इस बिलबिलाती गर्मी में एक महीने से नहीं आ रही बिजली, खुद AC चैंबर में बैठ कर अधिकारी दे रहे सिर्फ आश्वासन

यूपी के बांदा में 45 डिग्री तापमान और भीषण गर्मी के बीच एक गांव में एक महीने से बिजली ही नहीं आ रही है. करीब 350 घर इस गर्मी में बिना बिजली के रहने को मजबूर हैं. हीटवेव के बीच परेशान ग्रामीण डीएम कार्यालय पहुंचे, जहां डीएम अमित आसेरी ने मामले का संज्ञान लेते हुए बिजली विभाग को फटकार लगाई और जांच के आदेश दिए.

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बिजली विभाग की शिकायत लेकर ग्रामीण डीएम के पास पहुंचे (Photo: ITG) बिजली विभाग की शिकायत लेकर ग्रामीण डीएम के पास पहुंचे (Photo: ITG)

सिद्धार्थ गुप्ता

  • बांदा ,
  • 11 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:44 AM IST

यूपी में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है. तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है. ऐसे में अगर किसी गांव में एक-दो घंटे नहीं बल्कि पूरे एक महीने तक बिजली गायब रहे तो लोगों की जिंदगी किस कदर मुश्किल हो सकती है, इसका अंदाजा बांदा जिले के एक गांव की हालत देखकर लगाया जा सकता है. यहां बिजली संकट से त्रस्त ग्रामीणों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया और दर्जनों लोग अपनी फरियाद लेकर सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए. ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब एक महीने से गांव में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है. विभागीय अधिकारियों को लगातार शिकायतें और आवेदन दिए गए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला. अब डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं.

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350 से ज्यादा घर अंधेरे में, गर्मी ने बढ़ाई मुश्किल

मामला बांदा जिले की नरैनी तहसील के मलेहरा निवादा गांव का है. ग्रामीणों के अनुसार गांव में करीब 350 से अधिक परिवार रहते हैं. पिछले एक महीने से बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण पूरे गांव का जनजीवन प्रभावित हो गया है. गांव के लोगों का कहना है कि दिन में तेज धूप और रात में उमस भरी गर्मी के कारण घरों में रहना मुश्किल हो गया है. पंखे बंद हैं, कूलर शोपीस बने हुए हैं और जिन लोगों ने कर्ज लेकर एसी खरीदे थे, वे भी बेकार पड़े हैं. हालात ऐसे हैं कि रातभर लोग छतों और आंगनों में जागकर समय बिताने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बिजली न होने का सबसे बड़ा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है. छोटे बच्चों को गर्मी और मच्छरों की वजह से परेशानी हो रही है, जबकि बुजुर्गों की तबीयत लगातार बिगड़ रही है. कई घरों में बीमार लोग भी हैं जिन्हें इस भीषण गर्मी में सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

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बिजली गई तो पानी भी हुआ गायब

बिजली संकट ने केवल रोशनी और पंखों को ही नहीं छीना, बल्कि पेयजल की समस्या भी खड़ी कर दी है. गांव में कई लोग मोटर और पंप के जरिए पानी की व्यवस्था करते हैं. बिजली नहीं होने से जलापूर्ति प्रभावित हो गई है. महिलाओं को दूर-दूर से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पानी की जरूरत बढ़ जाती है, लेकिन बिजली न होने के कारण पानी का संकट और गंभीर हो गया है. इससे रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है.

जला तार और फूंका ट्रांसफॉर्मर बना मुसीबत की वजह

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लगे 10 से 15 मीटर बिजली के तार जलकर खराब हो गए थे. इसके अलावा ओवरलोडिंग के चलते ट्रांसफॉर्मर भी फुंक गया. इसके बाद बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई. लोगों का आरोप है कि तकनीकी खराबी दूर करने के लिए बिजली विभाग को कई बार सूचना दी गई, लेकिन एक महीने बीत जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया. अधिकारी हर बार जल्द ठीक कराने का भरोसा देते रहे, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ. ग्रामीणों का कहना है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी एयर कंडीशनर वाले कमरों में बैठकर सिर्फ आश्वासन देते रहे, जबकि गांव के लोग भीषण गर्मी में परेशान होते रहे.

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जब नहीं सुनी गई शिकायत, तो डीएम ऑफिस पहुंच गए ग्रामीण

लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने आखिरकार जिलाधिकारी कार्यालय का रुख किया. दर्जनों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने जिलाधिकारी के सामने अपनी समस्या रखी और जल्द से जल्द बिजली बहाल कराने की मांग की. ग्रामीणों ने बताया कि एक महीने से गांव अंधेरे में डूबा हुआ है. बिजली विभाग को कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन हर बार केवल इंतजार करने को कहा गया. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों का धैर्य जवाब दे गया और उन्हें प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक पहुंचना पड़ा.

डीएम ने लिया संज्ञान, अफसरों को लगाई फटकार

ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद जिलाधिकारी अमित आसेरी ने मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने तत्काल संबंधित बिजली अधिकारी को फोन कर नाराजगी जाहिर की और जल्द से जल्द बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए. डीएम ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर एक गांव में इतनी लंबी अवधि तक बिजली आपूर्ति बंद कैसे रही और जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते समस्या का समाधान क्यों नहीं किया. इस मामले की जांच के आदेश भी दिए गए हैं. जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी (एडीएम) को पूरे प्रकरण की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं. प्रशासन का कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है.

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एडीएम बोले- जल्द होगा समाधान

अपर जिलाधिकारी मायाराम ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिशासी अभियंता से रिपोर्ट मांगी गई है. तकनीकी समस्या का आकलन कराया जा रहा है और जल्द ही बिजली आपूर्ति बहाल करने की कोशिश की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि ग्रामीणों की समस्या का शीघ्र समाधान कराया जाएगा ताकि लोगों को राहत मिल सके.

सीएम के निर्देशों पर भी उठ रहे सवाल

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ बैठक कर बिजली और पानी से जुड़ी शिकायतों का त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए थे. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि आम जनता से जुड़े ऐसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसके बावजूद बांदा के मलेहरा निवादा गांव में एक महीने तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने का मामला कई सवाल खड़े कर रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर उनकी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की गई होती तो उन्हें डीएम कार्यालय तक नहीं आना पड़ता. फिलहाल प्रशासन ने मामले में हस्तक्षेप कर दिया है. अब गांव के लोगों को उम्मीद है कि एक महीने से अंधेरे और गर्मी की मार झेल रहे परिवारों को जल्द राहत मिलेगी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी.

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