प्रयागराज में संगम की रेती पर लगने वाले माघ मेले में साधु-संतों के रूप के अलावा कई ऐसे चेहरे भी दिखते हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान के नाम समर्पित कर दिया है. इन्हीं में से एक हैं 65 वर्षीय स्वामी अमोहा नंद महाराज. वे स्कूटी पर मेला क्षेत्र में घूमते नजर आते हैं. उनके सिर पर केसरिया रंग का हेलमेट है, जिसमें भगवान हनुमान जी, राम मंदिर और अनेक झंडियों की तस्वीरें लगी हैं. हनुमान जी से उनका विशेष लगाव है.
स्वामी जी बताते हैं कि मैं विवेकानंद आश्रम का सन्यासी हूं. आश्रम आने से पहले भी बचपन से हनुमान जी का भक्त था. इसलिए मुझे केसरिया हेलमेट चाहिए था. पहले ब्राउन कलर का हेलमेट था, लेकिन नया केसरिया हेलमेट देखा तो खुशी हुई. इसमें हनुमान जी, राम जी, अयोध्या राम मंदिर और झंडियां सब लगी हैं. दुकानदार सिख था, इसलिए राम जी की तस्वीर पीछे धागे से बंधी रखी थी.
संत की गाड़ी होनी चाहिए आम आदमी से अलग
स्वामी जी कहते हैं कि संत की गाड़ी आम आदमी से अलग होना चाहिए. हमारा आश्रम हनुमान जी का है. यहां सुबह पूजा और शाम को आरती होती है, जो मैं ही करता हूं. इसलिए स्कूटर पर हनुमान जी आश्रम का चिन्ह लगाया है. साथ ही गंगाजल का डिब्बा भी रखा है. मैं शिव जी का भी भक्त हूं, गंगाजल भरकर शिव जी को चढ़ाने ले जाता हूं.
स्वामी राममोहन महाराज जमींदार परिवार के बड़े बेटे हैं. वे बताते हैं कि बीए में हिंदी ऑनर्स पढ़ते समय गौतम बुद्ध जी को पढ़ा था. उनके जीवन से प्रेरित होकर साधु जीवन जीनने की इच्छा हुई. साधु बनकर मनुष्य जीवन का लक्ष्य प्राप्त करना मेरा उद्देश्य है. पढ़ाई के बाद विवेकानंद आश्रम चला गया. आश्रम अविवाहित और 26 वर्ष तक के युवाओं को ही लेता है. गौतम बुद्ध राजकुमार थे, उनके पास पत्नी-बच्चे थे, फिर भी त्याग किया. मैं तो अविवाहित था.
स्वामी राममोह महाराज ने बताया कि आश्रम में सुबह 5 बजे पूजा शुरू होती है, जो 9 से 10 बजे तक चलती है. जबकि शाम 6:30 बजे आरती होती है. स्वामी जी कहते हैं कि रामकृष्ण मिशन से प्रेरित होकर मैं यह जीवन जी रहा हूं.
आनंद राज