यूपी के मुरादाबाद से पकड़ा गया संदिग्ध ISIS आतंकी हारिश अली अब सिर्फ एक गिरफ्तार शख्स नहीं, बल्कि यूपी के शैक्षणिक परिसरों में छिपे एक खतरनाक नेटवर्क की चेतावनी बनकर सामने आया है. एटीएस की जांच में खुलासा हुआ है कि हारिश अपने बीडीएस के सहपाठियों तक कट्टरपंथी सोच पहुंचाने में जुटा था. उसके मोबाइल और लैपटॉप से मिले इनपुट ने जांच एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. पढ़ाई के नाम पर कैंपस में दाखिल यह जहर अब कई छात्रों तक पहुंचा या नहीं, यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है.
हारिश के डिजिटल डिवाइसेज़ ने ऐसे सुराग उगले हैं, जिनसे साफ संकेत मिला है कि वह सिर्फ ऑनलाइन कट्टर सामग्री देखने तक सीमित नहीं था, बल्कि बाकायदा अपने साथ पढ़ने वाले युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था. एटीएस ने उसके कई सहपाठियों को तलब कर पूछताछ शुरू कर दी है. यानी मामला अब एक व्यक्ति की गिरफ्तारी से निकलकर संभावित ब्रेनवॉशिंग नेटवर्क की दिशा में बढ़ चुका है.
‘अल इत्तिहाद’ के नाम पर जाल!
सूत्रों के मुताबिक हारिश ने ‘अल इत्तिहाद मीडिया फाउंडेशन’ नाम से अपना एक अलग ग्रुप बना रखा था, जिसके जरिए वह मुरादाबाद ही नहीं, सहारनपुर, संभल, अमरोहा, बरेली समेत एक दर्जन से ज्यादा जिलों के युवाओं को जोड़ रहा था. जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह कोई सामान्य चैट ग्रुप नहीं, बल्कि दिमागी जहर फैलाने का प्लेटफॉर्म था, जहां युवाओं को जिहादी गतिविधियों के लिए उकसाया जा रहा था. अब एटीएस यह खंगाल रही है कि यह नेटवर्क कितनी गहराई तक फैला और कितने चेहरे अभी पर्दे के पीछे हैं.
फिलहाल जांच में दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े कथित डॉक्टर मॉड्यूल से हारिश का सीधा लिंक नहीं मिला है, लेकिन एटीएस की शंका और भी ज्यादा गंभीर है. एजेंसी को अंदेशा है कि जिस तरह जैश-ए-मोहम्मद ने पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स के मॉड्यूल तैयार किए, उसी तर्ज पर ISIS भी ‘डॉक्टर मॉड्यूल’ खड़ा करने की कोशिश में हो सकता है. यही वजह है कि इस पूरे मामले को सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं और भी एंगल देखे जा रहे हैं.
आशीष श्रीवास्तव