प्रयागराज जंक्शन: स्टेशन के बाहर स्थित 'संगमरमर वाली मस्जिद' को रेलवे का नोटिस, 27 अप्रैल तक हटाने का अल्टीमेटम

संगम नगरी प्रयागराज में रेलवे स्टेशन के कायाकल्प की तैयारी के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है. उत्तर मध्य रेलवे ने स्टेशन के बाहर सिटी साइड स्थित एक मस्जिद को अवैध अतिक्रमण बताते हुए उसे हटाने का नोटिस जारी किया है, जिसके बाद मस्जिद कमेटी और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है.

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'संगमरमर वाली मस्जिद' को रेलवे का नोटिस (Photo- ITG) 'संगमरमर वाली मस्जिद' को रेलवे का नोटिस (Photo- ITG)

पंकज श्रीवास्तव

  • प्रयागराज ,
  • 22 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:00 PM IST

उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने प्रयागराज जंक्शन के सिटी साइड सर्कुलेटिंग एरिया में स्थित मस्जिद को हटाने के लिए नोटिस जारी किया है। रेलवे का आरोप है कि यह मस्जिद रेलवे की भूमि पर अनाधिकृत रूप से कब्जा करके बनाई गई है. स्टेशन के पुनर्निर्माण का कार्य 15 अप्रैल से शुरू होना है, इसलिए रेलवे ने मस्जिद कमेटी को 27 अप्रैल तक बिल्डिंग खाली करने का समय दिया है. नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय तक जगह खाली नहीं की गई, तो प्रशासन मस्जिद को तोड़कर निर्माण कार्य आगे बढ़ाएगा और किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी कमेटी की होगी. सीनियर सेक्शन इंजीनियर द्वारा जारी इस नोटिस ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है.

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मस्जिद कमेटी का अपना दावा

रेलवे की इस कार्रवाई पर मस्जिद कमेटी ने कड़ा ऐतराज जताया है. कमेटी का कहना है कि यह मस्जिद यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में बाकायदा दर्ज है. 

जानकारों के मुताबिक, इस पुरानी कच्ची मस्जिद को तोड़कर 22 नवंबर 1961 को पक्का बनाया गया था, जिसका उद्घाटन तत्कालीन उप रेलवे मंत्री मेजर जनरल शाहनवाज खान ने किया था. बाहर संगमरमर लगे होने के कारण इसे 'संगमरमर वाली मस्जिद' के नाम से पहचाना जाता है. कमेटी का दावा है कि यह ढांचा ऐतिहासिक है और इसे अतिक्रमण कहना गलत है.

हाईकोर्ट जाने की तैयारी

नोटिस मिलने के बाद अब यह कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ रहा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता मोहम्मद हन्ज़ला फारुकी ने बताया कि मस्जिद कमेटी रेलवे के इस नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है. 

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कमेटी के सदस्यों का कहना है कि वे कानूनी दस्तावेजों के साथ अपनी बात रखेंगे. रेलवे के सख्त रुख और कमेटी की कानूनी तैयारियों के बीच अब सबकी नजरें 27 अप्रैल की समयसीमा पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है.

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