कभी दुनियाभर के छात्रों के लिए सबसे पसंदीदा एजुकेशन डेस्टिनेशन में शामिल रहा कनाडा अब अंतरराष्ट्रीय छात्रों को तेजी से खोता नजर आ रहा है. हालात ऐसे हैं कि 2025 में कनाडा द्वारा जारी किए गए नए स्टडी परमिट्स की संख्या कोविड-19 महामारी के चरम दौर से भी नीचे चली गई, जब पूरी दुनिया लॉकडाउन थी.
इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज़ एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे साल में केवल 75,372 नए स्टडी परमिट मंजूर किए गए. यह 2024 की तुलना में 64 फीसदी की भारी गिरावट है. इतना ही नहीं, यह संख्या 2020 के कोविड काल के सबसे खराब दौर से भी 18 फीसदी कम रही. शिक्षा विशेषज्ञ इसे कनाडा की अंतरराष्ट्रीय शिक्षा नीति में बड़े “ओवरकरेक्शन” का परिणाम बता रहे हैं.
दरअसल, कनाडाई सरकार ने पिछले दो सालों में विदेशी छात्रों की संख्या नियंत्रित करने के लिए कई सख्त कदम उठाए. सरकार का तर्क था कि तेजी से बढ़ती अंतरराष्ट्रीय छात्र आबादी के कारण हाउसिंग, हेल्थकेयर और सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा था. इसी के चलते 2024 में स्टडी परमिट पर कैप लागू किया गया, प्रांतों के जरिए जारी होने वाले Provincial Attestation Letter (PAL) को अनिवार्य बनाया गया और निजी कॉलेजों पर निगरानी कड़ी की गई.
लेकिन अब सामने आ रही रिपोर्ट्स बता रही हैं कि सरकार की यह सख्ती उसके अनुमान से कहीं ज्यादा भारी पड़ गई. कनाडा के ऑडिटर जनरल कार्यालय (OAG) की हालिया रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार ने स्टूडेंट कैप के असर का सही अनुमान नहीं लगाया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इमिग्रेशन विभाग यह तक नहीं समझ पाया कि स्टडी परमिट मंजूरी दर अनुमान से इतनी कम क्यों हो गई.
2025 के आंकड़े गिरावट के दो बड़े कारण बताते हैं. पहला, अंतरराष्ट्रीय छात्रों की मांग में भारी कमी और दूसरा, स्टडी परमिट मंजूरी दर का ऐतिहासिक रूप से नीचे चले जाना.
ApplyBoard की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कनाडा ने केवल 2.11 लाख नए पोस्ट-सेकेंडरी स्टडी परमिट आवेदन प्रोसेस किए, जो 2024 की तुलना में 55 फीसदी कम थे. यानी दुनियाभर के हजारों छात्रों ने अब कनाडा में पढ़ाई के लिए आवेदन करना ही कम कर दिया. यह गिरावट 2023 में आई बड़ी कमी के बाद दर्ज की गई.
दूसरी ओर, स्टडी परमिट मंजूरी दर भी लगातार गिरती गई. 2021 में जहां 57.9 फीसदी आवेदन मंजूर किए गए थे, वहीं 2024 में यह दर घटकर 44.9 फीसदी रह गई और 2025 में केवल 35.7 फीसदी आवेदन ही मंजूर हुए. यानी हर तीन में से लगभग दो छात्रों का आवेदन खारिज हो रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती रिजेक्शन की खबरों ने भी छात्रों का भरोसा कमजोर किया है और वे अब दूसरे देशों की ओर रुख कर रहे हैं.
इस पूरे मामले पर कनाडा की हाउस ऑफ कॉमन्स स्टैंडिंग कमेटी ऑन सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन की नई स्टडी ने भी गंभीर चिंता जताई है. समिति ने कहा कि स्टडी परमिट कैप और उससे जुड़े बदलावों ने सरकार द्वारा तय लक्ष्य से कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचाया है. रिपोर्ट के मुताबिक इन नीतियों ने कनाडा के इंटरनेशनल स्टूडेंट प्रोग्राम की वैश्विक छवि और भरोसे को नुकसान पहुंचाया.
समिति ने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय छात्र संख्या को सीमित करने की नीति जरूरत से ज्यादा व्यापक रही और इसने अलग-अलग प्रांतों और संस्थानों की वास्तविक परिस्थितियों को नजरअंदाज कर दिया. रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ क्षेत्रों, खासकर क्यूबेक की यूनिवर्सिटीज में विदेशी छात्रों की संख्या को लेकर गंभीर समस्या नहीं थी और वहां छात्रों के लिए पर्याप्त आवास भी उपलब्ध थे, इसके बावजूद कैप नीति ने पूरे देश में दाखिलों को बुरी तरह प्रभावित किया.
सितंबर 2025 में समिति के सामने गवाही देते हुए Higher Education Strategy Associates के अध्यक्ष एलेक्स अशर ने कहा कि संघीय सरकार बिना पूरे सिस्टम को समझे केवल संख्या घटाने पर केंद्रित हो गई. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारों और शिक्षण संस्थानों के बीच पर्याप्त संवाद नहीं हुआ और अलग-अलग स्तरों पर बिना समन्वय के फैसले लिए गए.
समिति ने कनाडा सरकार को 10 अहम सिफारिशें भी दी हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण सुझाव यह है कि भविष्य की नीतियों को लेकर प्रांतों, क्षेत्रों और शिक्षण संस्थानों के साथ व्यापक चर्चा की जाए ताकि मौजूदा और भावी छात्रों को स्थिरता और स्पष्टता मिल सके.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल इमिग्रेशन का मुद्दा नहीं है, बल्कि कनाडा की लॉन्ग टर्म आर्थिक और सामाजिक रणनीति से जुड़ा मामला है. अंतरराष्ट्रीय छात्र न केवल यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार हैं, बल्कि वे रिसर्च, इनोवेशन और कुशल कार्यबल तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
Canadian Bureau for International Education की अध्यक्ष और CEO लारिसा बेजो ने समिति के सामने कहा कि प्रतिभाशाली छात्रों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करना केवल इमिग्रेशन विभाग का विषय नहीं होना चाहिए. इसके लिए पूरे सरकारी तंत्र के स्तर पर समन्वित रणनीति की जरूरत है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कनाडा अपनी सख्त नीतियों के जरिए शिक्षा प्रणाली को सुधार रहा है या फिर वह अनजाने में उन अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दूर कर रहा है, जिन्होंने सालों तक उसकी अर्थव्यवस्था, कॉलेजों और श्रम बाजार को मजबूती दी.
हुमरा असद