योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर और जापान दौरे से पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भगवा वस्त्र का पूरे विश्व में सम्मान है, लेकिन सिर्फ वेशभूषा से काम नहीं चलेगा. अगर वहां के लोग आचरण के बारे में जान गए तो क्या होगा. ऊपर से कुछ और और अंदर से कुछ और होगा तो यह चिंता की बात है.
आज तक से खास बातचीत में शंकराचार्य ने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष वींद्र पुरी महाराज के बयान और योगी सरकार के समर्थन पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि शास्त्र और परंपरा के अनुसार बात समझानी चाहिए. अगर धर्म के वेश में अधार्मिक लोग प्रवेश करेंगे तो स्पष्टता जरूरी है. उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कौन सच्चा साधु है और कौन नहीं.
उन्होंने कहा कि हम कोई दबाव नहीं डाल रहे हैं. सच बात निर्भीक होकर कही जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर शंकराचार्य कोई बात कह रहे हैं तो उसमें अगर- मगर करना उचित नहीं है. बटुकों के मुद्दे पर भी उन्होंने सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि एक महीने तक कोई बयान नहीं आया और जब उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने बयान दिया तब प्रतिक्रिया आई. इससे यह सवाल उठता है कि नेता महात्माओं को फॉलो करते हैं या महात्मा नेताओं को.
विदेश दौरे से पहले वेशभूषा और आचरण पर उठाए सवाल
रवींद्र पुरी महाराज के इस बयान पर कि सभी बड़े अखाड़े मुख्यमंत्री के साथ हैं, शंकराचार्य ने कहा कि हमने योगी आदित्यनाथ के सामने दो सवाल रखे हैं. इन सवालों का उत्तर दिया जाना चाहिए. सिर्फ यह कह देना कि हम उनके साथ हैं, पर्याप्त नहीं है. एजेंडा चलाने के आरोप पर उन्होंने कहा कि हां, वह सत्य और सनातन का एजेंडा चला रहे हैं. आदि शंकराचार्य ने भी सनातन धर्म के लिए चार पीठ स्थापित किए थे. अखाड़े धर्म के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए बनाए गए थे. अगर अखाड़े शिथिल पड़ते हैं तो शंकराचार्य को आगे आना पड़ेगा.
गौ रक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि गाय को राष्ट्र माता घोषित करने के लिए क्या कोई मुहूर्त निकाला जाएगा. उन्होंने पूछा कि किस शास्त्र में लिखा है कि रक्षा करने के लिए शुभ समय देखा जाए. एक क्षण की देरी से भी कई गायें कट सकती हैं. लखनऊ कूच के ऐलान और आचार्य प्रमोद कृष्णम के बयान पर उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ की पूछ बढ़े इससे उन्हें आपत्ति नहीं है. आपत्ति इस बात से है कि उम्मीदों के अनुसार काम नहीं हो रहा है. उन्होंने कहा कि लोगों को उम्मीद थी कि गेरुआ वस्त्र पहनने वाला व्यक्ति गाय की रक्षा करेगा. नौ साल बीत गए लेकिन स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं दिखा.
गौ रक्षा और राष्ट्र माता के मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग
इसके अलावा उन्होंने वाराणसी स्थित अपने आश्रम में एक बोर्ड लगाने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि बोर्ड के दो हिस्से होंगे. एक तरफ गौ हत्या का समर्थन करने वालों के नाम और तस्वीरें होंगी और दूसरी तरफ विरोध करने वालों के. इससे साफ हो जाएगा कि कौन किस पक्ष में है. उन्होंने कहा कि जब सत्य की बात उठती है तो स्पष्ट होना चाहिए कि कौन किसके साथ खड़ा है. जनता को भी बताया जाना चाहिए कि किन गुणों के आधार पर समर्थन दिया जा रहा है और वो गुण किस शास्त्र में वर्णित हैं.
योगी आदित्यनाथ से रखे दो सवालों के उत्तर की प्रतीक्षा
सीएम योगी के सिंगापुर और जापान दौरे पर उन्होंने फिर कहा कि वेशभूषा देखकर लोग प्रसन्न हो सकते हैं, लेकिन विद्वान लोग आचरण भी देखते हैं. उनके मन में कैसी प्रतिक्रिया होगी, यह सोचने की बात है. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात और बाद में उपमुख्यमंत्रियों की मुलाकात के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह शिष्टाचार का विषय है. जब कोई बात सार्वजनिक होती है तो उसका उत्तर दिया जाना चाहिए. शंकराचार्य के इन बयानों के बाद संत समाज और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है.
रोशन जायसवाल