चीन से नजदीकियां बढ़ा रहा बांग्लादेश! तीस्ता नदी परियोजना पर मांगा सहयोग

बांग्लादेश की नई सरकार ने चीन से तीस्ता नदी पुनर्स्थापन परियोजना में सहयोग मांगा है. बीजिंग में बांग्लादेश और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच बैठक हुई, जिसमें चीन ने बेल्ट एंड रोड पहल के तहत सहयोग बढ़ाने का आश्वासन दिया.

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बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार चीन की ओर झुकाव बढ़ा रही है(Photo: Reuters) बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार चीन की ओर झुकाव बढ़ा रही है(Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:59 PM IST

बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार ने औपचारिक रूप से चीन से तीस्ता नदी पुनर्स्थापन परियोजना में सहयोग और समर्थन मांगा है. इस कदम को भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के लिए संवेदनशील माना जा रहा है. बांग्लादेश की समाचार एजेंसी बीएसएस के अनुसार, तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना (TRCMRP) को लेकर बुधवार को बीजिंग में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खालिलुर रहमान और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बैठक हुई.

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तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है. यह नदी बांग्लादेश में सिंचाई और लाखों लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत मानी जाती है. बैठक के दौरान वांग यी ने नई बांग्लादेश सरकार के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि चीन, बेल्ट एंड रोड पहल के तहत बांग्लादेश की विकास रणनीतियों के साथ हाई क्वालिटी वाले सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि चीन आर्थिक विकास, आधारभूत ढांचे और लोगों के बीच संपर्क जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेगा.

वांग यी ने यह भी कहा कि चीन, बांग्लादेश में चीनी कंपनियों के निवेश को बढ़ावा देगा. चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि चीन का दक्षिण एशियाई देशों, विशेषकर बांग्लादेश के साथ संबंध किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाकर नहीं बनाए जा रहे हैं और न ही किसी तीसरे पक्ष से प्रभावित होने चाहिए. तारिक रहमान सरकार बनने के बाद खालिलुर रहमान की यह पहली चीन यात्रा है. वह 5 मई को बीजिंग पहुंचे थे और गुरुवार को वापस लौटने वाले हैं.

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गौरतलब है कि पिछले महीने तारिक रहमान भारत दौरे पर भी आए थे. उनकी भारतीय नेताओं के साथ हुई बातचीत पर बीजिंग की नजर थी, क्योंकि शेख हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार चीन और पाकिस्तान के ज्यादा करीब मानी जा रही थी, जिससे ढाका और नई दिल्ली के रिश्तों में तनाव आया था. चीन लंबे समय से तीस्ता नदी परियोजना में रुचि दिखाता रहा है. यह परियोजना भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास स्थित है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है.

इसी पृष्ठभूमि में भारत ने 2024 में तीस्ता बेसिन के संरक्षण और तकनीकी सहायता की पेशकश की थी, जिसे सीमा पार नदी प्रबंधन में ढाका के साथ सहयोग बढ़ाने की दिल्ली की कोशिश माना गया था. भारत और बांग्लादेश के बीच जल बंटवारा हमेशा से अहम मुद्दा रहा है. 1996 में हस्ताक्षरित गंगा जल संधि, जो सूखे के मौसम में गंगा नदी के जल बंटवारे को नियंत्रित करती है, इस साल समाप्त होने वाली है. यदि इसे नवीनीकृत नहीं किया गया तो दोनों देशों के बीच नया समझौता करना पड़ सकता है.

इस बीच, हाल के वर्षों में चीन ने बांग्लादेश में अपनी आर्थिक और कूटनीतिक मौजूदगी लगातार बढ़ाई है. बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जापान, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के बाद चीन बांग्लादेश का चौथा सबसे बड़ा ऋणदाता है. 1975 से अब तक चीन बांग्लादेश को 7.5 अरब डॉलर का ऋण दे चुका है.

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