यूपी के डिप्टी CM ब्रजेश पाठक का बड़ा एक्शन: 5 डॉक्टर बर्खास्त, CMO समेत 16 पर गिरी गाज, प्राइवेट प्रैक्टिस पर भी वार

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कड़ा रुख अपनाया है. ड्यूटी से गायब रहने वाले 5 डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के आरोपों में सीएमओ समेत कई अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है.

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उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक (Photo- ITG) उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक (Photo- ITG)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ ,
  • 08 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:21 AM IST

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तैनात लापरवाह स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्साधिकारियों के खिलाफ  कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं. लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान कर्तव्यों के प्रति उदासीनता, भ्रष्टाचार और बिना सूचना लंबे समय तक ड्यूटी से गायब रहने के गंभीर मामले सामने आए. डिप्टी सीएम ने तुरंत संज्ञान लेते हुए 5 चिकित्साधिकारियों को सेवा से बर्खास्त करने और 16 अन्य के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं. शासन द्वारा यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और जनता के प्रति जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से उठाया गया है.

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लंबी गैरहाजिरी पर बर्खास्तगी: इन 5 डॉक्टरों की गई नौकरी

बिना किसी सूचना के लंबे समय से अपनी ड्यूटी से अनधिकृत रूप से गायब रहने वाले पांच चिकित्साधिकारियों को डिप्टी सीएम ने सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया है. इनमें जिला अस्पताल गोरखपुर की डॉ. अलकनंदा, कुशीनगर के डॉ. रामजी भरद्वाज, बलरामपुर के डॉ. सौरभ सिंह, अमेठी के डॉ. विकलेश कुमार शर्मा और औरैया की डॉ. मोनिका वर्मा शामिल हैं. विभाग ने स्पष्ट किया है कि राजकीय कार्यों में इस तरह की लापरवाही और अनुशासनहीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग पर गाज: CMO भी लपेटे में

अम्बेडकर नगर के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा पर निजी अस्पतालों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों के पंजीकरण में अनियमितता बरतने के आरोप साबित हुए हैं. एडीएम स्तर की जांच में पाया गया कि इन्होंने व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते शासनादेशों का उल्लंघन किया. इसके अलावा संडीला, हरदोई के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं. उन पर अवैध निजी अस्पतालों पर कार्यवाही न करने और कर्तव्यों में शिथिलता बरतने का आरोप है.

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अभद्रता और प्राइवेट प्रैक्टिस: वेतनवृद्धि रोकने का आदेश

राजकीय मेडिकल कॉलेज, बदायूं के सह-आचार्य डॉ. रितुज अग्रवाल पर सहकर्मियों से गाली-गलौज और अभद्रता के मामले में अनुशासनिक कार्यवाही शुरू की गई है. वहीं, झांसी के ट्रामा सेंटर मोठ में तैनात आर्थोसर्जन डॉ. पवन साहू को सरकारी सेवा में रहते हुए प्राइवेट प्रैक्टिस करने का दोषी पाया गया है, जिसके चलते उनकी दो वेतनवृद्धियां रोक दी गई हैं. हमीरपुर में तैनात डॉ. लालमणि द्वारा प्रसूताओं से अवैध वसूली और बदतमीजी करने पर उनकी तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया गया है.

गलत मेडिकल रिपोर्ट और लापरवाही पर सख्त रुख

मथुरा जिला अस्पताल के डॉ. देवेंद्र कुमार और डॉ. विकास मिश्रा पर मारपीट के मामले में गलत मेडिकोलीगल रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में विभागीय कार्यवाही होगी.सुल्तानपुर के लम्भुआ में महिला के इलाज में लापरवाही बरतने पर तत्कालीन अधीक्षक समेत फार्मासिस्ट पर भी गाज गिरी है. प्रयागराज के डॉ. शमीम अख्तर को प्रशासनिक नियंत्रण न रख पाने के कारण स्थानांतरित कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं. प्रतिनियुक्ति पर तैनात डॉ. आदित्य पाण्डेय को सहकर्मी से अभद्र व्यवहार पर वापस उनके मूल तैनाती स्थल रायबरेली भेज दिया गया है.

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