ड्रग लॉर्ड का Dead End... पाब्लो एस्कोबार की गलतियों से सबक लेकर बचता रहा था अल मेंचो

बीते रविवार को पुलिस मुठभेड़ में अल मेंचो की मौत हुई. वह अमेरिका का मोस्ट वॉटेंड ड्रग तस्कर था और मेक्सिको के सबसे ताकतवर, प्रभावशाली और बेरहम माफिया गैंग में से एक का सरगना था. 

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अल मेंचो की मौत चर्चा में क्यों हैं. (File Photo: Social Media) अल मेंचो की मौत चर्चा में क्यों हैं. (File Photo: Social Media)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:37 PM IST

शुरुआत में उसकी सिर्फ 3 तस्वीरें थीं. कायदे से तो उन्हें तस्वीर कहना भी सही नहीं होगा. 1990 के दशक की शुरुआत में अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन यानी डीईए ने गिरफ्तारी के समय उसके तीन मगशॉट लिए थे. पहली बार उसे थोड़ी सी मारिजुआना के साथ पकड़ा गया था. दूसरी दफा वह सैन फ्रांसिस्को के एक बार में अंडरकवर ऑफिसर्स को हेरोइन बेचते हुए दबोचा गया. उस समय उसकी उम्र 20 साल से कुछेक साल ज्यादा ही रही होगी.

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वो गैरकानूनी रूप से अमेरिका की सीमा में दाखिल होता, पुलिस के हत्थे चढ़ता और डिपोर्ट कर दिया जाता. लेकिन फिर अमेरिका आ धमकता लेकिन उसने कुछेक साल जेल में बिताने के बाद मेक्सिको लौटने का फैसला किया. इसके बाद से पुलिस रिकॉर्ड में उसकी कोई नई तस्वीर कैद नहीं हो पाई. यहां बात हो रही है मेक्सिको के सबसे ताकतवर ड्रग माफिया अल मेंचो की.

ड्रग माफिया का नाम लेते ही बेशक सबसे पहले जेहन में पाब्लो एस्कोबार का चेहरा आता हो. लेकिन पाब्लो से इतर मेंचो के धंधे में वर्सेटैलिटी थी. वह ड्रग्स तक सीमित नहीं रहा. उगाही से लेकर चोरी, माइग्रेंट ट्रैफिकिंग का उसका कारोबार मेक्सिको की दहलीज लांघकर अमेरिका तक फैला था. जज, नेता और सैन्य अधिकारियों का कत्ल करने के लेकर शहर दर शहर चक्का जाम करना, भाड़े के विदेशी गुंडों से जुर्म करवाना और सेना के हेलिकॉप्टर तक मार गिराने जैसे काम अल मेंचो का कार्टेल धड़ल्ले से करता था. 

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बीते रविवार को पुलिस मुठभेड़ में अल मेंचो की मौत हुई. वह मोस्ट वॉटेंड ड्रग तस्कर था और मेक्सिको के सबसे ताकतवर, प्रभावशाली और बेरहम माफिया गैंग में से एक का सरगना था. 

अपराध की दुनिया में मेंचो की एंट्री

लेकिन अल मेंचो के अपराध की दुनिया में दाखिल होने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. वह मेक्सिको के मिशोएगन के गरीब किसान घर में पैदा हुआ. यह एक ऐसा इलाका था, जहां कपास और अफीम की खेती होती थी.  युवावस्था में अमेरिका की सीमाएं पार करने के बाद उसने अपराध की दुनिया में सबसे निचले पायदान से शुरुआत की. वह सिनालोआ कार्टेल से जुड़े एक गुट के लिए सुपारी किलर के तौर पर काम करने लगा. 

लेकिन 2009 में वह मिलेनियो कार्टेल के सरगना को धोखा देकर विपक्षी सिनालोआ कार्टेल के किंगपिन की शरण में चला गया और खुद को उसका भरोसेमंद आदमी बना लिया. यही उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ. उसने 2010 में जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (CJNG) को खड़ा किया, जो शुरुआत में सिनालोआ कार्टेल का ही हथियारबंद विंग था. 

लेकिन एक साल के भीतर ही मेंचो ने सबसे ताकतवर हमले को अंजाम दिया. 20 सिंतबर 2011 को शाम पांच बजे छह वैन ने अचानक ही बोका डेल रियो में हाईवे ब्लॉक कर दिया. ये दरअसल वेराक्रूज के सबसे पॉपुलर टूरिस्ट इलाकों में से एक था. अचानक से वैन के दरवाजे खुले और 35 शवों को बीच हाईवे फेंक दिया गया. बताया गया कि ये शव लॉस जेटास नाम के एक गुट के सदस्यों के थे, जो उस समय सिनालोआ कार्टेल का कट्टर प्रतिद्वंद्वी था. इसी ऑपरेशन से अल मेंचो को द जेटा किलर्स का नाम मिला.

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लेकिन सिनालोआ से मेंचो की जुगलबंदी ज्यादा समय तक नहीं चली. पुलिस मुठभेड़ में उसके रहनुमा इग्नैसियो कोरोनेल की मौत के बाद अल मेंचो पर धोखा देने का आरोप लगा. इससे कैलकुलेटिव, निर्दयी और धोखेबाज के तौर पर मेंचो की छवि को मजबूती मिली. उसकी छवि एक ऐसे शख्स के तौर पर बनी जो दिखावे और ऐशो-आराम की जिंदगी से दूर रहता था जबकि यही चीजें बाकी ड्रग माफियाओं के पतन का कारण बना.

पाब्लो से लेकर चापो तक की गलतियों से सीखा

जैसे-जैसे अन्य कार्टेल ढहते गए, उससे फायदा उठाकर मेंचो अपनी ताकत बढ़ाता चला गया. मेक्सिको में लगभग 20 वर्षों तक सरकारों का फोकस सिनालोआ कार्टेल, लोस जेटास और कैबेलेरोस टैम्पलारियोस पर था जबकि अल मेंचो के लोग इन कार्टेल की गलतियों से सीखते हुए आगे बढ़ रहे थे. 

मेंचो ने पुराने पैसिफिक तस्करों से राजनीतिक नेटवर्क बनाना सीखा तो लोस जेटास से सौदेबाजी करने के लिए हिंसा का किसी भी हद तक इस्तेमाल करना सीखा. उसे जहां से भी मौका मिला, वह नार्को-प्रोपेगैंडा और सिंथेटिक ड्रग्स खासकर मेथाम्फेटामिन का कारोबार बढ़ाना सीखता चला गया. मेंचो का कार्टेल फ्रेंचाइजी की तरह काम करता था. उसने उसे एक ऐसे ब्रांड के तौर पर खड़ा किया, जो सिर्फ ड्रग्स तक सीमित नहीं रहा बल्कि हर अवैध कारोबार में उतरता चला गया.

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बीते कुछ सालों में सोशल मीडिया पर ऐसे कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें पैरामिलिट्री वर्दी पहने, असॉल्ट राइफलें थामे और गाड़ियों पर लटके लड़ाके सड़कों पर नारे लगाते नजर आते हैं. ये लोग CJNG का लोगो लगी टीशर्ट पहनी हैं और लॉर्ड ऑफ द रूस्टर्स के नारे लगा रहे हैं, जो मेंचो का ही एक और निकनेम है.

अल मेंचो का कार्टेल और उसके खिलाफ सरकार की मुहिम लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के अंतहीन सिलसिले से भरी हुई है. 2015 में मेक्सिको सेना के हाथों अल चापो को ढेर कर दिया गया था. इसके बाद से मेंचो को वैश्विक स्तर पर अल चापो का उत्तराधिकारी माना जाने लगा था. इसके जवाब में मेंचो ने सैन्य काफिले पर घात लगाकर हमला कराया, जिसमें 15 सैनिक मारे गए. इसके बाद सेना ने कार्टेल के कई हथियारबंद लड़ाकों को गिरफ्तार करना शुरू किया. यहीं से कार्टेल और सेना के बीच गतिरोध चरम पर पहुंच गया. जलिस्को में माफिया सड़कों की नाकेबंदी करने लगे. इतना ही नहीं, सेना के एक हेलिकॉप्टर को रॉकेट लॉन्चर से मार गिराया गया.

2020 में मेंचो के बेटे रूबेन के प्रत्यर्पण का जवाब मेंचो ने उस जज की हत्या से दिया, जिसने प्रत्यर्पण का फैसले पर मुहर लगाई थी.  जज को उसके ही घर में गोली मार दी गई. उसी साल के अंत में जलिस्को के पूर्व गवर्नर अरिस्तोतलेस सैंडोवाल की भी हत्या कर दी गई. उन्हें राज्य के पर्यटन केंद्र प्यूर्टो वल्लार्ता के एक बार के बाथरूम में मार डाला गया.

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उसी साल एक बड़ा मोड़ भी आया. उस समय मेक्सिको सिटी के पुलिस चीफ ओमार गार्सिया हारफुच के काफिले पर हमला किया. 28 हथियारबंद हमलावरों ने उनका रास्ता रोक लिया और चार मिनट के भीतर राइफलों से 100 से अधिक गोलियां दाग दीं. हारफुच इस हमले में बच गए, लेकिन देश की राजनीतिक और आर्थिक सत्ता के केंद्र में मेंचो का दबदबा और बढ़ा. 

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