Explained: कनाडा-US की नागरिकता लेने के बाद भारत में कैसे रहते हैं भारतीय मूल के लोग?

विदेश की नागरिकता लेने के बाद भारतीय मूल के लोगों का भारत से रिश्ता खत्म नहीं होता, लेकिन उसका स्वरूप जरूर बदल जाता है. भारत की सरकार इन्हें कुछ खास सुविधाएं देती है.

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क्या होता है OCI कार्ड? क्या होता है OCI कार्ड?

हुमरा असद

  • टोरंटो,
  • 11 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:00 AM IST

हर साल बड़ी संख्या में भारतीय बेहतर नौकरी, पढ़ाई और स्थायी रूप से बसने के लिए कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का रुख करते हैं. इनमें से कई लोग कुछ साल बाद वहां की नागरिकता भी हासिल कर लेते हैं लेकिन जैसे ही कोई भारतीय किसी दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार करता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वत: खत्म हो जाती है. क्योंकि भारत में दोहरी नागरिकता का प्रावधान नहीं है.

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ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विदेशी नागरिकता लेने वाला शख्स भारत के लिए 'विदेशी' बन जाता है? यानी भारत का नागरिक रहा शख्स वैसा ही हो जाता है जैसे किसी दूसरे देश का मूल निवासी होता है.

हालांकि ऐसा नहीं है. भारत का संविधान दोहरी नागरिकता नहीं देता लेकिन ऐसे लोग भारत में ऐसे लोग Oversea Citizen of India कहलाते हैं. ये लोग भारत की प्रवासी नागरिकता (OCI) कार्ड रख सकते हैं. जो इन्हें भारत में पहले की तरह कई अधिकार देता है. आइये जानते हैं, विदेशी नागरिकता लेने वाले भारतीय कैसे भारत आते हैं और यहां रहते हैं? क्या उन्हें हर बार वीजा लेना पड़ता है? और उनके पास भारत में पहले जैसे कौन-कौन से अधिकार रहते हैं?

भारत उन देशों में शामिल है जहां दोहरी नागरिकता यानी Dual Citizenship की अनुमति नहीं है. इसका मतलब यह है कि अगर किसी भारतीय ने कनाडा, अमेरिका या किसी अन्य देश की नागरिकता ले ली, तो भारतीय कानून के तहत उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त मानी जाती है यानी-

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  • वह भारतीय पासपोर्ट इस्तेमाल नहीं कर सकता
  • भारतीय नागरिक के तौर पर मिलने वाले संवैधानिक अधिकार खत्म हो जाते हैं
  • उसे विदेशी नागरिक माना जाता है

इसी वजह से कनाडाई या अमेरिकी नागरिक बनने के बाद भारतीय मूल के लोगों को भारतीय पासपोर्ट जमा कराना पड़ता है. इसे पासपोर्ट सरेंडर प्रक्रिया कहा जाता है. अगर कोई व्यक्ति विदेशी नागरिकता लेने के बाद भी भारतीय पासपोर्ट का इस्तेमाल करता है, तो उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

भारत कैसे आते हैं भारतीय मूल के लोग?

विदेशी नागरिकता लेने के बाद भारतीय मूल के लोग मुख्य रूप से दो तरीकों से भारत आते हैं-OCI कार्ड या वीजा के जरिए. ऐसे लोग आमतौर पर OCI कार्ड रखते हैं.

क्या होता है OCI कार्ड?

OCI यानी Overseas Citizen of India एक विशेष व्यवस्था है, जिसे भारत सरकार ने विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिए शुरू किया था. नाम में “Citizen” शब्द जरूर है, लेकिन यह पूरी भारतीय नागरिकता नहीं होती. OCI कार्ड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि विदेशी नागरिक बन चुके भारतीयों को बार-बार वीजा लेने की जरूरत नहीं पड़ती. वे अपने विदेशी पासपोर्ट के साथ OCI कार्ड दिखाकर भारत आ सकते हैं.

उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति ने कनाडा की नागरिकता ले ली है, तो अब वह भारतीय पासपोर्ट की जगह कनाडाई पासपोर्ट इस्तेमाल करेगा. भारत आने के लिए वह या तो OCI कार्ड रखेगा या फिर भारतीय वीजा लेगा. वीजा लेने की स्थिति में वो जितनी बार भारत आएगा उसे उतनी बार वीजा लेना होगा जबकि OCI कार्ड के साथ ऐसा नहीं है.

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OCI कार्ड से क्या सुविधाएं मिलती हैं?

  • OCI कार्ड धारकों को भारत यात्रा में काफी आसानी मिलती है. उन्हें जिंदगीभर भारत आने-जाने की अनुमति मिलती है.
  • मल्टीपल एंट्री की सुविधा मिलती है.
  • हर बार वीजा लेने की जरूरत नहीं पड़ती.
  • लंबे समय तक भारत में रहने की अनुमति होती है.
  • बैंक खाते, PAN और कुछ निवेश संबंधी काम करना आसान होता है.

OCI कार्ड सुविधाएं जरूर देता है, लेकिन यह भारतीय नागरिकता के बराबर नहीं माना जाता. विदेशी नागरिकता लेने के बाद व्यक्ति कई ऐसे अधिकार खो देता है, जो सिर्फ भारतीय नागरिकों को मिलते हैं.

कौन-कौन से अधिकार खत्म हो जाते हैं?

  • वोट डालने का अधिकार खत्म-विदेशी नागरिक बनने के बाद व्यक्ति भारत में मतदान नहीं कर सकता यानी लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय चुनावों में वोट डालने का अधिकार समाप्त हो जाता है.
  • चुनाव नहीं लड़ सकते- OCI कार्ड धारक सांसद, विधायक, मेयर, पार्षद, सरपंच जैसे चुनाव नहीं लड़ सकते. भारत का संविधान केवल भारतीय नागरिकों को ही चुनाव लड़ने की अनुमति देता है.
  • सरकारी नौकरी नहीं- विदेशी नागरिक बन चुके लोगों के लिए भारत की अधिकांश सरकारी नौकरियों के दरवाजे बंद हो जाते हैं. वे IAS, IPS, IFS, सेना, खुफिया एजेंसियां, संवेदनशील सरकारी विभाग जैसी सेवाओं में नियुक्त नहीं हो सकते.
  • भारतीय पासपोर्ट रखने की अनुमति नहीं-विदेशी नागरिकता लेने के बाद भारतीय पासपोर्ट रखना गैरकानूनी हो जाता है. ऐसे लोगों को अपना भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करना अनिवार्य होता है.
  • कृषि भूमि खरीदने पर रोक- OCI कार्ड धारक भारत में खेती की जमीन, कृषि भूमि, प्लांटेशन प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकते. हालांकि वे फ्लैट, घर या कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं.
  • कुछ क्षेत्रों में यात्रा प्रतिबंध- भारत के कुछ संवेदनशील या सीमावर्ती इलाकों में जाने के लिए OCI धारकों को विशेष अनुमति लेनी पड़ सकती है.

भारत आने के अन्य विकल्प

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अगर किसी विदेशी नागरिक के पास OCI कार्ड नहीं है, तो उसे भारत आने के लिए सामान्य वीजा लेना पड़ता है। इसमें टूरिस्ट वीजा, बिजनेस वीजा, मेडिकल वीजा, एंट्री वीजा जैसी श्रेणियां शामिल हैं. हालांकि लंबे समय तक भारत आने-जाने वाले ज्यादातर भारतीय मूल के लोग OCI कार्ड बनवा लेते हैं, क्योंकि यह ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है.

NRI और OCI में भी फर्क
कई लोग NRI और OCI को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग हैं. NRI यानी Non-Resident Indian वह व्यक्ति होता है जो भारतीय नागरिक है, लेकिन नौकरी या पढ़ाई के लिए विदेश में रह रहा है. उसके पास भारतीय पासपोर्ट होता है और वह वोट भी डाल सकता है. वहीं OCI विदेशी नागरिक होता है, जिसके पास दूसरे देश का पासपोर्ट होता है.

क्यों बनाई गई OCI व्यवस्था?

भारत से बाहर बसे भारतीय मूल के लोगों की संख्या करोड़ों में है. खासकर कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों में भारतीय समुदाय काफी बड़ा है. इन लोगों का भारत से पारिवारिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ता बना रहे, इसी उद्देश्य से OCI व्यवस्था शुरू की गई थी. इससे विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोग भारत से आसानी से जुड़े रह सकते हैं.

क्या भविष्य में दोहरी नागरिकता देगा भारत?

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यह सवाल लंबे समय से चर्चा में है, लेकिन फिलहाल भारत सरकार ने दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं दी है. सरकार का कहना है कि OCI व्यवस्था प्रवासी भारतीयों को पर्याप्त सुविधाएं देती है.

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