ये क्या! जिस ईरान सरकार को धमका रहे थे ट्रंप, अब उसे ही बोला- Thank You

ईरान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का सख्त तेवर अचानक नरम पड़ता दिख रहा है. सैकड़ों फांसी की सजाएं रद्द होने पर ट्रंप ने तेहरान का खुलेआम धन्यवाद किया है. खाड़ी देशों की चेतावनी, इजरायल की बेचैनी और क्षेत्रीय युद्ध के खतरे के बीच, अमेरिका का रुख अब टकराव से ज्यादा संतुलन की ओर झुकता नजर आ रहा है.

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ट्रंप का दावा- ईरान ने 800 फांसी की सजा रद्द की (फोटो- Reuters/FILE) ट्रंप का दावा- ईरान ने 800 फांसी की सजा रद्द की (फोटो- Reuters/FILE)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:57 AM IST

ईरान के प्रति ट्रंप का रुख नरम पड़ता दिख रहा है. अब ईरानी सरकार को धमकियां दे रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान के नेतृत्व को धन्यवाद दिया. ट्रंप की तरफ से बताया गया कि तेहरान ने एक क्रूर राष्ट्रव्यापी कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की फांसी को रद्द कर दिया है.

अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने उन 800 से अधिक निर्धारित फांसी की सजाओं को रद्द कर दिया है जो एक दिन पहले होने वाली थीं.

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ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'ईरान के नेतृत्व द्वारा कल होने वाली सभी निर्धारित फांसियों (800 से अधिक) को रद्द किए जाने के लिए मैं बहुत सम्मान व्यक्त करता हूं. धन्यवाद!' 

इस हफ्ते की शुरुआत में ट्रंप द्वारा यह कहे जाने के बाद कि ईरान में हत्याओं में कमी आ रही है, अमेरिका द्वारा प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई की संभावना कम होती दिखी. हालांकि, अमेरिकी सैन्य ठिकानों की इस क्षेत्र में तैनाती की आशंका बनी हुई है, जो स्थिति को नाजुक बनाती है.

क्या सऊदी अरब और कतर की धमकी है वजह?

पर्दे के पीछे, खाड़ी में वाशिंगटन के सहयोगी देशों ने व्यापक टकराव को टालने के लिए राजनयिक प्रयास तेज कर दिए. एक खाड़ी अधिकारी ने बताया कि सऊदी अरब और कतर ने अमेरिकी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि ईरान पर हमला पूरे क्षेत्र में गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकता है, जिसका अमेरिका पर भी बुरा असर पड़ेगा.

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इजराइल ने भी अपनी चिंता जाहिर की. इजरायली खुफिया प्रमुख डेविड बार्निया शुक्रवार को ईरान पर केंद्रित वार्ता के लिए वॉशिंगटन में थे.

व्हाइट हाउस ने एक दिन पहले कहा था कि ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने तेहरान को चेतावनी दी थी कि अगर और खून-खराबा हुआ तो इसके 'गंभीर परिणाम' होंगे.

ईरान में आर्थिक दिक्कतों को लेकर 28 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन शुरू हुए और ये व्यापक प्रदर्शनों में तब्दील हो गए, जिनमें धार्मिक शासन के अंत की मांग की गई, जो पिछले हफ्ते धीरे-धीरे हिंसक होते चले गए.

विपक्षी समूहों और एक ईरानी अधिकारी के अनुसार, ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से हुए सबसे भीषण घरेलू अशांति में 2,000 से ज्यादा लोग मारे गए.

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