महोबा: लाखों की लागत से बनी टंकी पानी भरते ही दरक गई; हाल ही में विधायक ने मंत्री से की थी शिकायत

महोबा जिले में 'जल जीवन मिशन' की कलई खुल गई है. जैतपुर ब्लॉक के नगारा डांग गांव में करोड़ों की लागत से बनी पानी की टंकी पहली बार भरते ही फटने की कगार पर आ गई. दीवारों से बहते पानी ने निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी दावों की पोल खोल दी है.

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इस पानी की टंकी को बने साल भर भी नहीं हुए (Photo- Screengrab) इस पानी की टंकी को बने साल भर भी नहीं हुए (Photo- Screengrab)

नाह‍िद अंसारी

  • महोबा ,
  • 16 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:10 PM IST

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के जैतपुर ब्लॉक अंतर्गत नगारा डांग गांव में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी पहली बार पूरी भरने पर दरक गई. घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग के कारण टंकी की दीवारों से पानी का रिसाव होने लगा और वह फटने की कगार पर पहुंच गई. ग्रामीणों ने इस बर्बादी का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है. ग्राम प्रधान गायत्री ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर जांच की मांग की है. 2025 में तैयार हुई इस परियोजना ने उद्घाटन से पहले ही दम तोड़ दिया है.

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विधायक की शिकायत के बाद सामने आई हकीकत

हाल ही में चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत ने जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह का रास्ता रोककर 'हर घर नल योजना' में हो रही लापरवाही की शिकायत की थी. नगारा डांग गांव की इस रिसती हुई टंकी ने विधायक के उन आरोपों पर मुहर लगा दी है. 

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सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की यह गहरी दरार अब शासन तक गूंज रही है. ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने निर्माण के दौरान मानकों को ताक पर रखकर काम किया है.

करोड़ों की योजना में लापरवाही 

ग्रामीणों के अनुसार, यह टंकी अब एक 'सफेद हाथी' बनकर रह गई है. ग्रामीण पूरन और सुशीला का कहना है कि एक तरफ टंकी से पानी बर्बाद हो रहा है, तो दूसरी तरफ आधे गांव की प्यास नहीं बुझ रही है. पाइपलाइन बिछाने और निर्माण का कार्य इतने दोयम दर्जे का है कि घरों में लगे नल सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं. पानी की सप्लाई सुचारू रूप से न होने के कारण जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है.

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दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग

नगारा डांग की ग्राम प्रधान ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि निर्माण में बरती गई अनियमितताओं की जांच जरूरी है. ग्रामीण प्रकाश राजपूत और अन्य निवासियों ने मांग की है कि इस टंकी को जल्द दुरुस्त किया जाए और जनता के पैसे की बर्बादी करने वाले दोषियों पर सख्त एक्शन लिया जाए. करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी अगर लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़े, तो प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है.

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