अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देश को संबोधित करने वाले थे तो पूरी दुनिया को लगा कि जंग खत्म करने का ऐलान करेंगे, लेकिन वे आए और 20 मिनट की स्पीच में अगले 20 दिन का वॉर प्लान बता गए. ट्रंप ने कहा कि ईरान से डील की कोई जरूरत नहीं है, अमेरिका अपना अभियान जारी रखेगा. अगले दो-तीन हफ्ते बताएंगे कि ईरान के खिलाफ क्या बड़ा कदम उठाएंगे. ट्रंप के इस ऐलान के बाद ईरान ने फिर इजरायल की ओर ड्रोन दागे.
वॉर का नया फेज शुरू हो गया है जिसमें अब मुकाबला है ईरानी ड्रोन्स और अमेरिका के 2000 पाउंड के हेवी बमों के बीच. अमेरिका, इजरायल और ईरान तीनों देशों की ओर से आधुनिक वेपन्स का इस्तेमाल किया जा रहा है, साथ ही लेबनान में इजरायल हवाई और जमीन ऑपरेशन चला रहा है. अब जंग आगे किस दिशा में जाएगी इसपर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं.
'ड्रोन वॉर 2.0 बनाम GBU'
ट्रंप के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि अब यह संघर्ष सिर्फ जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हथियारों और तकनीक के जरिए युद्ध अलग दिशा में जा सकता है. ईरान के ड्रोन हमलों और अमेरिका के 2000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों के बीच शुरू हुई यह टक्कर आने वाले दिनों में और कई स्तरों पर फैल सकती है. क्या युद्ध का ये दूसरा फेज 'ड्रोन वॉर 2.0' के रूप में देखने को मिल सकता है.
ईरान पहले भी ड्रोन के जरिए एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती दे चुका है, लेकिन युद्ध में एडवांस अटैक देखने को मिल सकते हैं. जैसे अब एआई-आधारित टारगेटिंग, लो-फ्लाइंग स्टेल्थ ड्रोन और मल्टीपल ड्रोन से एकसाथ अटैक भी देखने को मिल सकते हैं.
इसके जवाब में अमेरिका और इजरायल 'स्मार्ट बमिंग' को और तेज कर सकते हैं. 2000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल सिर्फ शुरुआत माना जा रहा है. आगे चलकर गहराई में छिपे सैन्य ठिकानों, मिसाइल और परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया जा सकता है. यह हमले कम संख्या में होंगे, लेकिन बेहद सटीक और ज्यादा विनाशकारी हो सकते हैं.
पहले भी यूएस-ईरान ने ऐसे ही ईरान को बड़े नुकसान के साथ नुकसान पहुंचाया है, जिसमें कई प्रमुख हस्तियों का मारा जाना शामिल है. माना जा रहा है कि अब अमेरिका अपने GBU-31 JDAM, GBU-24 Paveway III , BLU-109 आदि बमों के इस्तेमाल को बढ़ा सकता है तो हर मौसम में जमीन के अंदर तक घुसकर टारगेट करते हैं और कई फीट नीचे बने बंकर को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
ईरान भी लगाएगा जोर
अगर युद्ध में दोनों पक्ष आक्रामक होते हैं तो ईरान भी इस जंग को ड्रोन वॉर से आगे ले जाकर अपने शाहब-3 (बैलिस्टिक मिसाइल), फतेह-110 (शॉर्ट-रेंज मिसाइल), खोर्रमशहर (मीडियम-रेंज मिसाइल), नूर, सौमार आदि का इस्तेमाल बढ़ा सकता है. ईरान जवाब में दूसरे देशों में अमेरिकी बेस को निशाना बना सकता है, जिससे यह स्थिति 'प्रॉक्सी वॉर' से आगे बढ़कर ओपन वॉर की तरफ ले जाएगी.
इसके साथ ही ईरान कंपनियों को निशाने बनाए जाने की भी धमकी दे रहा है, जिससे युद्ध संकट और भी ज्यादा गहरा सकता है. इसके साथ ही जंग कई मोर्चों पर फैल सकती है. हिजबुल्लाह, लेबनान से बड़े हमले कर सकता है, हूती रेड सी में जहाजों को निशाना बना सकते हैं और हमास गाजा में तनाव बढ़ा सकता है. इससे इजरायल को एक साथ कई फ्रंट पर लड़ना पड़ेगा.
प्रॉक्सी वॉर तक सिमट जाएगा युद्ध?
ये भी कहा जा रहा है कि अमेरिका और ईरान दोनों ही सीधे आमने-सामने युद्ध से बचना चाहते हैं, क्योंकि ऐसा टकराव बेहद महंगा और अनियंत्रित हो सकता है. ऐसे में संभावना इस बात की भी है कि यह संघर्ष फिलहाल प्रॉक्सी वॉर (दूसरों के जरिए लड़ी जाने वाली जंग) के रूप में जारी रहेगा. अभी तक अमेरिका भी पूरी तरह से सीधे युद्ध में कूदने से बच रहा है.
वह सीमित एयरस्ट्राइक, इजरायल को सैन्य समर्थन और क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ाकर स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहा है. संभावना ये भी है कि जंग प्रॉक्सी स्तर पर जारी रहेगी, जहां छोटे-छोटे हमले और अलग-अलग मोर्चों पर टकराव देखने को मिल सकते हैं.
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