ट्रंप के गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए चीन ने रख दी ये शर्त

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित गाजा पीस बोर्ड का काम केवल गाजा तक ही सीमित नहीं होगा बल्कि राष्ट्रपति ट्रंप इसे संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं. ट्रंप कह रहे हैं कि यह अब तक का सबसे मजबूत बोर्ड होगा जो दुनिया में शांति और उन्नति पर काम करेगा.

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चीन ने ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड पर क्या कहा. (Photo: Reuters) चीन ने ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड पर क्या कहा. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:28 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को भारत, रूस, पाकिस्तान, तुर्की, कतर समेत दुनिया के कई देशों को गाजा के लिए गठित 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का न्योता भेजा है. लेकिन चीन इसे लेकर खफा नजर आ रहा है.

चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा गठित बोर्ड ऑफ पीस को लेकर आपत्ति भी जाहिर की है. चीन ने साफ कहा कि अगर यह पहल संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में नहीं होती, तो वह इसमें भाग लेने को लेकर सहज नहीं है. इसके साथ ही, चीन ने एक बार फिर दोहराया कि वह संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखने वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता पर कायम हैं.

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चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि वह हमेशा से सच्चे बहुपक्षवाद के लिए प्रतिबद्ध रहा है और संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की मजबूती से रक्षा करेगा.

दरअसल गुओ ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे कि संयुक्त राष्ट्र को अस्तित्व में बने रहना चाहिए, लेकिन उनके द्वारा प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस संभवत: इस संगठन की जगह ले सकता है. अंतरराष्ट्रीय स्थिति चाहे जैसे भी विकसित हो, चीन संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों की मजबूती से रक्षा करेगा.

चीन ने पुष्टि की कि उसे अमेरिका से बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण प्राप्त हुआ है, लेकिन यह बताने से इनकार कर दिया कि वह इसमें शामिल होगा या नहीं. ट्रंप की योजना के बारे में पूछे जाने पर कि वह स्विट्जरलैंड के दावोस में बोर्ड ऑफ पीस को औपचारिक रूप देने के लिए एक हस्ताक्षर समारोह की मेजबानी करेंगे और क्या कोई चीनी प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में भाग लेगा. इस पर गुओ ने कहा कि बोर्ड ऑफ पीस के मामले पर चीनी पक्ष पहले ही प्रतिक्रिया दे चुका है और मेरे पास कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं है.

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ट्रंप प्रशासन द्वारा वैश्विक व्यवस्था में पैदा किए गए अराजकता के बारे में पूछे जाने पर और क्या चीन ऐसी अव्यवस्था का स्वागत करता है, गुओ ने दोहराया कि चीन का मानना है कि वैश्विक स्थिति में चाहे कोई भी बदलाव आए. संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखना, अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंड सभी राष्ट्रों के साझा हितों की सेवा करते हैं.

बोर्ड ऑफ पीस है क्या?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिशों से इजरायल-हमास के बीच पिछले साल अक्टूबर में सीजफायर हुआ था. यह सीजफायर ट्रंप के 20 सूत्रीय शांति योजना के तहत हुआ और अब इस योजना का दूसरा चरण शुरू हो चुका है. दूसरे चरण के तहत 'बोर्ड ऑफ पीस' का गठन किया जा रहा है और राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही खुद को इस बोर्ड का अध्यक्ष घोषित कर चुके हैं. यह बोर्ड गाजा के अस्थायी शासन और उसके पुनर्निर्माण का कामकाज देखेगा जिसे एक टेक्निकल एक्सपर्ट्स की कमेटी को सौंपा गया है.

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