'जब वो बाथरूम में गए...' आशुतोष महाराज पर ट्रेन में अटैक, अविमुक्तेश्वरानंद बोले- हम ऐसे रास्तों के पक्षधर नहीं

रीवा एक्सप्रेस में आशुतोष महाराज पर जानलेवा हमला हुआ, इसको लेकर आरोप स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाया गया. अब स्वामी ने इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. रायबरेली में यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि वह किसी भी प्रकार की शारीरिक हिंसा के पक्षधर नहीं हैं. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रेन में सुरक्षा व्यवस्था रहती है, ऐसे में अगर हमला हुआ है तो किसी ने उसे देखा क्यों नहीं.

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आशुतोष महाराज पर हमले को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाए सवाल. (Photo: Screengrab) आशुतोष महाराज पर हमले को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाए सवाल. (Photo: Screengrab)

संतोष शर्मा

  • रायबरेली,
  • 08 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:17 PM IST

यात्रा के दूसरे दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद रायबरेली में हैं. इसी बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर पॉक्सो के तहत केस दर्ज कराने वाले आशुतोष महाराज पर रीवा एक्सप्रेस में हमला हो गया है. आरोप स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके लोगों पर लगाया गया है. इस पूरे मुद्दे पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ट्रेन में हमला हुआ है, ट्रेन में जीआरपी तैनात रहती है और यात्रियों की सुरक्षा करती है. यह रेलवे की जिम्मेदारी होती है कि ट्रेन में यात्रा कर रहे लोगों की सुरक्षा रखें. वह रेलवे की सुरक्षा में थे, फिर उनके ऊपर कैसे कोई हमला कर सकता है?

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उन्होंने आगे कहा कि हमें जानकारी मिली है कि जब वो बाथरूम में गए, तब ठीक थे, फिर निकलने के बाद कह रहे हैं कि हमला हो गया. हमला जब बाहर हुआ तो उसको किसी ने क्यों नहीं देखा?

शारीरिक हिंसा के पक्षपाती हम नहीं हैं. चाहे कितना ही घिनौना आरोप उन्होंने लगा दिया हो, हम नहीं चाहेंगे कि किसी भी प्रकार की शारीरिक हिंसा हो. हम उनका जवाब तर्कों-प्रमाणों से देना चाहेंगे. हम ऐसे रास्तों को अपनाने के पक्षधर नहीं हैं.

नाक काटने वाले मुद्दे पर कही ये बात

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि फलाहारी महाराज कृष्ण जन्मभूमि के मामले में लड़ रहे हैं, और यह (आशुतोष महाराज) भी कृष्ण जन्म भूमि के मामले में लड़ रहे हैं. दोनों एक ही काम में हैं, यानी कि परस्पर मित्र हैं. फलाहारी महाराज हमारे तो है नहीं, तो उन्होंने हो सकता सनातन की दृष्टि से कहा होगा. हमने पहले भी कहा कि यह केवल आक्रोश की अभिव्यक्ति समझ जाना चाहिए. जो सनातन धर्म की नाक काटने के लिए आगे आ रहा है, उसकी नाक काट ली जाए, यह उनका कहना था. लेकिन हमने उसका समर्थन नहीं किया था. ऐसी स्थिति में हमारे ऊपर आप कैसे लगाया जा सकता है.

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हिस्ट्रीशीटर वाली बात पर क्या बोले अविमुक्तेश्वरानंद?

स्वामी ने कहा कि हमारे ऊपर पॉक्सो का केस दर्ज कराने से पहले उन्होंने मुकदमे लिखाने की कोशिश की थी. पूरा एक सीक्वेंस है. एक के बाद एक आरोप हमारे ऊपर लगाए गए. उन्होंने जब प्रयागराज में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी तो कहा था कि इनको भी हिस्ट्रीशीटर बना देना चाहिए, क्योंकि तीन केस तो हम ही ने किए थे. तो वह हमारे ऊपर मुकदमों की बाढ़ लगाकर अपनी बराबरी में खींचना चाहते हैं कि हम हिस्ट्रीशीटर हैं तो यह भी हिस्ट्रीशीटर बन जाएं.

यह भी पढ़ें: अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी पीछे हटे... बोले- पुलिस-सरकार से नहीं मिली मदद

उन्होंने कहा कि यह जो यात्रा निकाली है, उससे सनातन धर्म की जनता को असली हिंदू और नकली हिंदू की पहचान होने वाली है. इसलिए इस यात्रा से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे कार्य किया जा रहे हैं. हमने पहले भी कहा था कि आशुतोष नाम के व्यक्ति को हम ठीक से न जानते थे, न पहचानते थे, न हमारा कोई लेना देना था. वह व्यक्ति हमारे पीछे क्यों पड़ेगा, इसका मतलब है कि वह केवल एक मोहरा है. किसी का उपकरण है. उसके द्वारा कोई और ही है, जो यह सब करवा रहा है.

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- गायें कम कैसे हो रहीं

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जो सरकारी आंकड़े हैं, उन आंकड़ों में साफ कहा गया है कि पूरे भारत में बीफ एक्सपोर्ट में उत्तर प्रदेश नंबर वन है. यह आंकड़ा हमारा नहीं है. यह सरकार की संस्था का आंकड़ा है. जो 2012 से 2019 की गणना हुई है, उसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में गायों की संख्या निरंतर कम हो रही है.

अभी तक 15 से 18 लाख गायें कम हो गई हैं. आखिर हमारे उत्तर प्रदेश की गायें जा कहां रही हैं. दूसरी तरफ अल्लामा जैसे समूह जो बीफ का एक्सपोर्ट करते हैं, वह मोटा चंदा देते हैं. इससे पहले इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए भी बीफ कंपनियों के द्वारा चंदा दिया गया था. एक तरफ कह रहे हैं कि गायों को खरोच नहीं लग रही है तो बीफ कंपनियों को हतोत्साहित किया जाना चाहिए था. गायों की संख्या बढ़नी चाहिए थी, लेकिन यहां उल्टा हो रहा है.

'अब गौ भक्तों का वोट और गौ हत्यारे का नोट एक झोली में नहीं'

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अब गौ भक्तों का वोट और गौ हत्यारे का नोट एक झोली में नहीं रखा जाएगा. समाज इसको रखने के लिए तैयार नहीं है. आपको अलग-अलग झोली बनानी पड़ेगी. गौ भक्तों का वोट अलग रखिए और गौ हत्यारों का नोट अलग रखिए. अब या तो आप गाय के पक्ष में रहो या विपक्ष में रहो. हम कसाइयों से लड़ लेंगे, लेकिन जब कसाई गौ भक्त के रूप में आएगा तो दिक्कत हो जाती है. 

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हमारी यात्रा के लिए हमको परमिशन नहीं लेना है, क्योंकि हम किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं जा रहे हैं. 11 मार्च के लखनऊ के कार्यक्रम के लिए हमने 21 फरवरी को ही प्रक्रिया शुरू कर दिया था. इसकी परमिशन उन्हें देनी पड़ेगी. अगर वह परमिशन नहीं देंगे तो इसका अर्थ होगा कि ये गौ हत्या बंद नहीं करना चाहते. और गौ हत्या बंद करने की बात को रखने के लिए जगह भी नहीं देना चाहते. यह ज्यादा हो जाएगा. इतना नहीं गिरना चाहिए.

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