बंगाल ​अग्निकांड के चार दिन बाद भी 27 लोग लापता, 21 शवों में से अब तक सिर्फ 3 की पहचान

बंगाल में मोमो कंपनी के गोदाम में लगी आग को चार दिन बीतने के बाद भी 27 लोग लापता हैं और बरामद हुए 21 शवों में से केवल तीन की पहचान हो पाई है. शवों की पहचान डीएनए जांच के जरिए की जा रही है.

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बंगाल में वॉव मोमो के गोदाम में लगी आग की घटना के चार दिन बाद भी 27 लोग लापता हैं. (Photo: PTI) बंगाल में वॉव मोमो के गोदाम में लगी आग की घटना के चार दिन बाद भी 27 लोग लापता हैं. (Photo: PTI)

तपस सेनगुप्ता

  • कोलकाता,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:08 PM IST

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के नजीराबाद इलाके में हुए भीषण अग्निकांड को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन स्थिति अब भी भयावह बनी हुई है. इस हादसे में अब तक केवल तीन मृतकों की पहचान हो पाई है, जबकि 27 लोग अब भी लापता हैं. लापता लोगों के परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करानी शुरू कर दी है. फॉरेंसिक टीमों ने कंकाल के टुकड़ों समेत 21 से 25 मानव अवशेषों के नमूने एकत्र कर डीएनए प्रोफाइलिंग और जांच के लिए भेजे हैं.

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परिजनों से डीएनए नमूने लिए गए हैं, ताकि आगे मौतों की पुष्टि की जा सके. आग की चपेट में आए गोदामों में से एक कोलकाता स्थित रिटेल फूड चेन ‘Wow! Momo’ का था. कंपनी ने अपने तीन कर्मचारियों की मौत की पुष्टि की है और मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा तथा जीवनभर मासिक वेतन देने की घोषणा की है. पुलिस ने शुक्रवार सुबह Wow! Momo के दो कर्मचारियों मनोरंजन शीत और राजा चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया.

दोनों को बरुईपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 6 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. इलाके में किसी भी तरह की भीड़ को रोकने के लिए बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है. इस बीच, घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. विपक्षी भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है. 

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नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने सवाल उठाया कि बिना फायर सेफ्टी ऑडिट के Wow! Momo को संचालन की अनुमति क्यों दी गई और ट्रेड लाइसेंस कैसे जारी हुआ. उन्होंने मुख्यमंत्री से इस्तीफे और प्रभावित परिवारों से बिना शर्त माफी की मांग की. सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्थानीय नरेंद्रपुर थाने तक विरोध मार्च निकाला. उन्होंने मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा और आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की.

वहीं, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस ने शुक्रवार को घटनास्थल का निरीक्षण किया और राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह बेहद भयावह और झकझोर देने वाला दृश्य है और इस मामले में शामिल सभी हितधारकों, खासकर कानून व्यवस्था से जुड़े विभागों को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए. उचित कार्रवाई की जानी चाहिए. इस मामले में कुछ ऐसे कदम थे जो उठाए जाने चाहिए थे, लेकिन नहीं उठाए गए हैं.'

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