिकारी भेजेगा.
वहीं UK ने एक अधिकारी भेजने की बात कही है, वहीं नीदरलैंड्स एक नाविक अधिकारी भेज रहा है और फिनलैंड दो लायजन ऑफिसर (सैन्य संपर्क अधिकारी) भेजेगा.
हालांकि, NATO के कुछ देश इस सैन्य अभ्यास (जो सितंबर में होना है) से दूरी भी बना रहे हैं. जैसे पोलैंड ने साफ कहा है कि वह अपना कोई सैनिक ग्रीनलैंड नहीं भेज रहा है.
बता दें कि ट्रंप का कहना है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और खनिज संपदा से भरपूर यह द्वीप अमेरिकी सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है और उन्होंने इसे हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया है. ग्रीनलैंड और डेनमार्क का कहना है कि यह द्वीप बिक्री के लिए नहीं है और बल प्रयोग की धमकियां गैरजिम्मेदाराना हैं.
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