कानपुर: 'दिलीप डॉक्टर साहब के बगल में...' पर्ची में लिखी यह लाइन, 357 दिन और सौ डॉक्टरों से पूछताछ, ऐसे खुला ब्लाइंड मर्डर केस

कानपुर पुलिस ने हत्या की एक ऐसी गुत्थी सुलझाई है जिसकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. पुलिस शव के पास मिली एक पर्ची के सहारे आखिरकार 357 दिनों बाद हत्यारे तक पहुंच ही गई और उसे गिरफ्तार कर लिया. ये हत्या 50 हजार रुपये की रकम को लेकर की गई थी.

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एक साल बाद हत्यारे तक पहुंची पुलिस एक साल बाद हत्यारे तक पहुंची पुलिस

रंजय सिंह

  • कानपुर,
  • 08 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 11:16 AM IST

कानपुर में पुलिस ने हत्या की एक ऐसी गुत्थी सुलझाई है किसी फिल्म कहानी से कम नहीं है. पुलिस सिर्फ एक पर्ची के जरिए कातिल तक पहुंच गई. दरअसल एक साल पहले कानपुर में एक शख्स की हत्या हो गई थी और पुलिस उसकी पहचान भी नहीं कर पा रही थी. 

पुलिस जब शव के पास पहुंची तो उसे कुछ नहीं मिला. बस पास में एक पर्ची पड़ी थी जिस पर लिखा था 'दिलीप डॉक्टर साहब के बगल में बांदा' बस पुलिस ने इस पर्ची के जरिए हत्या के इस केस को सुलझा लिया.

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नवंबर 2022 में हुई थी हत्या

दरअसल कानपुर में 15 नवंबर 2022 को सैनपारा इलाके में एक अज्ञात बॉडी मिली थी. बॉडी की हालत कुछ ऐसी हो चुकी थी कि उसकी पहचान भी नहीं हो पा रही थी. पुलिस ने पूरे शहर में पता लगाया लेकिन गुमशुदगी का कोई भी ऐसा मामला दर्ज नहीं हुआ था जिससे उस व्यक्ति तक पहुंच पाती. 

पुलिस को शव के पास से ना कोई परिचय पत्र मिला था और ना कोई सामान. सैकड़ों लोगों ने उस बॉडी को देखा लेकिन कोई भी नहीं बता पाया कि मृतक व्यक्ति कौन है.  बॉडी के पास एक छोटी सी पर्ची जरूर मिली थी जिसमें लिखा था 'दिलीप डॉक्टर साहब के बगल में बांदा.'

100 से ज्यादा डॉक्टरों से पूछताछ

घाटमपुर के एसीपी अशोक शुक्ला ने बताया कि मैं खुद मौके पर गया था, मैंने जांच की तो एक भी सबूत न पाकर मैंने उस पर्ची के सहारे ही कातिलों को खोज निकालने का फैसला किया. हमने कई टीमें गठित की. सबसे बड़ा सवाल ये था कि मृतक की पहचान कैसे की जाए.

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अधिकारी ने कहा, शव के पास जो पर्ची मिली थी उसमें बांदा के किसी दिलीप का जिक्र था जो डॉक्टर के बगल में रहता था, लेकिन कौन सा डॉक्टर इसकी जानकारी नहीं थी. पुलिस ने बांदा में डॉक्टरों से जा जाकर पूछताछ करनी शुरू कर दी.

बांदा में लगभग 100 से ज्यादा डॉक्टरों से एक-एक करके पूछताछ की गई कि आपके बगल में कोई दिलीप रहता है लेकिन कहीं से कुछ पता नहीं चला. इसी दौरान पुलिस को तब सफलता मिली जब एक दिन अतर्रा के बबेरू रोड पर रहने वाले एक डॉक्टर के यहां हमारी टीम दिलीप के बारे में पता कर रही थी. 

दुकानदार से मिला सुराग

वहां पर बैठे एक व्यक्ति ने अपना नाम राम प्रसाद बताया और कहा कि उसकी डॉक्टर साहब के बगल में दुकान थी. उसने कहा मेरे भाई का नाम दिलीप था लेकिन वह कुछ दिनों से कहीं गया है उसका पता नहीं चल रहा है. 

पुलिस ने उससे पूछा कि इसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट क्यों नहीं लिखाई तो दुकानदार ने कहा कि वह अक्सर इस तरह चला जाता था और लौट के आ जाता था जिस वजह से रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई.

इसके बाद जब पुलिस ने उसकी बॉडी की तस्वीर दिखाई तो दुकानदार ने  कहा कि यह उसका भाई दिलीप ही हैं. अब शव की पहचान तो हो गई थी लेकिन हत्यारे का पता लगाना अब भी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई थी. 

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ऐसे पकड़ा गया हत्यारा

पुलिस को इसी दौरान पूछताछ में पता चला कि दिलीप की शिव शंकर नाम के व्यक्ति से बड़ी अच्छी दोस्ती थी. दिलीप ने शिव शंकर को 50000 रुपये उधार भी दिया था. पुलिस ने शिव शंकर से पूछताछ की तो उसने पैसों की बात स्वीकार की लेकिन हत्या से इनकार कर दिया.

फिर पुलिस को शिव शंकर के भाई सुशील का पता चला. पुलिस को उस पर शक हो गया जिसके बाद 15 नवंबर 2022 की उसकी मोबाइल लोकेशन निकलवाई गई.  उसमें सुशील का नंबर 14 तारीख की रात में उसी इलाके में पाया गया जहां दिलीप का शव मिला था. इसके बाद पुलिस को पता चला कि घटना वाले दिन इन दोनों भाई के साथ दिलीप को देखा गया था.

पुलिस ने मंगलवार को कानपुर में दोनों भाई शिवशंकर और सुशील को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में दोनों आरोपियों ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि 50000 रुपये ना देना पड़े इसलिए उन्होंने दिलीप की हत्या कर दी थी. किसी को शक ना हो इसलिए घूमने के बहाने कानपुर लाकर उन्होंने उसका कत्ल किया था.

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