ट्रंप का कनाडा को 'सुप्रीम' झटका, 'बोर्ड ऑफ पीस' से वापस लिया आमंत्रण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को अपने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता वापस ले लिया है. यह नया अंतरराष्ट्रीय मंच वैश्विक संघर्षों के समाधान और शुरुआती तौर पर गाजा के पुनर्निर्माण के लिए बनाया गया है. अब तक करीब 35 देशों, खासकर पश्चिम एशिया के प्रमुख देशों ने इसमें शामिल होने की सहमति दी है, जबकि कई यूरोपीय देश इससे दूरी बनाए हुए हैं.

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ट्रंप के बोर्ड में शामिल होने के लिए देशों को कम से कम एक अरब अमेरिकी डॉलर की फीस देनी होगी. (File Photo: ITG) ट्रंप के बोर्ड में शामिल होने के लिए देशों को कम से कम एक अरब अमेरिकी डॉलर की फीस देनी होगी. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • वॉशिंगटन,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:29 AM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कनाडा को अपने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का दिया गया न्योता वापस ले लिया. यह बोर्ड वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के उद्देश्य से बनाया गया है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर एक पोस्ट शेयर कर इसकी जानकारी दी है.

ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को संबोधित करते हुए 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि यह पत्र इस बात का संकेत है कि बोर्ड ऑफ पीस कनाडा को शामिल करने का अपना निमंत्रण वापस ले रहा है. ट्रंप ने इसे अब तक का सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक नेतृत्व मंच बताया.

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ट्रंप का 'बोर्ड ऑफ पीस' क्या है

ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने नए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की शुरुआत की है. इस पहल के तहत कई देशों ने बोर्ड में शामिल होने के लिए भेजे गए निमंत्रण पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी है. शुरुआती तौर पर इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा के पुनर्निर्माण पर काम करना बताया गया है.

गुरुवार सुबह तक करीब 35 देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने की सहमति दी है. इनमें इजरायल, तुर्की, मिस्र, सऊदी अरब और कतर जैसे पश्चिम एशिया के प्रमुख देश शामिल हैं. हालांकि, अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी माने जाने वाले कई यूरोपीय देश अभी इस पहल से दूरी बनाए हुए हैं और न तो सदस्यता को लेकर पूरी तरह सहमत हुए हैं और न ही इसके फीस सिस्टम पर हामी भरी है.

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बोर्ड में शामिल होने के लिए देनी होगी फीस
 
ड्राफ्ट के मुताबिक, बोर्ड में स्थायी सदस्य बनने के लिए किसी भी देश को कम से कम एक अरब अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना होगा. ट्रंप के इस बोर्ड के आजीवन अध्यक्ष रहने की संभावना जताई जा रही है. अन्य सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का होगा.

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि करीब 50 देशों को बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा गया है, लेकिन कई देशों की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है. अंतिम रूप से किन देशों की सदस्यता तय होगी, इसकी सूची अभी जारी नहीं की गई है. फिलहाल कुछ देशों ने बोर्ड में शामिल होने की सहमति दी है, कुछ ने इनकार किया है, जबकि कई देश अब भी अपने फैसले पर विचार कर रहे हैं.

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