पश्चिम बंगाल की नई विधानसभा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट ने विधायकों के चेहरे से नकाब उतार दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, चुनकर आए 292 विधायकों में से 190 यानी करीब 65 फीसदी विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. ये वो आंकड़े हैं जो इन नेताओं ने खुद चुनाव से पहले अपने हलफनामों में घोषित किए थे.
हैरानी की बात यह है कि इनमें से 170 विधायकों के खिलाफ तो हत्या, हत्या के प्रयास और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे बेहद गंभीर मुकदमे चल रहे हैं. कानून बनाने वाली विधानसभा में जब दागियों का ऐसा बहुमत हो, तो चर्चा होना तो लाजिमी है.
पार्टीवार आंकड़ों में बड़ा खुलासा
इस रिपोर्ट ने पार्टियों के उन दावों की पोल खोल दी है, जिसमें वो खुद को ईमानदार और दाग-रहित बताते फिरते थे. आंकड़ों को देखें तो बीजेपी के 206 विधायकों में से 152 (करीब 74%) आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं. इनमें से 141 विधायक तो ऐसे हैं जिन पर गंभीर श्रेणी के मुकदमे दर्ज हैं.
वहीं, मुख्य विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस का हाल भी कुछ खास अलग नहीं है. टीएमसी के 80 में से 34 विधायक (करीब 43%) दागी हैं, जिनमें से 25 पर गंभीर आरोप हैं. इसके अलावा, आम जनता उन्नयन पार्टी, सीपीएम और ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट के जो इक्का-दुक्का विधायक जीत कर आए हैं, उन सभी का रिकॉर्ड भी आपराधिक बताया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार, कुल 190 दागी विधायकों में से 170 पर ऐसे मामले हैं जिन्हें जघन्य माना जाता है. इनमें सबसे ज्यादा संख्या बीजेपी के विधायकों की है, जिनके 141 सदस्यों पर गंभीर आरोप हैं. टीएमसी के भी 25 विधायक इस सूची में शामिल हैं. जनता के बहुमत से चुनकर विधानसभा पहुंचने वाले इन चेहरों की यह डरावनी तस्वीर बंगाल की राजनीति के बाहुबल वाले पहलू को उजागर करती है.
संजय वर्मा