UP: पत्नी की याद में बनवाया मंदिर, अब रोज सुबह-शाम पूजा करता है पति

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से एक अनोखा मामला सामने आया है. एक पति ने पत्नी की याद को संजोए रखने के लिए खेत में मंदिर का निर्माण करा दिया. इसके बाद पत्नी की मूर्ति स्थापित कराई. अब वो इस मंदिर में सुबह-शाम पूजा-पाठ करते हैं. बता दें कि शुरुआत में ग्रामीण इस फैसले का मजाक उड़ाया करते थे. मगर, अब सभी लोग पति के प्रेम का कायल हैं.

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पत्नी की मूर्ति की पूजा करते राम सेवक. पत्नी की मूर्ति की पूजा करते राम सेवक.

नीतेश श्रीवास्तव

  • फतेहपुर,
  • 04 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 6:14 PM IST

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक पति ने पत्नी की याद में मंदिर बनवाया है. इसमें पत्नी की मूर्ति स्थापित कर उसकी सुबह-शाम पूजा करता है. जिस तरह शाहजहां ने मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया था, उसी तरह फतेहपुर में राम सेवक रैदास ने अपनी पत्नी के याद में मंदिर का निर्माण कराया है. बता दें कि शुरुआत में ग्रामीण इस फैसले का मजाक उड़ाया करते थे. 

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मामला बकेवर थाना क्षेत्र के पधारा गांव का है. यहां के रहने वाले रामसेवक रैदास की पत्नी का निधन 18 मई 2020 में कोरोना काल में हो गया था. पत्नी के निधन के बाद से वह गुमसुम रहने लगे. फिर पत्नी की याद को जिंदा रखने के लिए उन्होंने गांव से दो किलोमीटर दूर अपने खेत में मंदिर का निर्माण कराया. फिर उसमें पत्नी की मूर्ति स्थापित कर उसकी सुबह-शाम पूजा करते हैं. 

पति की सेवा के लिए बेचैन रहती थी पत्नी

बता दें की राम सेवक रैदास अमीन के पद से रिटायर हैं. जानकारी के मुताबिक, उनकी शादी 18 मई 1977 में हुई थी. उनके 5 बच्चों में 3 लड़के और 2 बेटियां हैं. वहीं, राम सेवक ने बताया कि पत्नी के अंदर ऐसी खूबियां थी, जिसको सोचकर बेचैन हो जाता था. वह मुझे कुछ भी नहीं करने देती थी. मुझे छोड़कर खाना तक नहीं खाती थी. पति की सेवा करने के लिए बेचैन रहती थी. 

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पत्नी की मौत के बाद बेचैन हो गया था पति

राम सेवक ने आगे बताया कि पत्नी जब जिंदा थी, तब भी उनका साया मेरे साथ बराबर चला करता था. मैं रात को भी कहीं जाता था, तो लगता था मेरी पत्नी आगे आगे चल रही है और उसके पीछे-पीछे मैं चल रहा हूं. मैं उनसे इतना प्यार करता था कि उनके मौत के बाद मैं पागल सा हो गया था. फिर, अचानक मेरे दिमाग में गूंजा कि शाहजहां ने मुमताज के लिए ताजमहल बनवाया था.

मंदिर बनाकर और पूजा करके रहता हूं खुश

रामसेवक का कहना है कि ताजमहल तो मैं भी बनवा सकता था, लेकिन पत्नी की याद में मंदिर बनवाया. मंदिर बनाकर और पूजा करके खुश रहता हूं. अब मैं हर बार इसका स्थापना दिवस मनाता रहूंगा. हर साल नवंबर के महीने में भोज और भंडारा करता रहूंगा. साथ ही उनकी यादों में अपना जीवन गुजार दूंगा. वहीं, ग्रामीणों ने बताया कि वह अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते थे. इसलिए उनकी याद में मंदिर बनवाया और पत्नी की मूर्ति स्थापित करवाई. सुबह-शाम मंदिर जाकर पूजा-पाठ करते हैं. अब राम सेवक यहीं रहते हैं.

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