'भारत में परिवार व्यवस्था स्नेह पर आधारित है, अनुबंधों पर नहीं', गोरखपुर में बोले मोहन भागवत

गोरखपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुटुंब स्नेह मिलन कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था अपनत्व और भावनात्मक जुड़ाव पर आधारित है. परिवार समाज की बुनियादी इकाई है, जो संस्कार, सामाजिक शिक्षा और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाती है.

Advertisement
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत. (Photo: PTI) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • गोरखपुर,
  • 16 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:46 PM IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि भारत में परिवार की नींव स्नेह, अपनत्व और भावनात्मक जुड़ाव पर टिकी होती है. उन्होंने कहा कि बच्चे के जन्म के साथ ही परिवार में संबंधों का ताना-बाना मजबूत होता है और यही समाज की बुनियादी इकाई है. भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के तहत गोरखपुर विभाग द्वारा तारामंडल स्थित बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित ‘कुटुंब स्नेह मिलन’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.

Advertisement

उन्होंने कहा कि परिवार केवल एक पुरुष और महिला के एक छत के नीचे रहने से नहीं बनता, बल्कि यह भावनात्मक संबंधों से आकार लेता है, जो अगली पीढ़ी को संस्कार और सामाजिक जीवन की शिक्षा देता है. संघ प्रमुख ने कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था विशिष्ट है, जहां संबंध लेन-देन नहीं बल्कि अपनत्व पर आधारित होते हैं. कई पश्चिमी देशों में संबंध अनुबंधात्मक (Contractual) होते हैं, जबकि भारत में बच्चा परिवार में जन्म लेकर उसी में विकसित होता है. परिवार ही आजीविका, व्यवसाय, बचत और राष्ट्रीय संपदा का आधार है.

यह भी पढ़ें: 'लेन-देन के संबंध नहीं, अपनत्व है भारत की पहचान', गोरखपुर में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि देश के आह्वान पर लोगों ने स्वेच्छा से सोना और कीमती वस्तुएं दान कीं, जो सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों की मजबूती दर्शाता है. उन्होंने कहा कि परिवार व्यक्ति को अपने से आगे सोचने की सीख देता है और सामाजिक शिक्षा, आर्थिक गतिविधि व सांस्कृतिक परंपराएं परिवार के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती हैं. भागवत ने कहा कि मां परिवार की धुरी होती है और भावी पीढ़ी के निर्माण में उसकी भूमिका निर्णायक है. 

Advertisement

उन्होंने विवाह को कर्तव्य बताया, न कि अनुबंध, और कहा कि घर में मूल्यों की कमी से सामाजिक समस्याएं बढ़ सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि परिवारों के सहयोग के बिना संघ का विस्तार संभव नहीं था. पर्यावरण संरक्षण, जल बचत, प्लास्टिक उपयोग में कमी, मातृभाषा के प्रयोग और स्वदेशी को अपनाने पर जोर देते हुए उन्होंने परिवारों से सप्ताह में एक दिन सामूहिक संवाद करने का आह्वान किया. कार्यक्रम में गोरखपुर की शहरी व ग्रामीण इकाइयों के कार्यकर्ता और उनके परिवारजन मौजूद रहे. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement