Jewar Airport बना अभेद्य किला... 10 IPS अफसर और 7000 जवान तैनात, PM मोदी करेंगे 28 मार्च को उद्घाटन

Jewar Airport Ready: उत्तर प्रदेश के जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट न सिर्फ भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा, बल्कि यह यूपी की अर्थव्यवस्था का 'पावर हाउस' बनने जा रहा है. 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मेगा प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे.

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जेवर एयरपोर्ट पर बनारस के घाटों की तर्ज पर बना टर्मिनल.(Photo:Screengrab) जेवर एयरपोर्ट पर बनारस के घाटों की तर्ज पर बना टर्मिनल.(Photo:Screengrab)

अरुण त्यागी

  • नोएडा,
  • 26 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:10 PM IST

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) उद्घाटन के लिए पूरी तरह तैयार है. 28 मार्च को प्रधानमंत्री इसका लोकार्पण करेंगे और एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे, जिसमें लगभग 1 लाख लोगों के जुटने की उम्मीद है. पहले चरण में यह एयरपोर्ट एक रनवे के साथ अपनी परिचालन क्षमता शुरू करेगा.
 
एयरपोर्ट के टर्मिनल को बनारस के घाटों की तर्ज पर डिजाइन किया गया है, जो आधुनिकता के साथ भारतीय संस्कृति का अनूठा उदाहरण पेश करता है. सुरक्षा के लिहाज से इसे किले में तब्दील कर दिया गया है.

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तकरीबन 7000 पुलिसकर्मी, 10 IPS अधिकारी, 10 PAC की टीमें और 2 RAF की टीमें तैनात की गई हैं. वहीं, CISF और SPG की टीमें प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर मुस्तैद हैं.

UP की इकोनॉमी का 'इंजन'
UPDF के अध्यक्ष CA पंकज जायसवाल के अनुसार, यह एयरपोर्ट यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभाएगा. पूरी क्षमता से संचालन शुरू होने पर राज्य की GDP में 1% से अधिक की वृद्धि संभव है.

उन्होंने बताया कि सालाना 10 लाख टन कार्गो संभालने की क्षमता से MSME और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को वैश्विक पंख मिलेंगे. जल्दी खराब होने वाले फल, सब्जी, फूल सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचेंगे, जिससे किसानों की आय 20-30% बढ़ सकती है.

रोजगार का 'पावर हाउस'
जेवर एयरपोर्ट केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि रोजगार का सृजन केंद्र होगा. शुरुआती 5 वर्षों में एयरपोर्ट संचालन, सुरक्षा और रिटेल में 50 हजार से अधिक नौकरियां मिलेंगी. होटल, पर्यटन, परिवहन और MSME सेक्टर के जरिए लंबे समय में 40-50 लाख लोगों को काम मिलेगा.

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रियल एस्टेट और उद्योगों में उछाल
एयरपोर्ट के साथ ही यमुना एक्सप्रेसवे, बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा-वृंदावन तक औद्योगिक गलियारे विकसित होंगे. इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल निर्माण और फूड प्रोसेसिंग जैसे उद्योगों को सीधे वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी. यह मेगा प्रोजेक्ट नोएडा और ग्रेटर नोएडा को दुनिया के सबसे पसंदीदा निवेश केंद्रों में तब्दील कर देगा.

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