पश्चिम बंगाल के हावड़ा में गैस की कमी ने आम लोगों और ऑटो चालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. ईरान-इजरायल जंग का असर ईंधन आपूर्ति पर असर साफ दिख रहा है, जिससे सीएनजी से चलने वाले ऑटो चालकों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है.
पर्यावरण के अनुकूल माने जाने वाले सीएनजी/गैस ऑटो इन दिनों सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. शहर में गैस भरवाने के लिए ऑटो चालकों को रातभर पेट्रोल पंपों के बाहर कतार लगानी पड़ रही है. स्थिति यह है कि कई चालक देर रात से लाइन में लग जाते हैं, लेकिन सुबह तक भी सभी को गैस नहीं मिल पाती.
स्थानीय स्तर पर जानकारी के मुताबिक, पूरे हावड़ा में गैस भरने के लिए केवल दो पंप ही उपलब्ध हैं, जिससे दबाव काफी बढ़ गया है. एक पंप पर भारी भीड़ के चलते लंबी कतारें आम हो गई हैं और कई बार सप्लाई होने के बावजूद मांग पूरी नहीं हो पा रही.
पंप संचालक का कहना है कि कुछ दिन पहले सप्लाई में संकट जरूर था, लेकिन अब टैंकर नियमित रूप से आ रहे हैं. इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऑटो और अन्य वाहनों की मांग के कारण सभी को गैस उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पा रहा.
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दूसरी ओर, ऑटो चालकों का कहना है कि वे दूर-दराज इलाकों से यहां गैस भरवाने आते हैं. रोजाना घंटों लाइन में लगना उनकी मजबूरी बन गई है, जिससे उनकी कमाई और समय दोनों प्रभावित हो रहे हैं. कई चालकों ने बताया कि लाइन कम करने के लिए वे रात में ही आकर खड़े हो जाते हैं, फिर भी गैस मिलने की कोई गारंटी नहीं होती.
इस संकट का सीधा असर आम यात्रियों पर भी पड़ रहा है. ऑटो की उपलब्धता कम होने से लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और किराया भी प्रभावित हो रहा है. कुल मिलाकर, गैस की सीमित उपलब्धता और बढ़ती मांग ने हावड़ा में परिवहन व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है, जिससे ऑटो चालकों के साथ-साथ आम जनता को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
तपस सेनगुप्ता