पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद सियासत का माहौल अभी ठंडा नहीं हुआ है. इसी बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव कोलकाता पहुंचे और ममता बनर्जी से मुलाकात की. यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक साफ संदेश भी था, हार के बाद भी विपक्ष साथ खड़ा है.
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित घर पर जब अखिलेश पहुंचे, तो सबसे पहले उनकी मुलाकात अभिषेक बनर्जी से हुई. माहौल थोड़ा भावुक भी दिखा. अखिलेश ने अभिषेक को गले लगाया और दिलासा देते हुए कहा कि 'कोई नहीं, तुम अच्छा लड़े.' यह एक लाइन बहुत कुछ कह गई, क्योंकि चुनावी हार के बाद ऐसे शब्द ही सबसे ज्यादा मायने रखते हैं.
अखिलेश यादव का यह अंदाज सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा बटोर रहा है. हार की मायूसी के बीच जब एक बड़ा नेता दूसरे युवा नेता का हाथ थामता है, तो उसके गहरे सियासी मायने होते हैं. कालीघाट में हुई इस मुलाकात ने यह साफ कर दिया कि बंगाल की सत्ता भले ही हाथ से निकल गई हो, लेकिन विपक्षी नेताओं के बीच का तालमेल अभी भी बरकरार है.
हार के बाद विपक्ष को जोड़ने की कोशिश
इस मुलाकात को ऐसे ही नहीं देखा जा रहा है. दरअसल, पश्चिम बंगाल के नतीजों ने पूरे विपक्ष को झटका दिया है. बीजेपी ने 294 सीटों वाली विधानसभा में 207 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया. वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी 15 साल बाद सत्ता से बाहर हो गई और सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई. ऐसे वक्त में अखिलेश यादव का ममता से मिलना यह दिखाता है कि विपक्ष अब आगे की रणनीति पर सोच रहा है. बताया जा रहा है कि इस दौरान दोनों नेताओं के बीच चुनाव के बाद की स्थिति और आगे की राजनीति पर चर्चा हुई.
खास तौर पर बीजेपी के खिलाफ एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया गया. ममता बनर्जी पहले ही कह चुकी हैं कि वह INDIA गठबंधन को और मजबूत करेंगी. अब अखिलेश की यह मुलाकात उसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है. यानी साफ है कि हार के बाद भी विपक्ष पीछे हटने के मूड में नहीं है. इस मुलाकात में एक और बात खास रही कि यह सिर्फ नेताओं की मीटिंग नहीं थी, बल्कि एक तरह का मनोबल बढ़ाने का भी मौका था. अभिषेक बनर्जी से जिस तरह अखिलेश ने मुलाकात की, उसने यह संकेत दिया कि राजनीति में रिश्ते सिर्फ जीत-हार से तय नहीं होते.
कुल मिलाकर, बंगाल चुनाव के बाद अब राजनीति का नया दौर शुरू हो रहा है. एक तरफ बीजेपी की मजबूत जीत है, तो दूसरी तरफ विपक्ष अपने आपको फिर से खड़ा करने की कोशिश में जुट गया है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह एकजुटता कितनी मजबूत बन पाती है.
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