'शंकराचार्य को बदनाम करने की साजिश', अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने योगी सरकार और रामभद्राचार्य पर मढ़ा आरोप

प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत नामजद हुए मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने 'आज तक' से विशेष बातचीत में इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने इस पूरी एफआईआर को गौरक्षा आंदोलन को कुचलने की एक राजनीतिक साजिश बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जगतगुरु रामभद्राचार्य पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य मुकुंदानंद. (Photo: Screengrab) शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य मुकुंदानंद. (Photo: Screengrab)

संतोष शर्मा

  • प्रयागराज ,
  • 25 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:11 PM IST

प्रयागराज पुलिस द्वारा पॉक्सो एक्ट में दर्ज एफआईआर के बाद आरोपी और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने बयान जारी कर इस मामले को पूरी तरह फर्जी बताया. मुकुंदानंद के अनुसार, शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी कांधला थाने का हिस्ट्रीशीटर (76A) है, जिसने व्यक्तिगत द्वेष और राजनीतिक दबाव में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को फंसाने की साजिश रची है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कथित पीड़ित बच्चे कभी उनके किसी संस्थान में नहीं पढ़े और न ही उनसे कभी मिले. यह एफआईआर मुख्य रूप से शंकराचार्य के गौरक्षा अभियान को रोकने के लिए दर्ज कराई गई है.

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गुरुकुल पद्धति को नष्ट करने का आरोप

मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि यह केवल एक एफआईआर नहीं, बल्कि सनातन शिक्षा और गुरुकुल पद्धति को खत्म करने की बड़ी साजिश है. उन्होंने तर्क दिया कि विधर्मी ताकतों की तरह अब हिंदुओं की धार्मिक शिक्षा के केंद्रों पर निशाना साधा जा रहा है. जब देश के सबसे बड़े धार्मिक पद (शंकराचार्य) पर ऐसे मनगढ़ंत आरोप लगाए जाएंगे, तो सामान्य व्यक्ति और गुरुकुल चलाने वाले संत डर जाएंगे. उन्होंने दावा किया कि उनके 10 शिक्षण संस्थानों में से किसी में भी इन बच्चों का कोई रिकॉर्ड नहीं है.

योगी सरकार और बीफ निर्यात का मुद्दा

मुकुंदानंद ने सीधा हमला करते हुए कहा कि यह सब रामभद्राचार्य और विशेषकर योगी आदित्यनाथ के इशारे पर हो रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत बीफ निर्यात में दूसरे नंबर पर है और इसका 40 फीसदी हिस्सा उत्तर प्रदेश से सप्लाई होता है. चूंकि शंकराचार्य जी ने गौरक्षा के लिए आवाज उठाई और सरकार की 'फर्जी पहचान' उजागर की, इसलिए उन्हें दबाने के लिए इस एफआईआर को आखिरी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया है.

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बच्चों को संरक्षण में लेने की मांग

आरोपी स्वामी ने उत्तर प्रदेश पुलिस से मांग की है कि कथित पीड़ित बच्चों को तत्काल हिस्ट्रीशीटर आशुतोष के कब्जे से छुड़ाकर सरकारी संरक्षण (बाल सुधार गृह) में लिया जाए. उन्होंने आशंका जताई कि उन बच्चों को प्रलोभन देकर या डरा-धमकाकर उनका माइंडवॉश किया जा रहा है. मुकुंदानंद ने उन अन्य 20 बच्चों की स्थिति पर भी सवाल उठाए जिनका जिक्र शिकायतकर्ता ने किया था. उन्होंने कहा कि अभी तक पुलिस का कोई नोटिस नहीं मिला है, लेकिन वे जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं.

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