बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद निशाने पर आए सौरव गांगुली... जानें क्या है पूरा मामला

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सौरव गांगुली की बीजेपी नेता के साथ मुलाकात को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ यूजर्स ने गांगुली को स्वार्थी और सत्ता के हिसाब से चलने वाला बताया.

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BJP नेता PN पाठक ने सौरव गांगुली के साथ हुई एक बैठक की फोटो शेयर कीं। (Image: X) BJP नेता PN पाठक ने सौरव गांगुली के साथ हुई एक बैठक की फोटो शेयर कीं। (Image: X)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:10 PM IST

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और ‘प्रिंस ऑफ कोलकाता’ के नाम से मशहूर सौरव गांगुली इन दिनों राजनीतिक वजहों से चर्चा में हैं. पश्चिम बंगाल में भाजपा की बड़ी जीत के बाद उनकी एक मुलाकात ने उन्हें आलोचनाओं के घेरे में ला दिया है. दरअसल, भाजपा नेता पीएन पाठक के साथ गांगुली की कोलकाता में हुई मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं. इसके बाद कई लोगों ने गांगुली पर अवसरवादी होने का आरोप लगाना शुरू कर दिया.

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुलाकात को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ यूजर्स ने गांगुली को स्वार्थी और सत्ता के हिसाब से चलने वाला बताया. वहीं कई भाजपा समर्थकों ने पार्टी नेतृत्व से अपील की कि गांगुली को पार्टी में शामिल न किया जाए. कुछ लोगों ने उनकी तुलना पूर्व क्रिकेटर आशीष दिन्दा से की, जो पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं. आलोचकों का कहना है कि दिन्दा ने खुले तौर पर राजनीतिक रुख अपनाया, जबकि गांगुली हमेशा तटस्थ रहे.

क्या है विवाद की वजह?

गांगुली ने अब तक किसी भी राजनीतिक दल में शामिल होने से दूरी बनाए रखी है. चुनाव से पहले भी उन्होंने किसी पार्टी के समर्थन में खुलकर बयान नहीं दिया था. हालांकि, भाजपा की ऐतिहासिक जीत (293 में से 207 सीटें) के बाद पार्टी नेताओं से उनकी मुलाकात को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या वह अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं.

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1972 में कोलकाता में जन्मे सौरव गांगुली ने 1992 में भारत के लिए वनडे डेब्यू किया था. 1996 के इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट डेब्यू में शतक लगाकर उन्होंने अपनी पहचान बनाई. साल 2000 में टीम इंडिया के कप्तान बने गांगुली ने 2002 चैंपियंस ट्रॉफी जिताई और 2003 विश्व कप के फाइनल तक टीम को पहुंचाया. संन्यास के बाद उन्होंने बीसीसीआई के अध्यक्ष और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के प्रमुख के रूप में भी काम किया.

जहां एक ओर आलोचना हो रही है, वहीं कुछ लोग गांगुली के समर्थन में भी सामने आए हैं. उनका कहना है कि गांगुली ने कभी किसी राजनीतिक दल को जॉइन नहीं किया और उन्होंने हमेशा बंगाल क्रिकेट के विकास के लिए काम किया.

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