मारी छोरियां छोरों से कम हैं के...? सहारनपुर में पिता की 'सख्त' ट्रेनिंग से दंगल जीत रहीं दो सगी बहनें, अब ओलंपिक की तैयारी!

सहारनपुर की आरोही और उसकी बहन कुश्ती के अखाड़े में इतिहास रच रही हैं. पिता गजेंद्र तोमर की सख्त ट्रेनिंग के बदौलत दोनों बहनों ने अब तक 19 मेडल जीते हैं. पिता का अधूरा सपना पूरा करने के लक्ष्य के साथ ये बेटियां अब ओलंपिक में भारत को गोल्ड दिलाने की तैयारी में जुटी हैं.

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सहारनपुर की दो बहनों ने पहलवानी में नाम किया रोशन (Photo- ITG) सहारनपुर की दो बहनों ने पहलवानी में नाम किया रोशन (Photo- ITG)

राहुल कुमार

  • सहारनपुर ,
  • 18 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:00 PM IST

UP News: सहारनपुर में बेटियां अब सिर्फ सपने नहीं देख रहीं, बल्कि उन्हें सच करने की राह पर दौड़ रही हैं. साढ़े 13 साल की आरोही तोमर इसकी मिसाल हैं. 7वीं की छात्रा आरोही ने अयोध्या में आयोजित प्रदेश स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है. कम उम्र में ही वह दो स्टेट गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं. उन्होंने बताया कि वह पिछले 3-4 साल से लगातार प्रैक्टिस कर रही हैं और अब उनका सीधा लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है.

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आरोही ने बताया कि वह अब तक करीब 30 से ज्यादा प्रतियोगिताएं खेल चुकी हैं, जिनमें से लगभग 20 में जीत हासिल की है. उनकी ट्रेनिंग उनके पिता गजेंद्र सिंह तोमर खुद कराते हैं, साथ ही वह स्टेडियम में भी अभ्यास करती हैं. आरोही का कहना है कि उनके पिता का सपना था कि वह देश के लिए गोल्ड मेडल जीतें, लेकिन किसी कारण से वह ऐसा नहीं कर पाए, अब वही सपना वह अपनी बेटियों के जरिए पूरा करना चाहते हैं.

वहीं, आरोही के पिता गजेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी स्टेट गोल्ड मेडल जीत चुकी है और छोटी बेटी भी कुश्ती में लगातार मेहनत कर रही है और गोल्ड मेडल लेकर आई है. उन्होंने बताया कि बड़ी बेटी करीब 15-16 प्रतियोगिताएं जीत चुकी है, जबकि छोटी बेटी भी कम उम्र में बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है. गजेंद्र सिंह खुद भी पहलवान रहे हैं और अब बेटियों को ट्रेनिंग देकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं.

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गजेंद्र सिंह का कहना है कि वह नौकरी या किसी और चीज से ज्यादा इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि उनकी बेटियां देश का नाम रोशन करें. उन्होंने बताया कि हाल ही में वाराणसी में हुए एक मुकाबले में उनकी बेटी सिर्फ एक नंबर से नेशनल खेलने से चूक गई, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में उनकी बेटियां जरूर विदेश जाकर भारत के लिए मेडल जीतेंगी. सहारनपुर की ये बेटियां अब जिले के लिए गर्व की नई पहचान बनती जा रही हैं.

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