नोएडा के सेक्टर-150 में हुआ हादसा अब सिस्टम, लापरवाही और जिम्मेदारियों से भागते अधिकारियों पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर चुका है. 30 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में फंसी एक कार, अंदर जिंदा फंसा होनहार इंजीनियर और बाहर खड़े तीन विभागों के लगभग 80 कर्मचारियों के साथ एक बेबस पिता. इन सबके बावजूद युवराज की जान नहीं बच सकी. यही सवाल अब शासन से लेकर लोगों तक को झकझोर रहा है कि जब मौके पर इतने लोग मौजूद थे, तो आखिर दो घंटे तक मदद क्यों नहीं मिल पाई?
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया. एडीजी स्तर के अधिकारी भानु भास्कर के नेतृत्व में SIT की टीम नोएडा पहुंच चुकी है और प्राधिकरण, पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ से जुड़े अफसरों से अलग-अलग स्तर पर पूछताछ कर रही है.
प्राधिकरण में मैराथन मीटिंग, फिर मौके का निरीक्षण
SIT टीम ने सबसे पहले नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों के साथ लंबी बैठक की. इस बैठक में सेक्टर-150 के विकास कार्यों, निर्माणाधीन परियोजनाओं, खुले गड्ढों, नालों की सुरक्षा और बैरिकेडिंग से जुड़े दस्तावेज खंगाले गए. मीटिंग के बाद SIT की टीम सीधे घटनास्थल के लिए रवाना हुई, ताकि जमीनी हकीकत को अपनी आंखों से देखा जा सके. एडीजी भानु भास्कर ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि अधिकारियों से गहन पूछताछ की गई है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जांच के दायरे में कुछ और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिर सकती है.
50 फुट गहरा गड्ढा, न बैरिकेडिंग न चेतावनी
यह हादसा ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित टी-प्वाइंट पर हुआ, जहां एमजेड विशटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्लॉट के पास पहले से करीब 50 फुट गहरा गड्ढा खोदा गया था. देर रात घने कोहरे में युवराज की ग्रैंड विटारा कार नाले की दीवार तोड़ते हुए पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी. सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इस गड्ढे के आसपास न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग थी, न रिफ्लेक्टर, न ही कोई चेतावनी बोर्ड. सेक्टर-150 जैसे पॉश इलाके में ऐसी लापरवाही ने इस गड्ढे को मौत का जाल बना दिया.
बचाओ… बचाओ… की आवाज और सिस्टम की खामोशी
हादसे की सूचना मिलते ही पिता ने डायल-112 पर कॉल किया. कुछ ही देर में नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची. इसके बाद फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीमें भी आ गईं. कुल मिलाकर करीब 80 कर्मचारी मौके पर मौजूद थे, लेकिन कोई भी पानी में उतरने को तैयार नहीं हुआ. अधिकारियों का तर्क था कि पानी बेहद ठंडा है, अंदर सरिया और मलबा हो सकता है, जिससे जान का खतरा है. इस बीच युवराज कार की छत से टॉर्च जलाकर लगातार मदद की गुहार लगाता रहा. बचाओ… बचाओ… की उसकी आवाजें वहां मौजूद लोगों के कानों तक पहुंचती रहीं, लेकिन हर गुजरता मिनट उसके लिए घातक साबित हो रहा था.
बेबस पिता की गुहार
पिता राजकुमार मेहता बार-बार अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे. उन्होंने कहा, मेरे बेटे को अभी बचा लीजिए, मैं कुछ भी कर लूंगा. लेकिन सिस्टम की सुस्ती, आपसी तालमेल की कमी और जोखिम लेने से बचने की मानसिकता ने पिता की हर गुहार को बेअसर कर दिया. करीब डेढ़ से दो घंटे तक युवराज पानी में तड़पता रहा. मौके पर मौजूद मोनिंदर नामक युवक ने हिम्मत दिखाते हुए खुद पानी में उतरने की कोशिश की, लेकिन गहराई और ठंड के कारण वह भी सफल नहीं हो सका.
एनडीआरएफ-एसडीआरएफ के आने के बाद भी देरी
जब पुलिस और फायर ब्रिगेड की कोशिशें नाकाम रहीं, तो गाजियाबाद से एनडीआरएफ को बुलाया गया. एनडीआरएफ टीम ने स्टीमर, टॉर्च और अन्य उपकरणों की मदद से करीब ढाई घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. आखिरकार युवराज को करीब 30 फीट गहरे पानी से बाहर निकाला गया. उसे तुरंत नॉलेज पार्क स्थित कैलाश अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. अस्पताल परिसर में मौजूद परिजनों की चीख-पुकार ने हर किसी की आंखें नम कर दीं.
SIT तलाश रही है दो घंटे की देरी का जवाब
अब SIT की जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर युवराज को दो घंटे तक मदद क्यों नहीं मिल पाई?
- क्या मौके पर मौजूद संसाधन नाकाफी थे?
- क्या विभागों के बीच समन्वय की कमी थी?
- क्या किसी ने जिम्मेदारी लेने से बचने की कोशिश की?
SIT इन सभी बिंदुओं पर गहराई से जांच कर रही है. टीम मृतक के परिवार से भी बातचीत करेगी, ताकि उनकी बातों और आरोपों को जांच में शामिल किया जा सके.
बिल्डर गिरफ्तार, जांच का दायरा बढ़ा
इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इंजीनियर मौत मामले में नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है. वह एमजेड विशटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड का मालिक बताया जा रहा है. नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. बिल्डर पर आरोप है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई और गड्ढे के आसपास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए. SIT की जांच में बिल्डर की भूमिका भी अहम मानी जा रही है.
जस्टिस फॉर युवराज : सड़कों पर उतरे लोग
युवराज की मौत के बाद सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका सोसाइटी के सैकड़ों निवासियों ने कैंडल मार्च निकालकर अपना आक्रोश जाहिर किया. ‘जस्टिस फॉर युवराज’ के बैनर और मोमबत्तियां हाथ में लेकर लोग सड़कों पर उतरे. निवासियों ने बिल्डर और नोएडा अथॉरिटी के खिलाफ नारेबाजी की. उनका कहना था कि यदि सेक्टर-150 का विकास योजनाबद्ध तरीके से किया गया होता और अधूरे निर्माण कार्यों पर समय रहते ध्यान दिया गया होता, तो यह हादसा नहीं होता. कैंडल मार्च के दौरान लोगों ने आरोप लगाया कि युवराज काफी देर तक मदद के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन उसे समय पर सहायता नहीं मिल पाई. निवासियों ने मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए खुले गड्ढों को तुरंत ढका जाए, नालों के किनारे मजबूत बैरिकेडिंग की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो.
पहले भी दी गई थी चेतावनी, फिर भी अनदेखी
मृतक युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने बताया कि सेक्टर-150 के निवासी पहले भी कई बार प्राधिकरण से नाले और गड्ढों के आसपास सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने की मांग कर चुके थे. रिफ्लेक्टर, साइन बोर्ड और पुख्ता बैरिकेडिंग लगाने के लिए लिखित शिकायतें भी दी गई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. राजकुमार मेहता का कहना है, अगर समय रहते प्राधिकरण ने चेतावनियों को गंभीरता से लिया होता, तो शायद आज मेरा बेटा जिंदा होता.
भूपेन्द्र चौधरी