समंदर में मौजूद इस छोटे से देश पर क्यों ड्रोन मार रहा ईरान... जंग अब NATO के दरवाजे पर!

अमेरिकी और इजरायली प्रहार के सामने बेबस ईरान जल रहा है, अब मरने वालों की संख्या 787 पहुंच चुकी है. लेकिन असली खतरा बाकी है. अब जंग की आंच यूरोप तक पहुंचती दिख रही है. फ्रांस ने इस लड़ाई में सक्रिय रूप से उतरने का ऐलान कर दिया है और ईरानी हमले से प्रभावित साइप्रस को एंटी मिसाइल सिस्टम देने का ऐलान कर दिया है.

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ईरान पर इजरायली हमले के बाद धुएं का गुबार. (Photo: Reuters) ईरान पर इजरायली हमले के बाद धुएं का गुबार. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:44 PM IST

ईरान-इजरायल और अमेरिकी जंग का आज चौथा दिन है. ईरान में 787 लोगों की मौत हो चुकी है, सऊदी और UAE पर लगातार हमला हो रहा है. लेकिन तेहरान का जवाबी हमला अब यूरोप को अपनी जद में ले रहा है. पूर्वी भू-मध्यसागर में बसे साइप्रस में ब्रिटिश एयरफोर्स के ठिकानों पर ड्रोन अटैक किया है. ईरान से लगभग 2000 किलोमीटर की दूरी पर भूमध्य सागर में बसे साइप्रस पर हुए इस हमले ने यूरोप में सनसनी मचा दी है. माना जा रहा है इस हमले को लेबनान ने ईरान की ओर से अंजाम दिया है.

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साइप्रस अभी यूरोपियन यूनियन का प्रेसिडेंट है, साइप्रस ने इस बात की घोषणा की कि वह इस लड़ाई में शामिल नहीं है. बावजूद इसके ईरान में बने शाहेद ड्रोन से इस आईलैंड नेशन के दक्षिणी तट पर मौजूद UK एयर बेस को नुकसान पहुंचाया. इसके साथ ही ईरान ने यूरोप, अमेरिका और इजरायल को अपनी ताकत और मंशा दोनों ही बता दी. 

ईरान के खिलाफ उतरा फ्रांस, साइप्रस को देगा एंटी मिसाइल सिस्टम

ईरान का मैसेज साफ है अगर उस पर हमला होता है तो वह हर उस टारगेट पर हमला करेगा जो अमेरिका-इजरायल का साथ दे रहे हैं. लेकिन इस लड़ाई में अब यूरोप की ओर से फ्रांस भी कूद पड़ा है. साइप्रस की न्यूज़ एजेंसी ने मंगलवार को बताया कि ब्रिटिश एयर बेस पर ड्रोन हमले के बाद फ्रांस ने साइप्रस के डिफेंस को एंटी-मिसाइल सिस्टम और एंटी-ड्रोन सिस्टम देने का वादा किया है. 

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राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार सुबह साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स को मदद देने की घोषणा की. उन्होंने साइप्रस को एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी और एक युद्धपोत भेजने का वादा किया. फ्रांस का ये मदद साइप्रस की युद्ध क्षमता में बढ़ोतरी करेगा. 

यह भी पढ़ें: ईरान में 4.3 तीव्रता के भूकंप के झटके, कहीं इसका कनेक्शन परमाणु परीक्षण से तो नहीं?

साइप्रस एक द्वीप देश है जो पूर्वी भूमध्य सागर में बसा हुआ है. यह भूमध्य सागर का तीसरा सबसे बड़ा द्वीप है. 

मिडिल ईस्ट यूरोप के कुछ खास ट्रेडिंग पार्टनर और कई स्ट्रेटेजिक ट्रेडिंग रूट का घर है. कई यूरोपियन बेरूत, दुबई या येरुशलम जैसे शहरों में रहते हैं, जबकि तुर्की, मिस्र और खाड़ी देशों जैसे देशों के बड़े समुदाय पूरे यूरोप में बस गए हैं. इस जंग ने इन सभी को इस युद्ध में धकेल दिया है. 

साइप्रस पूर्वी भूमध्यसागर में स्थित है.

युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने से इनकार करते हुए, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने कहा है कि वे ईरान के हमलों को रोकने में मदद के लिए यूनाइटेड स्टेट्स के साथ काम करेंगे. 

NATO के दरवाजे पर जंग की दस्तक

अगर ये युद्ध आगे बढ़ता है और ईरान की ओर से साइप्रस पर और हमला होता है तो इस बार साइप्रस फ्रांसीसी हथियारों की मदद से अपनी रक्षा करने में सक्षम हो सकेगा. फ्रांस ने कहा है कि उसके 3 लाख लोग मध्य पूर्व में रहते हैं और उनकी सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी है. 

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ईरान-इजरायल जंग अगर साइप्रस तक पहुंच चुकी है, तो यह केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रह जाती. यह पूर्वी भूमध्यसागर की रणनीतिक जंग बन सकती है. लेकिन सवाल है क्या यह यूरोप तक फैल सकती है?

साइप्रस यूरोपियन यूनियन का सदस्य देश है और यहां ब्रिटेन के दो सैन्य अड्डे हैं. पहला अकरोतिरी में दूसरा धेकेलिया में. अकरोतिरी  में शाहेद ड्रोन से हमला हो चुका है.

इन बेस का इस्तेमाल मध्य पूर्व में ऑपरेशनों के लिए होता रहा है. अगर यहां ईरान की ओर से आगे भी हमला होता है तो मामला सीधे यूरोप और NATO के दरवाजे तक पहुंच सकता है.

जंग का चौथा दिन 

ईरान-इज़रायल युद्ध के चौथे दिन संघर्ष और तेज हो गया. इजरायल और अमेरिका ने तेहरान और बेरूत में एक साथ बड़े हमले किए, जिसमें ईरान के सैन्य ठिकानों, राष्ट्रपति कार्यालय और हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया गया. ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है और अमेरिका के सहयोगी देशों सऊदी अरब, कतर, यूएई आदि में अमेरिकी दूतावासों, सैन्य अड्डों पर ड्रोन-मिसाइल हमले किए.

रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला हुआ, जिसमें आग लग गई. ईरान के रेड क्रिसेंट के अनुसार अब तक 787 लोग मारे गए हैं. 

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