अमेरिका आओ, सिखाओ और लौट जाओ... ऐसी है ट्रंप की नई वीजा पॉलिसी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि आप बेरोजगारों की कतार से किसी को उठाकर यह नहीं कह सकते कि हम अब मिसाइल बनाएंगे क्योंकि ऐसा नहीं हो सकता.

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई H-1B वीजा पॉलिसी कैसी है. (Photo: Reuters) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई H-1B वीजा पॉलिसी कैसी है. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 6:44 PM IST

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई H-1B वीजा नीति का उद्देश्य  कुशल विदेशी एक्सपर्ट्स को अस्थायी रूप से अमेरिका लाना है ताकि वे अमेरिकी कर्मचारियों को प्रशिक्षित करें, न कि उनकी जगह लें. 

वित्त मंत्री बेसेंट ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बताया कि ट्रंप की यह योजना एक तरह से नॉलेज ट्रांसफर के तौर पर डिजाइन की गई है, जिसका मकसद दशकों की आउटसोर्सिंग के बाद अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग, शिपबिल्डिंग और सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षेत्रों को फिर से खड़ा करना है.

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बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी कर्मचारियों को प्रशिक्षित करो और फिर अपने देश लौट जाओ. उसके बाद अमेरिकी कामगार पूरी तरह जिम्मेदारी संभालेंगे.

जब उनसे यह पूछा गया कि क्या विदेशी कर्मचारियों की वजह से अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां प्रभावित होंगी, तो बेसेंट ने सख्त लहजे में जवाब दिया कि अभी कोई अमेरिकी वह काम कर ही नहीं सकता. अभी नहीं. हमने यहां वर्षों से न जहाज बनाए हैं, न सेमीकंडक्टर. विदेशी साझेदार यहां आकर अमेरिकी कर्मचारियों को सिखाएं, यही तो असली सफलता है.

बेसेंट ने कहा कि ट्रंप का लक्ष्य H-1B जैसी अस्थायी वीजा योजनाओं का उपयोग करके सीमित अवधि के लिए विदेशी विशेषज्ञता को अमेरिका लाना है, ताकि अमेरिकी कामगार आवश्यक कौशल हासिल कर सकें. इससे पहले कि विदेशी पेशेवर अपने देश लौट जाएं. उन्होंने बताया कि यह योजना ट्रंप की व्यापक नीति को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण उद्योगों को फिर से अमेरिका में स्थापित करना और आयात पर निर्भरता कम करना है.

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यह बयान ऐसे समय में आया है, जब विदेशी श्रम को लेकर ट्रंप की टिप्पणियों ने उनके “MAGA” (Make America Great Again) समर्थक वर्ग में मतभेद पैदा कर दिए हैं. एक अन्य फॉक्स इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में कुछ खास प्रकार की प्रतिभाएं नहीं हैं इसलिए तकनीकी क्षेत्रों में अमेरिकियों को प्रशिक्षित करने के लिए विदेशी विशेषज्ञों की जरूरत है.

बेसेंट ने प्रशासन की आर्थिक नीति पर भी बात की और पुष्टि की कि सरकार एक संभावित 2,000 अमेरिकी डॉलर के टैरिफ रिबेट पर विचार कर रही है, जो उन परिवारों को दिया जाएगा जिनकी वार्षिक आय एक लाख डॉलर (लगभग ₹83 लाख) से कम है.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति 2,000 डॉलर की रिबेट योजना पर बात कर रहे हैं. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम परिवार मजबूत व्यापार नीति के फायदे को महसूस कर सकें. 

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