बीते दिनों हुई हिंसक झड़पों के बाद अब नोएडा में शांति लौटती दिख रही है, लेकिन पुलिस का एक्शन और तेज हो गया है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि स्थिति पूरी तरह कंट्रोल में है, लेकिन हिंसा की आग भड़काने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. पुलिस ने अब तक इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 396 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है.
इतना ही नहीं, पुलिस ने सावधानी बरतते हुए 150 से ज्यादा लोगों पर निरोधात्मक (Preventive Arrest) कार्रवाई की है. इसका मतलब है कि पुलिस ने शक के आधार पर उन लोगों को पहले ही पकड़ लिया है जिनसे दोबारा माहौल बिगड़ने का खतरा था. साथ ही, उपद्रव करने वालों के खिलाफ चालान की कार्रवाई भी की जा रही है. अब तक इस पूरे मामले में 7 अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज हो चुकी हैं.
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि स्थिति पूरी तरह कंट्रोल में है, लेकिन हिंसा की आग भड़काने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा. डीजीपी राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद और एडीजी अमिताभ यश खुद इस पूरे मामले की कमान संभाले हुए हैं और पुलिस मुख्यालय से पल-पल की मॉनिटरिंग की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, कानून तोड़ने वालों और साजिश रचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
बाहरी ताकतों ने रची साजिश?
एसटीएफ (STF) इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और उसके हाथ कुछ ऐसे सुराग लगे हैं, जिनसे पता चलता है कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई थी. जांच में सामने आ रहा है कि इस बवाल के पीछे दिल्ली के कुछ संगठनों का हाथ है. सूत्रों का कहना है कि कुछ बाहरी गुटों ने पूरी प्लानिंग के साथ मजदूरों को भड़काया और उन्हें हिंसा के लिए उकसाया.अब पुलिस की डिजिटल सेल व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को खंगाल रही है. जो लोग भड़काऊ पोस्ट डाल रहे थे या अफवाह फैला रहे थे, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि इंटरनेट पर फैलाई गई गलत जानकारियों की वजह से ही स्थिति इतनी बिगड़ गई थी.
वहीं दूसरी ओर, हालात सुधारने के लिए सरकार की हाईपावर कमेटी नोएडा में ही मौजूद है. यह कमेटी श्रमिक संगठनों और फैक्ट्रियों के मालिकों के साथ लगातार बैठकें कर रही है. फिलहाल, नोएडा भेजी गई हाईपावर कमेटी ने श्रमिकों और उद्यमियों के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू कर दिया है. अच्छी बात यह है कि मजदूरों के हित में कई बड़े फैसले भी लिए गए हैं ताकि उनकी जायज शिकायतों का समाधान हो सके. वरिष्ठ अधिकारी लगातार ग्राउंड जीरो पर रहकर लोगों से संवाद कर रहे हैं. प्रशासन की कोशिश यही है कि बातचीत के जरिए इस विवाद को हमेशा के लिए सुलझा लिया जाए.
आशीष श्रीवास्तव