संभल की जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली ने रमजान का महीना शुरू होते ही भारतीय पुरातत्व विभाग के मेरठ रेंज को पत्र भेजकर मस्जिद की रंगाई-पुताई और सजावट कराने की मांग की है. यह मस्जिद पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित इमारत है, इसलिए कमेटी ने एएसआई के सुपरविजन में ही कार्य कराने का अनुरोध किया है.
पिछले वर्ष 2025 में भी प्रशासन द्वारा अनुमति न मिलने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा था, जिसके बाद अदालत के आदेश पर एएसआई की देखरेख में ही पुताई संपन्न हुई थी. बारिश और धूल के कारण पिछले साल का काम खराब होने की वजह से इस साल पुन: मरम्मत की आवश्यकता जताई गई है.
हाईकोर्ट के आदेश का दिया हवाला
जामा मस्जिद को लेकर विवाद तब गहराया था जब यहां पूर्व में हरिहर मंदिर होने का दावा अदालत में किया गया. इसके बाद नवंबर 2024 में हुई हिंसा और 2025 में प्रशासन द्वारा रंगाई की अनुमति न दिए जाने पर मस्जिद कमेटी हाईकोर्ट पहुंची थी. हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने और एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर पुरातत्व विभाग को ही रंगाई-पुताई कराने का आदेश दिया था. इस बार भी कमेटी का तर्क है कि अदालत के पुराने निर्देशों के तहत एएसआई को ही यह जिम्मेदारी संभालनी चाहिए.
कमेटी ने एएसआई को लिखा आधिकारिक पत्र
मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली ने एएसआई के मेरठ रेंज के सुपरिंटेंडेंट को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि पिछले साल की गई सजावट और पुताई अब नष्ट हो चुकी है. पत्र में कहा गया है कि रमजान का पवित्र महीना शुरू हो चुका है, इसलिए विभाग जल्द से जल्द अपनी टीम भेजकर काम शुरू कराए. कमेटी चाहती है कि एएसआई के दिशा-निर्देशों और उनके सुपरविजन में ही सारा काम पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए.
जफर अली का बयान और आगे की रणनीति
सदर जफर अली का कहना है कि उन्होंने एएसआई से गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी समय से काम शुरू करने की अपील की है. उन्होंने भरोसा जताया कि पुरातत्व विभाग जिस तरह के निर्देश देगा, उन्हीं के आधार पर सजावट का कार्य कराया जाएगा. फिलहाल, मस्जिद कमेटी एएसआई के जवाब का इंतजार कर रही है ताकि इबादत के इस महीने में मस्जिद की स्थिति सुधारी जा सके.
अभिनव माथुर