आगरा के विश्व प्रसिद्ध ताजमहल में बढ़ती पर्यटकों की भीड़ अब चिंता का विषय बनती जा रही है और इसी को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI ने बड़ा फैसला लिया है. सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी यानी CEC के सुझाव पर अब ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी की 'केयरिंग कैपेसिटी' तय की जाएगी. यानी एक समय में इन स्मारकों में कितने पर्यटक सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से मौजूद रह सकते हैं, इसकी वैज्ञानिक सीमा निर्धारित की जाएगी.
सबसे पहले ताजमहल की केयरिंग कैपेसिटी तय होगी और इसके लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है आईआईटी दिल्ली को. IIT दिल्ली की तीन सदस्यीय टीम हाल ही में ताजमहल पहुंची, जहां टीम ने पूर्वी गेट स्थित टिकट विंडो से लेकर मुख्य मकबरे तक का गहन निरीक्षण किया.
टीम ने टिकट मिलने में लगने वाला समय, सुरक्षा जांच, टिकट स्कैनिंग और भीड़ के दबाव के दौरान पर्यटकों की आवाजाही का आकलन किया. रॉयल गेट से मुख्य मकबरे तक के रास्ते, चमेली फर्श और प्रवेश-निकास व्यवस्था का भी बारीकी से अध्ययन किया गया.
करीब ढाई घंटे तक ताजमहल परिसर में मौजूद रही टीम ने भीड़ प्रबंधन के हर पहलू पर जानकारी जुटाई. इस दौरान ASI के उत्तरी जोन के रीजनल डायरेक्टर वसंत कुमार स्वर्णकार से भी बातचीत की गई. गौरतलब है कि उनके कार्यकाल में मुख्य मकबरे पर भीड़ नियंत्रित करने के लिए 200 रुपये का अतिरिक्त टिकट लागू किया गया था.
सुप्रीम कोर्ट और CEC के निर्देश
दरअसल, ताजमहल संरक्षण को लेकर यह पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद तेज हुई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पर्यटन विभाग ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, दिल्ली से एक विजन डॉक्यूमेंट तैयार कराया था, जिसे वर्ष 2018-19 में कोर्ट में दाखिल किया गया था.
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस विजन डॉक्यूमेंट पर CEC से रिपोर्ट मांगी और नवंबर 2025 में CEC ने अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए ताजमहल समेत अन्य स्मारकों पर बढ़ती भीड़ को लेकर चिंता जताई.
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि स्मारकों की 'केयरिंग कैपेसिटी' तय कर पर्यटकों की संख्या को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित किया जाए.
पुरानी सिफारिशें और NEERI का सुझाव
इससे पहले साल 2015 में नीरी यानी नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ने भी ताजमहल पर अध्ययन किया था. नीरी ने सुझाव दिया था कि एक समय में अधिकतम 9 हजार पर्यटकों को ही ताजमहल परिसर में रहने की अनुमति हो जबकि हर घंटे अधिकतम 6 हजार पर्यटकों को प्रवेश दिया जाए. साथ ही गेट पर डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाकर पर्यटकों की संख्या दिखाने और “स्टेप टिकटिंग सिस्टम” लागू करने की भी सिफारिश की गई थी.
अब ASI इस दिशा में आगे बढ़ चुका है और पहले चरण में ताजमहल की केयरिंग कैपेसिटी तय की जाएगी. इसके बाद दूसरे चरण में आगरा किला और फतेहपुर सीकरी के लिए भी यही व्यवस्था लागू की जाएगी. माना जा रहा है कि इस पहल से न सिर्फ ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण बेहतर होगा, बल्कि पर्यटकों को भी अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित अनुभव मिल सकेगा.
नितिन उपाध्याय