अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन सिर्फ समर्थन ही नहीं चाहता, बल्कि वह लोगों में इसके लिए उत्साह भी पैदा करना चाहता है. यही वजह है कि व्हाइट हाउस, पेंटागन और अमेरिकी सेंट्रल कमांड लगातार ऐसे वीडियो जारी कर रहे हैं जिनमें युद्ध को फिल्मी अंदाज में दिखाया जा रहा है.
इन वीडियोज में आधुनिक हथियारों - जैसे B-2 बॉम्बर, HIMARS रॉकेट सिस्टम और F-18 फाइटर जेट जैसे हथियारों को लगभग किसी फिल्म के मुख्य किरदार की तरह पेश किया जा रहा है. कई वीडियो तो हॉलीवुड फिल्म के ट्रेलर जैसे लगते हैं, जिनमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और विदेश मंत्री मार्को रूबियो की आवाज भी सुनाई देती है.
इनमें से एक वीडियो को मशहूर गाने "Boom Boom" के नए वर्जन के साथ जारी किया गया, जिससे पूरा वीडियो किसी एक्शन फिल्म जैसा दिखाई देता है.
जमीन की हकीकत अलग
हालांकि इन वीडियो में हर मिसाइल अपने लक्ष्य पर सटीक लगती दिखती है और किसी तरह के नुकसान या मौत की तस्वीर नहीं दिखाई जाती, लेकिन जमीन से आने वाली खबरें इन दावों से अलग तस्वीर पेश करती हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल ईरान में एक लड़कियों के स्कूल पर गिराई गई. एक मीडिया विश्लेषण में कहा गया कि यह हमला शायद पुराने खुफिया इनपुट के आधार पर किया गया था, जिसमें पास के नौसैनिक अड्डे को निशाना माना गया था.
ईरानी मीडिया के मुताबिक इस हमले में 168 बच्चों और 14 शिक्षकों की मौत हुई. हालांकि अमेरिकी सेना ने कहा है कि इस घटना की जांच अभी जारी है.
सोशल मीडिया पर फेक वीडियो की बाढ़
इस युद्ध में सच और झूठ के बीच फर्क करना भी मुश्किल होता जा रहा है. सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फर्जी और AI से बनाए गए वीडियो फैल रहे हैं. कुछ वीडियो ऐसे भी सामने आए जिनमें दावा किया गया कि ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को पकड़ लिया है या तेल अवीव पर बमबारी की गई है. बाद में जांच में पता चला कि ये वीडियो फर्जी थे.
जंग के वीडियो में वीडियो गेम का इस्तेमाल
अमेरिकी सेना द्वारा जारी कई वीडियो की आलोचना भी हुई है. कुछ वीडियो में मिसाइल हमलों की झलक को Call of Duty और Grand Theft Auto जैसे वीडियो गेम के क्लिप के साथ मिलाकर दिखाया गया. आलोचकों का कहना है कि इससे युद्ध को मनोरंजन की तरह पेश किया जा रहा है, जबकि असल में यह बेहद गंभीर और खतरनाक संघर्ष है.
'Operation Epic Fury' का लोगो
अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा जारी एक वीडियो में विस्फोटों को स्लो मोशन में दिखाया गया और वीडियो के अंत में "Operation Epic Fury" नाम का लोगो भी दिखाई दिया. इससे यह संदेश जाता है कि जैसे किसी फिल्म या वीडियो गेम की तरह इस युद्ध को भी एक ब्रांड या अभियान के रूप में पेश किया जा रहा है.
इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ बयान भी विवादों में रहे. रिपब्लिकन सांसदों के साथ एक बैठक में उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना को ईरानी जहाजों को डुबोने में ज्यादा "मजा" आता है. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "उन्हें जहाजों को पकड़ने से ज्यादा उन्हें डुबोना पसंद है. उनका कहना है कि ऐसा करना ज्यादा सुरक्षित है." बताया जा रहा है कि इस युद्ध में अमेरिकी नौसेना ने पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद टॉरपीडो से किसी जहाज को डुबोया है.
'यह कोई बराबरी की लड़ाई नहीं'
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी एक वीडियो में कहा कि अमेरिका इस युद्ध में पूरी ताकत से हमला कर रहा है. उन्होंने कहा, "हम उन्हें उस समय मार रहे हैं जब वे कमजोर हैं. और यही होना चाहिए." एक अन्य पोस्ट में लिखा, "यह कोई बराबरी की लड़ाई नहीं है. हमारी क्षमताएं बेहद ताकतवर हैं और हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक ईरान बिना शर्त आत्मसमर्पण नहीं कर देता."
हालांकि ट्रंप प्रशासन की यह रणनीति अमेरिकी जनता को पूरी तरह प्रभावित करती नहीं दिख रही. कई सर्वे बताते हैं कि अमेरिका में बड़ी संख्या में लोग इस युद्ध के खिलाफ हैं. हालांकि रिपब्लिकन समर्थकों के बीच इस युद्ध को लेकर समर्थन ज्यादा है.
प्रचार का असर कितना?
युद्ध के समय प्रचार का इस्तेमाल नया नहीं है. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भी अमेरिका में फिल्मों और पोस्टरों के जरिए जनता का समर्थन जुटाया जाता था. लेकिन आज सोशल मीडिया के दौर में यह प्रचार ज्यादा तेज और ज्यादा विवादास्पद हो गया है. यही कारण है कि जहां एक तरफ सरकार युद्ध को ताकत और जीत की कहानी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीन से आने वाली खबरें और तस्वीरें इस युद्ध की वास्तविक और कहीं ज्यादा गंभीर तस्वीर दिखा रही हैं.
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