अखिलेश के जेल भेजने वाले बयान पर रामभद्राचार्य ने साधी चुप्पी, सवाल सुनते ही बंद कर लिया कार का शीशा

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने जगतगुरु रामभद्राचार्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमला बोलते हुए पुराने मुकदमों की याद दिलाई थी. अखिलेश ने रामभद्राचार्य को जेल भेजने तक की बात कह दी थी, जिस पर अब जौनपुर पहुंचे धर्मगुरु ने प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया.

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जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य (फाइल फोटो) जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य (फाइल फोटो)

आदित्य प्रकाश भारद्वाज

  • जौनपुर ,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जगतगुरु रामभद्राचार्य पर दर्ज '420' के पुराने मुकदमे को लेकर तीखी टिप्पणी की थी. अखिलेश ने कहा था कि सपा सरकार के दौरान रामभद्राचार्य पर दर्ज मुकदमे को वापस लेना उनकी बड़ी भूल थी. उस वक्त उनको जेल भेजा जाना चाहिए था. इसको लेकर जब रामभद्राचार्य से सवाल पूछा गया तो वह बात टालते नजर आए. 

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दरअसल, बीते गुरुवार को रामभद्राचार्य जौनपुर के शीतला चौकिया धाम के पास एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे. इस दौरान मीडिया ने उनसे अखिलेश यादव के बयान पर सवाल पूछा. जिसपर रामभद्राचार्य ने इन बातों को टालते हुए कहा कि यह सब बातें मत कीजिए और उनके सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार का शीशा बंद कर दिया. 

आपको बता दें कि रामभद्राचार्य इन दिनों स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के निशाने पर हैं.  वहीं, अखिलेश यादव अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में खड़े हैं. वह अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर योगी सरकार पर हमलावर हैं, जबकि रामभद्राचार्य के खिलाफ बोल रहे हैं. 

ये भी पढ़ें- 'रामभद्राचार्य पर मुकदमा वापस लेकर भूल कर दी...', ऐसा क्यों बोले अखिलेश

अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि सिर्फ विशिष्ट वस्त्र पहनने या कान छिदवाने से कोई योगी नहीं बन जाता. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव से पहले माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है. साधु-संतों को अपमानित कर रही है. 

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रामभद्राचार्य की चुप्पी और जौनपुर का दौरा

इन सबके बीच जौनपुर में एक गृह प्रवेश कार्यक्रम में हेलीकॉप्टर से पहुंचे रामभद्राचार्य ने राजनीतिक विवादों से दूरी बनाए रखी. अखिलेश यादव के 'जेल भेजने' वाले बयान पर पूछे गए सवाल को उन्होंने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया. अखिलेश ने दावा किया था कि रामभद्राचार्य पर दर्ज जालसाजी का मुकदमा वापस नहीं होना चाहिए था. इधर, जौनपुर में रामभद्राचार्य के समर्थकों और सुरक्षा घेरे ने उन्हें मीडिया के तीखे सवालों से बचाए रखा.इस बयानबाजी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में धर्म और सत्ता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है.

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