समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज और सांसद पुष्पेंद्र सरोज का एक वीडियो वायरल हो रहा है. उन्होंने 14 अप्रैल को कौशांबी के मंझनपुर में आयोजित अंबेडकर जयंती कार्यक्रम के दौरान मंच पर पहनाई गई 'जय भीम' लिखी नीली टोपी उतार दी. सपा पीडीए की ओर से आयोजित इस समारोह में कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं को टोपी पहनाई थी, जिसे इंद्रजीत सरोज ने तुरंत हटा दिया और बेटे की टोपी भी उतरवा दी. इसके साथ ही उन्होंने नगर पालिका और जिला पंचायत में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला. उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार बनते ही दोषियों को जेल भेजा जाएगा.
टोपी उतारने पर सियासी घमासान
ओसा में आयोजित बाबा साहब की जयंती के मौके पर जब कार्यकर्ताओं ने इंद्रजीत सरोज और उनके बेटे पुष्पेंद्र को नीली टोपी पहनाई, तो नेता ने उसे तुरंत उतार दिया. वीडियो में दिख रहा है कि उन्होंने सांसद पुष्पेंद्र सरोज के सिर से भी टोपी हटवा दी.
इस व्यवहार ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को हैरान कर दिया और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. शोषितों और वंचितों की राजनीति का दावा करने वाली सपा के कद्दावर नेता के इस कदम पर अब सवाल उठ रहे हैं, हालांकि पार्टी ने इस पर अभी कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी है.
विरोधियों को 'भाला' मारने की चेतावनी
मंच से संबोधन के दौरान इंद्रजीत सरोज ने पुरानी कहावत "जो तोको कांटा बुवै, ताहि बोय तू फूल" को बदलकर नया नारा दिया. उन्होंने कहा, "जो तुमको कांटा बुवै, ओका बो तू भाला, वो भी क्या जाने साला, पड़ा किसी से पाला."
सरोज ने स्पष्ट किया कि वह अब फूल बोने वाले 'पुराने लोग' नहीं रहे. उन्होंने भ्रष्टाचार पर हमला बोलते हुए कहा कि वे अभी शांत रहकर विरोधियों का 'सजरा' लिख रहे हैं और समय आने पर उन्हें नानी याद दिला देंगे. उनके मुताबिक, लूट मचाने वाले जेल की सलाखों के पीछे होंगे.
सत्ता के परिवर्तन पर कटाक्ष
भाजपा के वर्तमान प्रभाव पर कटाक्ष करते हुए सरोज ने कहा कि यह 'जलजला' हमेशा नहीं रहेगा. उन्होंने दार्शनिक अंदाज में कहा कि जो पैदा हुआ है, उसे मरना ही होगा- चाहे वह भगवान हों या आम इंसान. उन्होंने जनता को धन्यवाद देते हुए कहा कि समर्थन का जो 'वृक्ष' उन्होंने लगाया था, वह अब बड़ा हो चुका है और समय आने पर सबको करारा जवाब मिलेगा. उनके इस आक्रामक तेवर ने जिले की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है.
अखिलेश कुमार