बहराइच: प्रसव पीड़ा नहीं हुई बर्दाश्त तो खुद ही ब्लेड से फाड़ लिया पेट, बाहर आ गईं अंतड़ियां; आखिर में बच्ची को दिया जन्म

यूपी के बहराइच में एक गर्भवती महिला ने असहनीय प्रसव पीड़ा से तंग आकर खुद ही ब्लेड से अपना पेट फाड़ दिया. इस भयावह कदम के बाद महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया, लेकिन गंभीर हालत के कारण उसे लखनऊ रेफर करना पड़ा है.

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डिलीवरी के बाद महिला का इलाज जारी, बच्चा स्वस्थ (Photo- Screengrab) डिलीवरी के बाद महिला का इलाज जारी, बच्चा स्वस्थ (Photo- Screengrab)

राम बरन चौधरी

  • बहराइच ,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:56 PM IST

Uttar Pradesh News: बहराइच जिले के थाना बौंडी क्षेत्र स्थित नंदवल गांव में 32 वर्षीय गर्भवती महिला ननकई ने प्रसव पीड़ा के दौरान खुद ही चाकू नुमा ब्लेड से अपना पेट फाड़ लिया. पति की मौत के बाद अकेले रह रही इस महिला के घर पर घटना के वक्त कोई मौजूद नहीं था. दर्द बर्दाश्त न होने पर उसने बच्चे को जन्म देने के लिए यह आत्मघाती कदम उठाया, जिससे उसकी अंतड़ियां बाहर आ गईं. हालांकि, बाद में उसने नॉर्मल डिलीवरी से एक बच्ची को जन्म दिया. गंभीर हालत में उसे बहराइच मेडिकल कॉलेज से लखनऊ के केजीएमसी (KGMC) ट्रामा सेंटर रेफर किया गया है.

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दर्द की इंतहा और खौफनाक कदम

मृतक ननकऊ की पत्नी ननकई के पहले से पांच बच्चे हैं. कल जब उसे भीषण प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तो घर में किसी सदस्य के न होने पर वह आपा खो बैठी. अस्पताल में भर्ती ननकई ने बताया कि दर्द इतना असहनीय था कि उसने घर में रखे धारदार औजार से खुद ही अपना पेट चीर दिया. चीख-पुकार सुनकर जब पड़ोसी पहुंचे, तब तक महिला का पेट बुरी तरह कट चुका था और अंतड़ियां बाहर लटक रही थीं. इसी बीच उसने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया.

मां और डॉक्टर की जुबानी

महिला की मां मुन्नी देवी ने बताया कि दर्द बढ़ने पर वहां कोई दूसरी महिला मौजूद नहीं थी, जिसके कारण ननकई ने यह कदम उठाया. वहीं, बहराइच मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर मदन मोहन त्रिपाठी ने बताया कि जब महिला अस्पताल लाई गई, तो बच्चा जन्म ले चुका था. महिला के पेट पर गहरा घाव था और उसकी आंतें बाहर निकली हुई थीं. प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत लखनऊ के लिए रेफर कर दिया.

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अकेलेपन और अभाव की कहानी

ननकई के पति की कई वर्ष पहले मौत हो चुकी है और वह अपने पांच बच्चों के साथ संघर्ष कर रही थी. स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फखरपुर के डॉक्टरों ने भी माना कि मामला बेहद गंभीर है. ग्रामीणों के अनुसार, समय पर सहायता न मिल पाने और प्रसव के डर व दर्द ने महिला को इतना मजबूर कर दिया कि उसने अपनी जान की परवाह किए बिना खुद का पेट फाड़ लिया. फिलहाल बच्ची सुरक्षित है और महिला का लखनऊ में इलाज जारी है.

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