'अयोध्या की मर्यादा से खिलवाड़ नहीं सहेंगे...', राम मंदिर में नमाज़ पढ़ने की कोशिश पर बोले इक़बाल अंसारी

अयोध्या के राम मंदिर परिसर में नमाज़ पढ़ने की कोशिश पर इक़बाल अंसारी ने कड़ी निंदा की है. उन्होंने इसे धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन और माहौल खराब करने वाला कदम बताया. अंसारी ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम समुदाय ने संयम दिखाते हुए राम मंदिर को सम्मान दिया है.

Advertisement
इक़बाल अंसारी ने कहा कि चंद लोगों की हरकत से हिंदू-मुस्लिम माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो रही (Photo: ITG/Maneesh Agnihotri/PTI) इक़बाल अंसारी ने कहा कि चंद लोगों की हरकत से हिंदू-मुस्लिम माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो रही (Photo: ITG/Maneesh Agnihotri/PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:13 PM IST

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर परिसर में नमाज़ पढ़ने की कोशिश को लेकर सियासी और सामाजिक माहौल में लगातार प्रतिक्रियांए सामने आ रही हैं. इस घटना पर बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार इक़बाल अंसारी ने गहरी नाराज़गी व्यक्त की और इसे अयोध्या की धार्मिक मर्यादा का उपहास बताया.

इक़बाल अंसारी ने साफ किया कि अयोध्या सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की नगरी है जहां मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे सभी धर्मों के लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए बनाए गए हैं. राम मंदिर हिंदू समाज की आस्था का केंद्र है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूरे देश के मुसलमानों ने इसे स्वीकार कर सम्मान दिया है.

Advertisement

उन्होंने बताया कि अदालत के फैसले के समय मुस्लिम समुदाय ने संयम और समझदारी दिखाई थी, इसलिए राम मंदिर में नमाज़ पढ़ने की कोशिश न केवल अनुचित है, बल्कि इससे समाज में गलत संदेश भी जाता है. इक़बाल अंसारी ने इसे जानबूझकर माहौल खराब करने वाला कदम बताया और कहा कि अयोध्या में मुसलमानों के लिए इबादतगाह पर्याप्त हैं, जहां नमाज़ पढ़ी जाती है.

यह भी पढ़ें: अयोध्या: राम मंदिर की सुरक्षा में सेंध, नमाज पढ़ते हिरासत में लिया गया कश्मीरी शख्स

इक़बाल अंसारी ने सरकार और प्रशासन से आग्रह किया कि ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति अयोध्या की शांति और सौहार्द को बिगाड़ने का प्रयास न कर सके. 

उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना से केवल हिंदू समाज ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज भी आहत हुआ है, क्योंकि मुस्लिम समाज ने हमेशा राम मंदिर और कोर्ट के फैसले का सम्मान किया है.

Advertisement

आखिर में उन्होंने जोर देकर कहा कि अयोध्या की असली पहचान आपसी सम्मान और भाईचारे की नगरी के रूप में है, और इसे किसी भी सूरत में खराब नहीं होने दिया जाना चाहिए. समाज के सभी वर्गों को मिलजुलकर शांति बनाए रखनी होगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement