योगी मंत्रिमंडल का विस्तार, प्रतीक भूषण नहीं बने मंत्री, दिल्ली में बृजभूषण 

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के मंत्रिमंडल का रविवार को विस्तार किया गया, जिसमें कुल 8 मंत्री बनाए गए. छह नए मंत्री बने तो दो राज्यमंत्री का प्रमोशन कर स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया. इस बार भी बृजभूषण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण को कैबिनेट में जगह नहीं मिली, जिसे लेकर सियासी चर्चा गर्म है.

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बृजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक नहीं बन सके मंत्री (Photo-X) बृजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक नहीं बन सके मंत्री (Photo-X)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:07 PM IST

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को कुल आठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई, जिनमें छह नए चेहरे को शामिल किया गया और दो राज्यमंत्री को स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया. इनमें से पांच पिछड़े वर्ग, दो दलित वर्ग और एक ब्राह्मण समुदाय से हैं. 

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योगी मंत्रिमंडल के जरिए बीजेपी ने सियासी समीकरण को साधने की कवायद की है. इस बार के कैबिनेट विस्तार में बीजेपी के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता बृजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण के किस्मत नहीं खुल सकी. एक बार फिर से वो मंत्री नहीं बन सके, जिसके बाद सियासी चर्चा तेज है. 

बृजभूषण सिंह ने कैबिनेट विस्तार के बीच  एक सोशल मीडिया पोस्ट किया, जिसने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है. मंत्रिमंडल के विस्तार के दूसरे दिन बृजभूषण सिंह दिल्ली में है. हालांकि, दिल्ली में क्यों और किस लिए हैं, इस बात की जानकारी सामने नहीं आ सकी है? 

योगी कैबिनेट में कौन-कौन बना मंत्री? 
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को आठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई. इनमें दो को कैबिनेट मंत्री,दो राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और चार  राज्य मंत्री बने हैं. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और सपा के बागी विधायक मनोज कुमार पांडे को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. स्वतंत्र राज्यमंत्री के रूप में अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर ने शपथ ली.

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कैबिनेट विस्तार में कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा को राज्यमंत्री  बनाया गया है. कृष्णा पासवान इकलौती महिला हैं. इस तरह बीजेपी कैबिनेट में अब कुल मंत्रियों का कोटा पूरी तरह से फुल हो गया है, क्योंकि यूपी में अधिकतम 60 मंत्री हो सकते हैं. सीएम सहित अब मंत्रिमंडल में 60 सदस्य पूरे हो गए हैं. इस तरह किसी भी नए मंत्री के लिए कोई जगह नहीं बची है. 

प्रतीक भूषण को नहीं मिली कैबिनेट में जगह
बृजभूषण शरण सिंह बीजेपी के दिग्गज नेता माने जाते हैं, गोंडा, बहराइच ही नहीं बल्कि देवीपाटन मंडल में उनकी सियासी तूती बोलती है. बृजभूषण 6 बार खुद सांसद रहे हैं तो एक बार उनकी पत्नि सांसद रह चुकी हैं. इसके अलावा उनके बड़े बेटे प्रतीक भूषण गोंडा की सदर सीट से लगातार दूसरी बार विधायक हैं तो छोटे बेटे करण भूषण कैसरगंज सीट से बीजेपी के सांसद है. 
 
यूपी की सियासत में काफी दिनों से इस बात की चर्चा चल रही थी कि योगी मंत्रिमंडल में बृजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक सिंह को मंत्री बनाकर लिया जा सकता है. रविवार को मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, जिसमें बृजभूषण सिंह के बेटे को जगह नहीं मिली. शपथ लेने वाले मंत्रियों के नाम सामने आने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा, “शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है, जिस शाख पर बैठे हो वह टूट भी सकती है.

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बेटे को मंत्री न बनाए जाने से बृजभूषण नाराज?
बृजभूषण शरण सिंह के इस पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गईं कि यह तंज कहीं योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तो नहीं है. सूत्रों के मुताबिक बृजभूषण शरण सिंह अपने बेटे प्रतीक सिंह को मंत्रिमंडल में जगह दिलाना चाहते थे. हालांकि उन्होंने कभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की, लेकिन लंबे समय से उनके समर्थक कह रहे थे कि कैबिनेट विस्तार में प्रतीक सिंह को मौका मिल सकता है.

मंत्रिमंडल विस्तार में जिन आठ नेताओं को जगह मिली, उनमें किसी बड़े ठाकुर चेहरे को शामिल नहीं किया गया. इसी वजह से बृजभूषण शरण सिंह का यह पोस्ट राजनीतिक तौर पर काफी अहम माना जा रहा है. फिलहाल बीजेपी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन बृजभूषण शरण सिंह के पोस्ट ने यूपी की राजनीति में नई चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है. इस पोस्ट को बृजभूषण सिंह की नाराजगी से भी जोड़कर देखा जा रहा है. 

दिल्ली में बृजभूषण शरण सिंह
योगी कैबिनेट विस्तार के दूसरे दिन बृजभूषण शरण सिंह दिल्ली में है. उनके दिल्ली आने की सियासी वजह सामने नहीं आ सकी है. हालांकि, दिल्ली में किस संबंध में आए हैं, क्या दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में उनके खिलाफ चल रहे मामले की सुनवाई के लिए आए हैं या फिर बीजेपी नेतृत्व से मुलाकात के लिए. इस बात की जानकारी भी सामने नहीं आई है. 

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दिल्ली में बृजभूणष सिंह के होने की वजह से लेकर कई तरह से सियासी कयास लगाए रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे दिल्ली आकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर अपनी और अपने समर्थकों की उपेक्षा का मुद्दा उठाना चाहते थे।. वे गोंडा और देवीपाटन मंडल में अपने दबदबे का हवाला देकर पार्टी पर दबाव बनाने की कोशिश में है

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