चीन में क्यों हो रही है भारत के 'वर्क फ्रॉम होम' की चर्चा, बीजिंग ने कहा- मौका है!

चीन का सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स इस बात को मानता है कि भारत इस समय तेज आर्थिक विकास कर रहा है. इससे उसकी ऊर्जा जरूरतें बढ़ी हैं लेकिन सप्लाई चेन में जरा भी हलचल होने पर भारत का एनर्जी मार्केट चरमरा जाता है, इसलिए भारत को रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में चीन से लेन-देन बढ़ाने चाहिए.

Advertisement
चीन ने भारत के एनर्जी मार्केट की स्थिति पर टिप्पणी की है.  (Photo: ITG) चीन ने भारत के एनर्जी मार्केट की स्थिति पर टिप्पणी की है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:39 PM IST

भारत सरकार की ओर से निजी कंपनियों को 'वर्क फ्रॉम होम' के मोड पर जाने की सलाह की चर्चा चीन में है. चीन की स्टेट मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने इसे भारत की ऊर्जा संकट की गंभीरता का संकेत बताया है. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि यह फैसला सिर्फ अस्थायी ऊर्जा बाजार का दबाव का नहीं, बल्कि भारत की संरचनात्मक ऊर्जा समस्याओं को उजागर करता है. चीन के सरकारी अखबार ने जोर देकर कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी चीन-भारत संबंधों का विकास का नया इंजन बन सकती है. 

Advertisement

चीन का मानना है कि दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए भारत को नीतिगत स्तर पर अधिक खुलापन दिखाना चाहिए. 

बता दें कि एनर्जी सेक्टर की दिक्कतों को देखते हुए पीएम मोदी ने नागरिकों और कंपनियों से ईंधन बचाने के लिए जहां संभव हो वर्क फ्रॉम होम, वर्चुअल मीटिंग्स और ऑनलाइन कॉन्फ्रेंसिंग अपनाने की अपील की है. उन्होंने कोविड काल की सफलता का हवाला देते हुए कहा है कि रिमोट वर्किंग को फिर से राष्ट्रीय हित में अपनाया जाए. 

भारत में वर्क फ्रॉम होम की जरूरतों पर ग्लोबल टाइम्स ने संपादकीय लिखा है. अखबार लिखता है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच ईंधन के इस्तेमाल को कम करने के लिए भारत सरकार के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है. ईंधन बचाने के इस अभियान के पीछे सिर्फ़ ताजा ऊर्जा संकट ही नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा प्रणाली की ढांचागत कमियां और ऐसी चुनौतियां भी हैं जो तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी से कहीं आगे की बात हैं. 

Advertisement

तेज विकास कर रहा भारत, एनर्जी की मांग बढ़ी

अखबार ने इस बात को माना है कि भारत इस समय तेज आर्थिक विकास कर रहा है. इससे ऊर्जा की कुल खपत में बढ़ोतरी हो रही है.  ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में लिखा है, "भारत इस समय तेज आर्थिक विकास और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के एक अहम मोड़ पर खड़ा है. इसका औद्योगिक दायरा लगातार बढ़ रहा है; उत्पादन और रोजमर्रा के जीवन में इसकी कुल ऊर्जा खपत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, और ऊर्जा की इसकी मांग भी लगातार ऊपर चढ़ रही है."

अखबार ने राय दी है कि  लंबे समय से भारत अपनी सीमित घरेलू ऊर्जा उत्पादन क्षमता के कारण ऊर्जा आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर रहा है. आज की दुनिया में, जहां भू-राजनीतिक तनाव सप्लाई चेन को बाधित करते हैं और अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव लाते हैं, वहां यह निर्भरता महंगी होने के साथ-साथ जोखिम भरी भी है. 

रिन्यूएबल एनर्जी अब भारत की जरूरत

आगे अखबार लिखता है कि जैसे-जैसे भारत का औद्योगीकरण तेज होगा, ऊर्जा को लेकर दबाव और भी बढ़ेगा. ठीक इसी वजह से रिन्यूएबल एनर्जी अब केवल 'हो तो अच्छा है' वाली चीज़ न रहकर, एक परम आवश्यकता बन गई है. यह न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा का मामला है, बल्कि उसके औद्योगीकरण के मार्ग और कार्बन न्यूट्रैलिटी के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का भी मामला है. 

Advertisement

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल ऊर्जा क्षमता हासिल करने का भारत का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन सोलर पैनल, विंड टर्बाइन और बैटरी स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में भारत अभी भी बाहरी आपूर्ति पर निर्भर है. भारत की ये बाहरी जरूरत इंडिया-चीन के बीच व्यापारिक संबंधों के नए द्वार खोलती है. 

चीन के साथ रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग बढ़ाने का मौका

ग्लोबल टाइम्स ने साफ सलाह दी है कि भारत को अपनी पड़ोसी देशों, खासकर चीन के साथ नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में गहरा सहयोग बढ़ाना चाहिए. दरअसल चीन चाहता है कि भारत रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के प्रोडक्ट बीजिंग से ज्यादा से ज्यादा मंगाए. चीन के पास सोलर मॉड्यूल्स, विंड टर्बाइन्स और संबंधित उपकरणों का वैश्विक बाजार में दबदबा है और लागत भी कम है. चीन से तकनीकी और उपकरण आयात करने से भारत अपनी एनर्जी जरूरतों को रिन्यूएबल एनर्जी की ओर शिफ्ट कर सकता है, लागत घटा सकता है और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर सकता है. 

लेख में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में सुधार का जिक्र करते हुए कहा गया कि 2025 में द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 155.6 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले साल से 12 प्रतिशत ज्यादा है. इस साल के पहले चार महीनों में भारत के चीन को निर्यात में 36.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

Advertisement

अखबार ने इस फील्ड में दोनों देशों के बीच सहयोग की ओर इशारा करते हुए लिखा है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग की अपार संभावनाएं हैं; यह न केवल दोनों अर्थव्यवस्थाओं की जरूरतों सिद्ध करता है, बल्कि नए-ऊर्जा प्रौद्योगिकी सहित उभरते क्षेत्रों में सहयोग के और विस्तार के लिए एक ठोस आधार भी तैयार करता है. 

ग्लोबल टाइम्स ने जोर देकर कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी चीन-भारत संबंधों का नया विकास इंजन बन सकती है. दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए भारत को नीतिगत स्तर पर अधिक खुलापन दिखाना चाहिए और सहयोग की बाधाओं को दूर करना चाहिए. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement