उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने राजनीतिक हलचल मचा दी है. विपक्षी दल, खासकर समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची से लाखों नाम कटने पर सवाल उठाए हैं, तो चुनाव आयोग ने आंकड़ों के साथ तीखा तंज कसते हुए 'भेड़िया आया' वाली प्रसिद्ध कहानी सुना दी. फिलहाल, सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है और CEO कार्यालय आपत्तियों का समाधान कर रहा है.
ड्राफ्ट लिस्ट में 2.89 करोड़ नाम क्यों कटे?
मंगलवार को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 2.89 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए. समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने 'X' पर सीएम योगी आदित्यनाथ के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उसके बाद आयोग ने 'एक करोड़ नाम जोड़े'. सपा ने पूछा- पहले बेईमानी हो रही थी या बाद में? पार्टी ने मामले को कोर्ट ले जाने की धमकी भी दी.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) उत्तर प्रदेश ने जवाब में राजनीतिक दलों के साथ हुई बैठकों का ब्योरा दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि न पहले बेईमानी हो रही थी, न अब हो रही है.
आयोग का तंज: 'भेड़िया आया' वाली कहानी
CEO UP ने सपा के आरोपों पर व्यंग्य करते हुए तंज भी किया कि Aesop's Fables में एक प्रसिद्ध कहानी 'The Boy who cried Wolf है.' कहानी में एक चरवाहा लड़का बार-बार झूठ बोलकर गांव वालों को डराता है कि भेड़िया आ गया. जब असली भेड़िया आता है, तो कोई उसकी बात पर विश्वास नहीं करता.
आयोग ने इसे 'शिक्षाप्रद कहानी' बताते हुए कहा कि सपा की शिकायतें बिना प्रमाण के हैं. साथ ही, सपा की मांगों पर उठाए गए कदमों और समय-समय पर दी गई जानकारी का हवाला दिया.
सियासी गलियारों में बढ़ रही टेंशन
यह विवाद यूपी की आगामी चुनावी तैयारियों के बीच आया है, जहां वोटर लिस्ट की शुद्धता पर सभी पार्टियां नजर रखे हुए हैं. विपक्ष का दावा है कि SIR प्रक्रिया में पक्षपात हुआ, जबकि आयोग पारदर्शिता का भरोसा दिला रहा है.
अब देखना यह है कि सपा कोर्ट जाती है या बातचीत से हल निकलता है. क्या यह महज राजनीतिक ड्रामा है या वोटर अधिकारों का सवाल. इस मामले पर समाजवादी पार्टी प्रवक्ता जूही सिंह ने 'आज तक' को बताया कि चुनाव आयोग अगर भेड़िए की कहानी सुनाने के बजाय बहराइच में भेड़ियों के एनकाउंटर करने के बजाय उन्हें पकड़ लेता तो कितनी जान बच जाती. हम सवाल कर रहे हैं और आयोग पंचतंत्र की कहानी सुना रहा है.
समर्थ श्रीवास्तव