ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने रूस के खिलाफ एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने अपनी सेना को साफ आदेश दे दिया है कि अब वे उन रूसी जहाजों पर कब्जा कर सकते हैं और उन्हें रोक सकते हैं, जो पश्चिमी पाबंदियों को नजरअंदाज कर तेल बेच रहे हैं. स्टारमर का कहना है कि इन जहाजों के जरिए होने वाली काली कमाई का इस्तेमाल पुतिन यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में कर रहे हैं, जिसे रोकना अब बेहद जरूरी हो गया है.
ब्रिटिश पीएम ने अपने सोशल मीडिया (X) पर लिखा कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन इस समय मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध से काफी खुश नजर आ रहे हैं. उन्हें लगता है कि तेल की बढ़ती कीमतें उनकी तिजोरी भरने में मदद करेंगी. स्टारमर ने कड़े शब्दों में कहा कि पुतिन शायद इस समय खुशी में हाथ मल रहे होंगे, लेकिन हम उनके इस गुप्त बेड़े पर अब और भी सख्ती से वार करेंगे. हमारा मकसद सिर्फ ब्रिटेन को सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि पुतिन की उस युद्ध मशीन को थामना है जो यूक्रेन में तबाही मचा रही है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, डाउनिंग स्ट्रीट की तरफ से बताया गया है कि सेना और पुलिस उन रूसी जहाजों पर चढ़ने की पूरी तैयारी कर चुकी है जो सरेंडर करने से मना करेंगे या पकड़े जाने से बचने के लिए हाई-टेक जासूसी मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. एक बार जहाज पर कब्जा होने के बाद, उसके मालिकों और क्रू मेंबर्स के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब रूस अपने इसी गुप्त बेड़े के दम पर यूक्रेन के खिलाफ चार साल से जंग लड़ रहा है और अपनी अर्थव्यवस्था को टिकाए हुए है.
रूस के पास पुराने और बिना किसी खास पहचान वाले टैंकरों का एक बड़ा जाल है, जिसे 'शैडो फ्लीट' कहा जाता है. रूस अपना करीब 75% कच्चा तेल इन्हीं जहाजों के जरिए दुनिया भर में भेजता है ताकि पश्चिमी देशों की पाबंदियों से बचा जा सके. ये जहाज न सिर्फ आर्थिक नियमों को तोड़ते हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा खतरा हैं. ये टैंकर इतने पुराने और खराब हालत में होते हैं कि इनसे कभी भी समुद्र में तेल रिस सकता है, जिससे समुद्री जीव-जंतुओं की जान पर बन आएगी.
ट्रम्प के फैसले से बढ़ी चिंता और ब्रिटेन की अगली चाल
रूस पर दबाव बनाने की यूरोपीय कोशिशों को तब झटका लगा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने कुछ देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट दे दी. ट्रम्प का मानना था कि इससे ईरान युद्ध की वजह से बिगड़े ग्लोबल मार्केट को संभालने में मदद मिलेगी. हालांकि, ब्रिटेन ने अब तक रूस के 544 ऐसे जहाजों पर बैन लगाया है जो अक्सर इंग्लिश चैनल से होकर गुजरते हैं. अब कीर स्टारमर गुरुवार को हेलसिंकी में होने वाले सम्मेलन में दूसरे देशों से भी अपील करेंगे कि वे इन गुप्त जहाजों को जब्त करने में ब्रिटेन का साथ दें.
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