आतंकियों के निशाने पर UP... रेलवे ट्रैक से शो-रूम तक थे टारगेट, ATS ने नाकाम की बड़ी साजिश

यूपी एटीएस ने आईएसआई से जुड़े आतंकी मॉड्यूल को बेनकाब किया है. ये आतंकी भीड़भाड़ वाले इलाकों, रेलवे स्टेशनों, रेलवे ट्रैक, शो-रूम और महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे थे.

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यूपी एटीएस ने विकास, लोकेश, साकिब और अरबाब (L to R) को गिरफ्तार किया. (Photo: ITG) यूपी एटीएस ने विकास, लोकेश, साकिब और अरबाब (L to R) को गिरफ्तार किया. (Photo: ITG)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 06 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:45 AM IST

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश हुआ है. यूपी एटीएस की गिरफ्त में आए आईएसआई  से जुड़े चार संदिग्ध लखनऊ, मेरठ समेत कई शहरों में गाड़ियों के शोरूम, गैस सिलेंडर से भरे ट्रक और रेलवे ट्रैक के किनारे लगे सिग्नल बॉक्स को निशाना बनाने की तैयारी में थे.  इनका मकसद आगजनी और अफरा-तफरी फैलाना भी था.

जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान में बैठा आईएसआई हैंडलर, पकड़े गए साकिब उर्फ डेविल के जरिए भीड़भाड़ वाले इलाकों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रेकी करा रहा था. फोटो और वीडियो भेजने के लिए उसके नेटवर्क में लोकेश पंडित उर्फ पपला और विकास गहलावत उर्फ रौनक जैसे नाम भी जुड़े. पैसों के लालच में भेजी गई यही जानकारी बड़े हमले की बुनियाद बन रही थी.   

वैसे बीते 5 साल में यूपी में डेढ़ दर्जन से ज्यादा ऐसे नेटवर्क पकड़े जा चुके हैं. मतलब दुश्मन की नजर लगातार यूपी के सैन्य इलाकों, अहम प्रतिष्ठानों और रणनीतिक ठिकानों पर बनी हुई है. 

बड़ी साजिश की फिराक में थे संदिग्ध  

शुक्रवार यूपी एटीएस ने मेरठ और नोएडा के रहने वाले साकिब उर्फ डेविल, अरबाब, लोकेश पंडित उर्फ पपला और विकास गहलावत उर्फ रौनक को लखनऊ रेलवे स्टेशन से उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब ये स्टेशन के पास लगे रेलवे सिग्नल बॉक्स को उड़ाकर ट्रेन संचालन बाधित करने और एक्सीडेंट की साजिश को अंजाम देने वाले थे. साकिब उर्फ डेविल इस पूरे मॉड्यूल का मास्टरमाइंड है.  पाकिस्तान में बैठे आईएसआई हैंडलर के इशारे पर डेविल अपने तीन साथियों के साथ मिलकर सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि गाजियाबाद, अलीगढ़, मेरठ और नोएडा में भी आगजनी और विस्फोट की घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में था. 

पड़ताल में ये भी सामने आया कि बीती 4 मार्च को बिजनौर में एक पिकअप में आग लगाई गई. इस घटना को भी साकिब उर्फ डेविल के मॉड्यूल ने ही अंजाम दिया था. उसका वीडियो टेलीग्राम के जरिए पाकिस्तान में बैठे आईएसआई हैंडलर को भेजा गया था. जांच में पता चला कि पाकिस्तान में बैठा आईएसआई हैंडलर कई महत्वपूर्ण कंटोनमेंट एरिया, आर्मी मूवमेंट और अहम प्रतिष्ठानों की गूगल लोकेशन की स्क्रीन रिकॉर्डिंग भेजता था. इसके बाद टारगेट जगहों की रेकी के फोटो और वीडियो मंगवाए जाते थे.

इसके एवज में आईएसआई हैंडलर साकिब उर्फ डेविल को उसके बताए बैंक खातों में क्यूआर कोड के जरिए पैसे भेज रहा था. यूपी एटीएस को मोबाइल की पड़ताल में मेरठ, अलीगढ़ और गाजियाबाद के कई गाड़ियों के शोरूम के वीडियो भी मिले हैं. इन वीडियो को टारगेट करने से पहले आईएसआई हैंडलर को भेजा गया था. जांच में ये भी सामने आया कि शाकिब उर्फ डेविल ने सोशल मीडिया पर असलहों के साथ रील डाली थी. इसके बाद दुबई में बैठा आकिब उसके संपर्क में आया. आकिब ने सोशल मीडिया के जरिए संपर्क बढ़ाया और धीरे-धीरे उसे गजवा-ए-हिंद, ओसामा बिन लादेन, कश्मीर मुजाहिदीन और फर्रुतुल्ला गौरी जैसे नामों से बने टेलीग्राम चैनलों से जोड़ा.

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इन्हीं टेलीग्राम चैनलों के जरिए पाकिस्तान में बैठा आईएसआई हैंडलर साकिब के संपर्क में आया. फिर उसके बताए तरीकों से साकिब उर्फ डेविल ने ये मॉड्यूल खड़ा कर लिया.  साकिब ने सबसे पहले मेरठ के ही अपने दोस्त अरबाब को साथ जोड़ा. इसके बाद पैसों का लालच देकर नोएडा में मजदूरी करने वाले लोकेश पंडित उर्फ पपला और विकास गहलावत उर्फ रौनक को भी इस नेटवर्क में शामिल किया था. यूपी एटीएस अब इन चारों से पुलिस कस्टडी रिमांड में लेकर पूछताछ कर कुछ और भी गिरफ्तारी कर सकती है.

वैसे ये पहली बार नहीं है जब आईएसआई एजेंट का कोई मॉड्यूल पकड़ा गया हो. बीते 2 दशकों से आईएसआई लगातार यूपी को दहलाने की कोशिश में नौजवानों को अपने जासूसी के मकड़जाल में फंसाकर जासूसी करवा रही है. 

पहले कब-कब यूपी को दहलाने की साजिश रची गई?

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1- 18 मार्च 2026 को यूपी एटीएस और हापुड़ पुलिस ने ज्वाइंट ऑपरेशन में अजीम राणा और आजाद अली को गिरफ्तार किया. दोनों पाकिस्तान में बैठे आईएसआई हैंडलर शहजाद भट्टी के सीधे संपर्क में थे. ये दिल्ली-एनसीआर के कई महत्वपूर्ण मंदिरों की फोटो-वीडियो भेजकर रेकी कर रहे थे. प्लान भीड़भाड़ वाले दिन मंदिरों में धमाके का था.

2- 29 मार्च 2026 को यूपी एटीएस ने मुरादाबाद के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज से बीडीएस की पढ़ाई कर रहे हारीश अली को गिरफ्तार किया. जांच में सामने आया कि वो सोशल मीडिया के जरिए गजवा-ए-हिंद की विचारधारा से प्रभावित होकर शरीयत लागू करने के नाम पर जिहादी नेटवर्क खड़ा कर रहा था.

3- मार्च 2026 में यूपी एटीएस ने नेवी के लांस नायक आदर्श कुमार उर्फ लकी को आईएसआई के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया. वो नेवी की साउदर्न कमांड के कोच्चि बेस पर तैनात था और संवेदनशील ठिकानों की फोटो-वीडियो आईएसआई को भेज रहा था.

4- 2025 प्रयागराज महाकुंभ को भी आईएसआई ने बब्बर खालसा इंटरनेशनल के साथ मिलकर निशाना बनाने की साजिश रची थी. विस्फोट और भगदड़ से बड़े नुकसान की योजना थी. यूपी एटीएस ने कौशांबी से लजर मसीह को 3 हैंड ग्रेनेड, असलहा और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया. उसे महाकुंभ हमले के मिशन पर भेजा गया था, लेकिन पुलिस चौकसी के चलते वो हमला नहीं कर पाया.

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5- नवंबर 2025 में आईएसआई की सरपरस्ती में तैयार जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े अलफलाह यूनिवर्सिटी के डॉक्टर मॉड्यूल का खुलासा हुआ. लखनऊ की रहने वाली डॉक्टर शाहीन अयोध्या और वाराणसी की रेकी कर चुकी थी. मॉड्यूल ने 300 किलो अमोनियम नाइट्रेट तक इकट्ठा कर लिया था.

6- नवंबर 2025 में गुजरात एटीएस ने हैदराबाद के अहमद मोइनुद्दीन, यूपी के शामली निवासी आजाद सुलेमान शेख और लखीमपुर खीरी के मोहम्मद सलीम को गिरफ्तार किया. पूछताछ में सामने आया कि ये दिल्ली की आजादपुर मंडी और लखनऊ स्थित आरएसएस कार्यालय को निशाना बनाने वाले थे. इनके हैंडलर अबू खतीजा ने गुजरात में हथियार भी मुहैया कराए थे. तीनों ने लखनऊ, दिल्ली और अहमदाबाद के कई महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी की थी और खतरनाक केमिकल रेसिन से हमले की तैयारी में थे.

7- मई 2025 में मुरादाबाद से आईएसआई एजेंट शहजाद शेख की गिरफ्तारी के एक सप्ताह के भीतर वाराणसी के तुफैल अहमद और दिल्ली के हारून को पकड़ा गया. जांच में पता चला कि तुफैल पाकिस्तान के 600 से अधिक संदिग्धों के संपर्क में था. उसने राजघाट, नमो घाट, ज्ञानवापी, वाराणसी रेलवे स्टेशन, दिल्ली की जामा मस्जिद और आजादपुर मंडी की फोटो-वीडियो पाकिस्तानी हैंडलर को भेजी थीं. हारून फंडिंग संभालता था.

8- मार्च 2025 में यूपी एटीएस ने फिरोजाबाद ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के चार्जमैन रविंद्र कुमार को गिरफ्तार किया. आईएसआई ने उसे हनी ट्रैप में फंसाकर फैक्ट्री में हो रही ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग के ब्लूप्रिंट हासिल किए थे.

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9- जुलाई 2023 में मुंबई पुलिस के इनपुट पर यूपी एटीएस ने आईएसआई से जुड़े अंडरवर्ल्ड डॉन मुन्ना झिंगाड़ा के तीन शूटर अरमान सैयद, मोहम्मद रईस और सलमान को गिरफ्तार किया. जांच में सामने आया कि पाकिस्तान में बैठा मुन्ना झिंगाड़ा भारत के कई सैन्य प्रतिष्ठानों की रेकी कराकर उन्हें निशाना बनाने की साजिश रच रहा था.

10- आईएसआई के साथ अलकायदा भी लगातार आतंकी हमलों की साजिश रचता रहा है. जुलाई 2021 में यूपी एटीएस ने लखनऊ से मशीरुद्दीन और मिनहाज को गिरफ्तार किया. पूछताछ में पता चला कि दोनों 15 अगस्त के मौके पर लखनऊ, कानपुर समेत कई शहरों में कुकर बम धमाकों की योजना बना रहे थे. वो इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच, लखनऊ का हनुमान सेतु मंदिर समेत कई भीड़भाड़ वाले इलाकों को चिन्हित कर लिया था,   लेकिन एटीएस ने पहले ही उन्हें दबोच लिया.

मार्च 2017 में आईएसआईएस आतंकी सैफुल्लाह को यूपी एटीएस ने 48 घंटे तक ऑपरेशन चलाने के बाद लखनऊ में मार गिराया था. पड़ताल की गई तो पता चला सैफुल्लाह आईएसआईएस के खुरासान मॉड्यूल से जुड़ा था जिसका नेटवर्क कानपुर मेरठ से लेकर मध्य प्रदेश के कई शहरों तक फैला था. उसने भोपाल उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में धमाके की घटना को भी अंजाम दिया था.

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फिलहाल 2 अप्रैल 2026 को पकड़े गए इस माड्यूल के सभी संदिग्धों से यूपी एटीएस पूछताछ करने में जुट गई है. एटीएस चीफ और यूपी के एडीजी लॉ आर्डर अमिताभ यश का कहना है कि पकड़े गए मॉड्यूल का मुख्य आरोपी साकिब उर्फ डेविल पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लोगों के भी संपर्क में था, जो धर्म के आधार पर लोगों को भड़काकर आगजनी और विस्फोट की घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश में था. उनके पास से 7 स्मार्टफोन भी बरामद हुए हैं जिनका डाटा रिकवर कर इस पूरे नेटवर्क में शामिल ओवर ग्राउंड वर्कर, शरण देने वाले और उनके मददगारों का ब्यौरा निकाल कर कार्रवाई की जाएगी.

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