शिखा विवाद से शुरू हुआ संत समाज का टकराव अब खुलकर वैचारिक संघर्ष में बदलता नजर आ रहा है. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 'धर्म युद्ध बोर्ड' की घोषणा की है. यानी यह लड़ाई अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं दिख रही.
इस बोर्ड में प्रतीकात्मक रूप से संत समाज और सत्ता के बीच विभाजन रेखा खींची गई है- एक ओर 'गाय, सत्य, शंकराचार्य का पक्ष, तो दूसरी ओर 'आय, सत्ता, मुख्यमंत्री' के साथ लोगों को दर्शाया गया है. खास बात यह है कि बोर्ड में सीधे तौर पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज की तस्वीर शामिल की गई है.
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा जारी इस बोर्ड में एक तरफ 'गाय, सत्य, शंकराचार्य के साथ हूं' लिखा गया है, जबकि दूसरी ओर 'आय, सत्ता, मुख्यमंत्री के साथ हूं.' लिखा है. इस बोर्ड के जरिए गो-रक्षा को लेकर चल रही वैचारिक लड़ाई को प्रतीकात्मक रूप में दिखाने की कोशिश की गई है.
जारी किए गए बोर्ड के शीर्षक में लिखा है- 'गो रक्षा के इस धर्मयुद्ध में मैं तो...' इसे दो हिस्सों में बांटा गया है. एक तरफ 'गाय, सत्य, शंकराचार्य के साथ हूं' लिखा है, जबकि दूसरी ओर 'आय, सत्ता, मुख्यमंत्री के साथ हूं' लिखा गया है. खास बात यह है कि इस दूसरे हिस्से में सबसे पहले रवींद्र पुरी महाराज की तस्वीर लगाई गई है.
दरअसल, अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने हाल ही में संभल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य पर तीखी टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि अविमुक्तेश्वरानंद 'एजेंडा' चला रहे हैं और किसी भी बड़े अखाड़े या संत परिषद का समर्थन उन्हें प्राप्त नहीं है. इतना ही नहीं, उन्होंने खुद को सरकार, खासकर योगी आदित्यनाथ के साथ बताया था.
इस मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि हमने बिल्कुल चिह्नित कर लिया, उनके वक्तव्य को जान लिया. जान कर उनको खड़ा कर दिया कि आप मुख्यमंत्री के साथ हैं. उनका जो कथन है, उसके अनुसार उनका फोटो हमने उस तरफ रख दिया. तो अब स्पष्टता के साथ कम से कम पूरे सनातन धर्मी जनता को ये पता चल गया कि गौ माता की रक्षा के लिए आंदोलन चल रहा था, जब ये युद्ध लड़ा जा रहा था, उस समय यह सत्ता के साथ थे.
यह पूरा विवाद शिखा, बटुकों के सम्मान और गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग से जुड़ा हुआ है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 11 मार्च को लखनऊ कूच करने का ऐलान कर चुके हैं, जिसे लेकर सियासी और धार्मिक हलकों में हलचल बनी हुई है.
रोशन जायसवाल