बांग्लादेश में जमात और एनसीपी का हुआ गठबंधन, छात्र नेताओं ने कट्टरपंथियों से मिलाया हाथ

बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले एक बड़े सियासी उलटफेर में कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी और छात्र आंदोलन के चेहरे नाहिद इस्लाम की नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के बीच गठबंधन हो गया है. इस्लामिक दलों के इस नए और बड़े कुनबे ने देश की चुनावी सरगर्मी को तेज कर दिया है.

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11 सियासी दलों ने आम चुनाव के लिए किया गठबंधन (File Photo: ITG) 11 सियासी दलों ने आम चुनाव के लिए किया गठबंधन (File Photo: ITG)

आशुतोष मिश्रा

  • ढाका,
  • 16 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:20 AM IST

बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के लिए जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के बीच चुनावी गठबंधन की औपचारिक घोषणा हो गई है. बुधवार देर रात ढाका में हुई बैठक में तय हुआ कि 300 संसदीय सीटों में से जमात-ए-इस्लामी 179 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जबकि जुलाई छात्र आंदोलन के नेता नाहिद इस्लाम की एनसीपी को 30 सीटें दी गई हैं. वहीं, युवा लीडर तसनीम जारा ने गठबंधन का विरोध करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है.

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11-दलीय गठबंधन में अन्य इस्लामिक संगठनों को भी शामिल किया गया है, जिसमें बांग्लादेश खिलाफत मजलिस को 20, खिलाफत मजलिस को 10 और निजाम-ए-इस्लामी व बांग्लादेश डेवलपमेंट पार्टी को 2-2 सीटें बांटी गई हैं. 

12 फरवरी 2026 को होने वाले मतदान से पहले कट्टरपंथी और युवा नेतृत्व वाले दलों का यह मेल एक बड़े ध्रुवीकरण की ओर इशारा कर रहा है. हालांकि, जमात जैसी विवादित पार्टी के साथ हाथ मिलाने के फैसले से नाराज होकर एनसीपी के कई युवा नेताओं और महिला सदस्यों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है.

सीटों का बंटवारा और इस्लामिक दलों का दबदबा

गठबंधन के तहत जमात-ए-इस्लामी ने सबसे ज्यादा 179 सीटों पर दावेदारी ठोककर अपनी मजबूती दिखाई है. नाहिद इस्लाम, जो कभी शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए आंदोलन के प्रमुख समन्वयक थे, उनकी पार्टी एनसीपी को 30 सीटों से संतोष करना पड़ा है. गठबंधन ने कहा है कि हर सीट पर केवल एक ही साझा उम्मीदवार होगा, जिससे वोट बैंक का बिखराव न हो.

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एनसीपी में बगावत और इस्तीफों की झड़ी

जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन की चर्चा शुरू होते ही नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के अंदर असंतोष के सुर फूट पड़े. पार्टी के 13 से ज्यादा केंद्रीय नेताओं ने वैचारिक मतभेदों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है. तसनीम जारा जैसी युवा नेताओं ने गठबंधन का विरोध करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है. उनका तर्क है कि जिस कट्टरपंथ के खिलाफ छात्र लड़े थे, अब उसी के साथ समझौता करना आंदोलन के मूल्यों के खिलाफ है.

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चुनावी रण में 'कट्टरपंथी' कुनबा

यह गठबंधन बांग्लादेश के चुनावी इतिहास के सबसे बड़े इस्लामिक गठजोड़ के रूप में देखा जा रहा है. इसमें छोटी-बड़ी 11 पार्टियों को एक मंच पर लाया गया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अवामी लीग की अनुपस्थिति और बीएनपी (BNP) की सक्रियता के बीच यह तीसरा मोर्चा चुनाव परिणामों को गहराई से प्रभावित कर सकता है. गठबंधन का मुख्य फोकस युवा मतदाताओं और धार्मिक रूप से कट्टरपंथी तबके को साथ लाना है.

 
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