अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा क्यूबा को दी गई सीधी धमकी के बाद वैश्विक राजनीति में तनाव बढ़ गया है. चीन ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह क्यूबा की घेराबंदी और उस पर लगाए गए प्रतिबंधों को तुरंत रोके.
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि अमेरिका को क्षेत्रीय शांति भंग करने के बजाय स्थिरता को बढ़ावा देने वाले कदम उठाने चाहिए.
दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर क्यूबा को लेकर एक सख्त पोस्ट लिखी. ट्रंप ने कहा, "अब क्यूबा को कोई तेल या पैसा नहीं मिलेगा-जीरो! मैं क्यूबा को सुझाव देता हूं कि बहुत देर होने से पहले वे वाशिंगटन के साथ डील कर लें." ट्रंप ने आगे कहा कि क्यूबा लंबे समय तक वेनेजुएला से मिलने वाले संसाधनों पर जिंदा रहा है, लेकिन अब यह बंद होगा.
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चीन ने क्यूबा का किया बचाव
ट्रंप की इस धमकी पर पलटवार करते हुए चीन ने क्यूबा की राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा का समर्थन किया है. प्रवक्ता माओ निंग ने स्पष्ट किया कि चीन किसी भी बाहरी हस्तक्षेप और दबाव की राजनीति के खिलाफ है. चीन का मानना है कि अमेरिका को क्यूबा के प्रति अपने दशकों पुराने आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को समाप्त कर देना चाहिए ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे.
दरअसल, वेनेजुएला के बाद अब आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका की अगली नजर क्यूबा पर हो सकती है. क्यूबा में कम्युनिस्ट सरकार है, जो चीन और रूस के साथ अपने संबंध लगातार मजबूत कर रही है. अमेरिका के लिए यह स्थिति ठीक वैसी ही है, जैसे उसके पड़ोस में कोई ताकतवर परिवार आकर बस जाए. पहले से ही कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहे क्यूबा की अर्थव्यवस्था दबाव में है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. ऐसे माहौल में यह अंदेशा बढ़ गया है कि अमेरिका किसी न किसी बहाने क्यूबा को और ज्यादा घेरने की कोशिश कर सकता है.
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