'हम रायता फैला देंगे...', विधानसभा में यूपी डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने सपा नेताओं को दी चेतावनी

उत्तर प्रदेश विधानसभा में सोमवार को सत्ता पक्ष और सपा सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि यदि सवाल से हटकर बात हुई तो 'रायता फैला देंगे'. इससे पहले शुक्रवार को हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना नाराज होकर सदन से बाहर चले गए थे. सदन की कार्यवाही लगातार गरमाई हुई है.

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उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक (File photo ITG) उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक (File photo ITG)

समर्थ श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 16 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:13 PM IST

उत्तर प्रदेश की विधानसभा में सोमवार को कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. माहौल उस समय और गरमा गया जब उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने विपक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा, अगर ये सवाल से हटकर कुछ पूछेंगे तो हम भी उसी तरह जवाब देंगे और रायता फैला देंगे. 

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दरअसल, समाजवादी पार्टी के सदस्य डॉ. आर. के. वर्मा अपना प्रश्न रखने के लिए खड़े होने वाले थे. इससे पहले ही उप मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी कर दी. सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों ने मेज थपथपाकर समर्थन जताया, जबकि विपक्षी सदस्यों ने इसे असंसदीय बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई. हालांकि कार्यवाही आगे बढ़ी, लेकिन माहौल में तल्खी साफ झलक रही थी.

शुक्रवार से ही चढ़ा हुआ था पारा

यह पहला मौका नहीं था जब हाल के दिनों में सदन का तापमान बढ़ा हो. इससे पहले शुक्रवार को भी विधानसभा में असहज स्थिति बन गई थी. प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने प्रतियोगी परीक्षाओं में भर्तियों, आरक्षण व्यवस्था और अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा था. जवाब देने के लिए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना खड़े हुए. चर्चा के दौरान डॉ. सोनकर ने बीच में टिप्पणी करने की कोशिश की, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उन्हें बैठकर जवाब सुनने का निर्देश दिया. इसी बीच सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा विधायक केतकी सिंह सहित कुछ अन्य सदस्यों ने विरोध जताना शुरू कर दिया. देखते ही देखते शोर-शराबा बढ़ गया. अध्यक्ष महाना ने दोनों पक्षों को संयम बरतने की नसीहत दी, लेकिन स्थिति काबू में नहीं आई. नाराज़गी जताते हुए उन्होंने कहा, “क्या अब आप लोग सदन चलाएंगे? यह जिम्मेदारी मेरी है.” इसके बाद उन्होंने अपना हेडफोन मेज पर रखा और सदन से बाहर चले गए. उनके इस कदम से पूरे सदन में अचानक सन्नाटा छा गया.

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सदन की गरिमा पर सवाल

विधानसभा में लगातार बढ़ती तल्खी को लेकर राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि चुनावी मौसम के करीब आते ही आरोप-प्रत्यारोप तेज होना स्वाभाविक है, लेकिन सदन की गरिमा बनाए रखना सभी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है. सोमवार को बृजेश पाठक की टिप्पणी ने एक बार फिर यह संकेत दिया कि सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद की रेखा खिंची हुई है. विपक्ष का कहना है कि सरकार असहज सवालों से बचना चाहती है, जबकि सत्ता पक्ष का तर्क है कि प्रश्नकाल को राजनीतिक बयानबाजी का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए.
 

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